Kanpur मर्डर केस का फैसला: प्रेमी संग पति की जहर देकर हत्या और गुपचुप अंतिम संस्कार, पत्नी-प्रेमी को उम्रकैद
Kanpur poison murder case ने न सिर्फ एक परिवार को तोड़ दिया, बल्कि समाज और कानून व्यवस्था के सामने रिश्तों, विश्वास और अपराध की भयावह तस्वीर भी रख दी। किदवई नगर वाई ब्लॉक निवासी पुनीत कुमार शर्मा के बेटे प्रतीक शर्मा की हत्या के मामले में कानपुर की अदालत ने पत्नी और उसके प्रेमी को उम्रकैद की सजा सुनाकर यह साफ कर दिया कि कानून के सामने कोई भी साजिश छिप नहीं सकती। यह मामला केवल हत्या का नहीं, बल्कि धोखे, डर और मासूम बच्चों के सामने किए गए अपराध का भी प्रतीक बन गया है।
🔴 अदालत का सख्त फैसला: उम्रकैद और भारी जुर्माना
अपर जिला जज 20 नीलांजना की अदालत ने नेहा और उसके प्रेमी आयुष शर्मा को दोषी मानते हुए दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके साथ ही 30-30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाहों को कोर्ट में पेश किया गया, जिनमें मृतक के पिता, बेटी और होटल मैनेजर शामिल थे। गवाहों के बयान और पुख्ता सबूतों के आधार पर कोर्ट ने माना कि हत्या की साजिश सुनियोजित थी और इसमें दोनों आरोपियों की भूमिका साफ तौर पर सामने आती है।
🔴 शादी से हत्या तक: रिश्तों की दर्दनाक यात्रा
प्रतीक शर्मा का विवाह वर्ष 2017 में अयोध्या के फतेहगंज निवासी नेहा से हुआ था। दोनों के दो बच्चे थे—मान्या और अभिराज। शुरुआत में परिवार सामान्य दिखता था, लेकिन अंदर ही अंदर रिश्तों में दरार पड़ चुकी थी।
6 मार्च 2024 को नेहा बच्चों को लेकर प्रतीक के साथ घर से निकली। परिवार को बताया गया कि वे कुछ दिनों के लिए बाहर जा रहे हैं। लेकिन 12 मार्च को नेहा सिर्फ बच्चों के साथ वापस लौटी। जब प्रतीक के बारे में पूछा गया तो उसने गाड़ी खराब होने और बाद में लौटने की बात कही।
16 मार्च को नेहा बच्चों को दवाई दिलाने का बहाना बनाकर फिर घर से निकली और इस बार वापस नहीं लौटी। इस पर प्रतीक के पिता पुनीत कुमार शर्मा ने बेटे, बहू और बच्चों की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
🔴 पुलिस की जांच से खुला खौफनाक सच
पुलिस की पड़ताल में सामने आया कि नेहा ने अपने प्रेमी और प्रतीक के दोस्त आयुष शर्मा के साथ मिलकर लखनऊ के एक होटल में हत्या की साजिश रची। दोनों ने शराब में जहर मिलाकर प्रतीक को पिला दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।
इसके बाद शव का गुपचुप तरीके से अंतिम संस्कार कर दिया गया, ताकि किसी को शक न हो। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा और मामले की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की।
🔴 मासूम की गवाही: कंबल के नीचे से देखा खौफनाक मंजर
इस केस का सबसे दिल दहला देने वाला पहलू सात साल की मासूम बच्ची की गवाही रही। कोर्ट में उसने बताया कि वह कंबल के नीचे छिपकर देख रही थी, जब उसकी मां और आयुष ने उसके पिता को सफेद रंग का घोल पिलाया।
बच्ची ने कहा कि उसके बाद पापा के खर्राटे बंद हो गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन फिर वे कभी वापस नहीं आए। उसने यह भी बताया कि मां ने उसे धमकाया था कि अगर उसने किसी को कुछ बताया, तो उसका भी बुरा हाल कर दिया जाएगा।
यह बयान सुनकर कोर्ट में मौजूद हर व्यक्ति स्तब्ध रह गया।
🔴 होटल मैनेजर की पुष्टि: कमरा नंबर 205 की कहानी
लखनऊ के जिस होटल में यह वारदात हुई, वहां के मैनेजर ने भी कोर्ट में गवाही दी। उसने बताया कि नेहा, प्रतीक और आयुष तीनों एक साथ होटल के कमरा नंबर 205 में रुके थे।
प्रतीक ने खुद रजिस्टर में एंट्री की थी। बच्ची के रोने की आवाज सुनकर होटल स्टाफ कमरे तक पहुंचा, तब पता चला कि प्रतीक की तबीयत खराब है। एंबुलेंस आई और नेहा व प्रतीक उसमें गए, जबकि आयुष अपनी कार से पीछे-पीछे गया।
🔴 अभियोजन पक्ष की दलील: सुनियोजित साजिश
एडीजीसी संजय कुमार झा ने कोर्ट में कहा कि यह कोई अचानक हुई घटना नहीं, बल्कि पूरी तरह से योजनाबद्ध हत्या थी। नेहा और आयुष ने न सिर्फ हत्या की, बल्कि बच्चों को गुमराह करने और परिवार से सच छिपाने की भी कोशिश की।
सबूतों, गवाहों और परिस्थितिजन्य तथ्यों ने यह साबित कर दिया कि दोनों ने मिलकर यह अपराध किया और बाद में सबूत मिटाने का प्रयास किया।
🔴 समाज पर असर: रिश्तों में टूटता भरोसा
Kanpur poison murder case ने समाज को झकझोर कर रख दिया है। यह मामला केवल एक अपराध नहीं, बल्कि रिश्तों में भरोसे के टूटने की कहानी बन गया है। मासूम बच्चों के सामने पिता की हत्या और मां द्वारा धमकी दिए जाने की बात ने लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला एक मजबूत संदेश देता है कि कानून के सामने कोई भी साजिश, चाहे वह कितनी भी चालाकी से रची गई हो, टिक नहीं सकती।
🔴 परिवार का दर्द और न्याय की उम्मीद
प्रतीक के पिता पुनीत कुमार शर्मा का कहना है कि उन्होंने अपने बेटे को खो दिया, लेकिन अदालत के फैसले से उन्हें न्याय मिलने का एहसास हुआ है। उनके मुताबिक, यह सजा उन बच्चों के भविष्य के लिए भी जरूरी थी, जिन्होंने इतनी कम उम्र में अपने पिता को खो दिया।
🔴 आगे की राह: बच्चों का भविष्य और समाज की जिम्मेदारी
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मान्या और अभिराज का भविष्य कैसे संवरेगा। सामाजिक संगठनों और रिश्तेदारों ने बच्चों की देखभाल में मदद का भरोसा दिलाया है।
यह मामला पूरे समाज के लिए चेतावनी है कि रिश्तों में पारदर्शिता, संवाद और भरोसा कितना जरूरी है, ताकि ऐसे भयावह अंजामों से बचा जा सके।

