Greenland पर ट्रम्प का अल्टीमेटम: टैरिफ की धमकी, NATO से बातचीत और आर्कटिक में बढ़ता महाशक्तियों का टकराव
Trump Greenland control को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ताज़ा बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। व्हाइट हाउस से आई इस चेतावनी ने न केवल डेनमार्क और ग्रीनलैंड की राजनीति को प्रभावित किया है, बल्कि NATO, यूरोपीय देशों और आर्कटिक क्षेत्र में सक्रिय महाशक्तियों के बीच नए सिरे से रणनीतिक बहस छेड़ दी है। ट्रम्प ने साफ शब्दों में कहा कि यदि ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की उनकी योजना में किसी देश ने सहयोग नहीं किया, तो अमेरिका उन देशों पर टैरिफ लगाने से पीछे नहीं हटेगा।
🔴 व्हाइट हाउस से आई सख्त चेतावनी
शुक्रवार को व्हाइट हाउस में एक बैठक के दौरान ट्रम्प ने ग्रीनलैंड को अमेरिका के लिए “राष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरत” बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस मुद्दे पर NATO से बातचीत कर रहा है और चाहता है कि गठबंधन उसके रुख का समर्थन करे।
हालांकि, ट्रम्प ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किन देशों पर टैरिफ लगाया जा सकता है और इसके लिए वे किस कानूनी प्रावधान का सहारा लेंगे। फिर भी, उनके बयान ने यूरोप और उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र में कूटनीतिक बेचैनी बढ़ा दी है।
🔴 NATO की भूमिका और ट्रम्प का दबाव
ट्रम्प पहले भी कह चुके हैं कि NATO को अमेरिका का साथ देना चाहिए। उनका तर्क है कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर अपना प्रभाव नहीं बढ़ाया, तो रूस और चीन वहां अपनी मौजूदगी मजबूत कर सकते हैं।
ट्रम्प के अनुसार, यह स्थिति किसी भी सूरत में अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकती, क्योंकि आर्कटिक क्षेत्र भविष्य की वैश्विक सुरक्षा और व्यापारिक रणनीति का केंद्र बनता जा रहा है।
🔴 ‘गोल्डन डोम’ और ग्रीनलैंड का सैन्य महत्व
Trump Greenland control बयान में ट्रम्प ने ग्रीनलैंड को अपने महत्वाकांक्षी रक्षा प्रोजेक्ट “गोल्डन डोम” से भी जोड़ा। यह परियोजना इजराइल के आयरन डोम से प्रेरित एक मिसाइल रक्षा प्रणाली है, जिसका उद्देश्य चीन और रूस जैसे देशों से संभावित हमलों से अमेरिका को सुरक्षित रखना है।
ट्रम्प का कहना है कि ग्रीनलैंड इस परियोजना के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है, क्योंकि वहां से मिसाइल गतिविधियों पर पहले से ही निगरानी रखी जा सकती है। अमेरिका का थुले एयर बेस पहले से ही इस क्षेत्र में सक्रिय है, जो रूस और चीन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इस्तेमाल होता है।
🔴 अमेरिकी संसद का ग्रीनलैंड दौरा
ट्रम्प के बयान के समय ही अमेरिकी संसद का एक द्विदलीय प्रतिनिधिमंडल ग्रीनलैंड पहुंचा हुआ था। इस 11 सदस्यीय टीम का नेतृत्व डेमोक्रेट सीनेटर क्रिस कून्स कर रहे हैं। उनके साथ रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस और लिसा मर्कोव्स्की भी शामिल हैं।
इस प्रतिनिधिमंडल ने ग्रीनलैंड के सांसदों के अलावा डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन और ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन से मुलाकात की।
सीनेटर कून्स ने कहा कि टीम का उद्देश्य स्थानीय लोगों की बात सुनना और वाशिंगटन में बढ़ते तनाव को कम करना है।
🔴 ग्रीनलैंड के नेताओं की प्रतिक्रिया
ग्रीनलैंड की सांसद आजा चेमनित्ज ने कहा कि उन्हें दोस्तों और सहयोगियों की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका 2019 से लगातार दबाव बना रहा है।
उनके अनुसार, यह एक लंबी प्रक्रिया है, जो अभी खत्म नहीं हुई है, और जितना ज्यादा अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलेगा, उतना बेहतर होगा।
🔴 अमेरिकी संसद में दो धड़े
Trump Greenland control मुद्दे पर अमेरिकी संसद भी बंटी हुई नजर आ रही है।
सीनेटर लिसा मर्कोव्स्की ने ग्रीनलैंड को जबरन अमेरिका में शामिल करने के खिलाफ एक बिल पेश किया है। दूसरी ओर, एक रिपब्लिकन सांसद ने ग्रीनलैंड को जोड़ने के पक्ष में “ग्रीनलैंड एनेक्सेशन एंड स्टेटहुड बिल” पेश किया है, जो अभी हाउस और सीनेट दोनों में लंबित है।
ट्रम्प के विशेष दूत जेफ लैंड्री ने दावा किया कि अमेरिका को सीधे ग्रीनलैंड के नेताओं से बात करनी चाहिए, न कि डेनमार्क के जरिए। उनके मुताबिक, ट्रम्प इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह गंभीर हैं और जल्द ही कोई “सौदा” हो सकता है।
🔴 डेनमार्क का रुख: असहमति साफ
डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोक्के रासमुसेन ने ट्रम्प के विचारों को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है। उनका कहना है कि ग्रीनलैंड को खरीदने या उस पर कब्जा करने का विचार डेनमार्क के हितों के खिलाफ है।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग बढ़ाने को तैयार हैं, जिसमें ग्रीनलैंड में और अधिक अमेरिकी सैन्य अड्डों की संभावना भी शामिल है।
🔴 यूरोप का समर्थन और सैन्य कदम
यूरोपीय देशों ने डेनमार्क के समर्थन में ठोस कदम उठाए हैं। फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन, नॉर्वे, फिनलैंड, नीदरलैंड और ब्रिटेन ग्रीनलैंड में एक निगरानी मिशन के तहत सीमित संख्या में सैनिक भेज रहे हैं।
जर्मनी ने 13 सदस्यीय सुरक्षा टीम भेजने की घोषणा की है, जबकि स्वीडन ने सैन्य अभ्यास के लिए अपने अधिकारियों को ग्रीनलैंड भेजा है। इन कदमों को आर्कटिक में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में देखा जा रहा है।
🔴 ट्रम्प का दो-टूक संदेश: पूरा कंट्रोल चाहिए
ट्रम्प ने कहा कि केवल संधि या लीज से काम नहीं चलेगा, बल्कि ग्रीनलैंड पर पूरा नियंत्रण जरूरी है। उनका तर्क है कि रूसी और चीनी जहाजों की मौजूदगी अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन रही है।
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलीन लेविट ने भी कहा कि प्रशासन ग्रीनलैंड पर प्रभाव बढ़ाने के कई तरीकों पर विचार कर रहा है, जिनमें सैन्य विकल्प भी शामिल हैं।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने चेतावनी दी कि अगर ग्रीनलैंड की सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो अमेरिका को “कुछ करना ही पड़ेगा।”
🔴 ग्रीनलैंड क्यों बना वैश्विक रणनीति का केंद्र?
खास भौगोलिक स्थिति:
ग्रीनलैंड उत्तर अमेरिका और यूरोप के बीच स्थित है, जिससे यह अटलांटिक और आर्कटिक दोनों क्षेत्रों में रणनीतिक रूप से बेहद अहम बन जाता है।
रणनीतिक सैन्य महत्व:
यह क्षेत्र यूरोप और रूस के बीच मिसाइल निगरानी और सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने के लिए महत्वपूर्ण है। थुले एयर बेस इस रणनीति का प्रमुख केंद्र है।
चीन और रूस पर नजर:
आर्कटिक में रूस और चीन की बढ़ती गतिविधियों ने अमेरिका और उसके सहयोगियों को सतर्क कर दिया है।
प्राकृतिक संसाधन:
ग्रीनलैंड में दुर्लभ खनिज, तेल, गैस और रेयर अर्थ एलिमेंट्स के बड़े भंडार माने जाते हैं, जिनका भविष्य की तकनीक और ऊर्जा सुरक्षा में अहम रोल है।
नई समुद्री राहें:
ग्लोबल वार्मिंग के कारण आर्कटिक की बर्फ पिघलने से नई शिपिंग रूट्स खुल रही हैं, जो वैश्विक व्यापार के नक्शे को बदल सकती हैं।
🔴 कूटनीति बनाम शक्ति प्रदर्शन
Trump Greenland control बयान ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भविष्य की वैश्विक राजनीति कूटनीति से चलेगी या शक्ति प्रदर्शन से। ग्रीनलैंड का मुद्दा अब केवल एक द्वीप का नहीं, बल्कि आर्कटिक क्षेत्र में प्रभाव, संसाधनों और सुरक्षा संतुलन की लड़ाई बन चुका है।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में इस पर होने वाली बातचीत और फैसले यह तय करेंगे कि आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिका, यूरोप, रूस और चीन के बीच शक्ति संतुलन किस दिशा में जाएगा।

