Lucknow: बर्खास्त सैन्यकर्मी के कई खातों में 1.8 करोड़ रुपये जमा, शख्स देश विरोधी गतिविधियों में भी शामिल?
भारतीय सेना की शोरगुल में अधिकारी और जवानों की भरमार होती रहती है, लेकिन कभी-कभी वे लोग भी होते हैं जो इस संगठन की गरिमा और सम्मान को धूमिल करते हैं। यहाँ एक ऐसा मामला है जो लखनऊ से सामने आया है, जो देशद्रोह और सामाजिक चुनौतियों को लेकर हमें सोचने पर मजबूर करता है।
Lucknow एक बर्खास्त सैन्यकर्मी के कई खातों में 1.8 करोड़ रुपये जमा हुए हैं जिसके बाद जांच शुरू हो गई है. माना जा रहा है कि शख्स देश विरोधी गतिविधियों में भी शामिल है, जिसके चलते उसके खिलाफ सीनियर आर्मी ऑफिसर ने पुलिस ने एफआईआर दर्ज करवा दी है.
प्रिंस कुमार सिंह नाम का शख्स आलमबाग स्थित सेना के रिजर्व सप्लाई डिपो में स्टोर हैंडलर के पद पर काम करता था. हाल ही में उसके 1 दर्जन के करीब खातों में 1.82 करोड़ रुपये आने से हर कोई हैरान होने लगा. जब रुपये आने की जानकारी कमांडिंग अधिकारी मिथिलेश यादव को हुई, तो उन्होंने तुरंत ही आलमबाग थाने में मिथिलेश के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई. अब पुलिस इस मामले की छानबीन में लग चुकी है. ये भी आशंका जताई जा रही है कि मिथिलेश, देश विरोधी कामों में भी लिप्त है. कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के कारण प्रिंस को 19 दिसंबर 2023 को बर्खास्त किया गया था.
दरअसल, 29 सितंबर 2019 को प्रिंस, रिजर्व सप्लाई डिपो में नौकरी पर नियुक्त हुआ था. 20 अप्रैल 2022 को उसने एक हैरान करने वाली घटना को अंजाम दिया. प्रिंस ने अपना, पत्नी अर्चना और बच्चों का फ्लाइट का टिकट, बेंगलुरु तक बुक किया था. टिकट को बुक करने में उसने लेफ्टिनेंट कर्नल मिथिलेश यादव की आईडी का प्रयोग किया था.
इतना ही नहीं, उसने बुकिंग के दौरान आईडी तो लेफ्टिनेंट कर्नल का दिया, पर मोबाइल नंबर और ईमेल-आईडी अपनी दिया जिससे मिथिलेश को इस घपलेबाजी के बारे में न पता चले. प्रिंस ने यात्रा भी मिथिलेश के नाम पर ही की. जब इस बात की जानकारी हुई, तो विभागीय स्तर पर जांच करवाई गई.
जांच में प्रिंस ने अपने अपराध को कबूला और बताया कि वो बेंगलुरु घूमने के लिए नहीं, बल्कि बेटे का इलाज कराने के लिए गया था. जांच के दौरान ही उसने इस बात का भी खुलासा किया कि उसके 12 बैंक खाते हैं और उनमें करीब 1.82 करोड़ रुपये हैं.
प्रिंस कुमार सिंह, जो एक सैन्यकर्मी थे, के खातों में बड़ी रकम जमा होने की खबर ने बहुत सारे सवाल उठाए हैं। उनके खातों में लगभग 1.82 करोड़ रुपये पाए गए हैं, जिससे उस पर संदेह उठा है कि क्या यह धन सामाजिक और राष्ट्रीय दुर्भावनाओं को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था?
संदेह का यह अंदाजा इस बात से लगाया जा रहा है कि प्रिंस ने अपने और अपने परिवार के लिए फ्लाइट का टिकट बुक किया था, और यह बुकिंग करते समय वे अनैतिक तरीके से अपने सीनियर अधिकारी की आईडी का इस्तेमाल कर रहे थे। इस घपलेबाजी की जांच के बाद प्रिंस को निलंबित किया गया था।
यह मामला सामाजिक स्तर पर भी गंभीर चिंता उत्पन्न करता है। एक सैनिक के द्वारा देश के खिलाफ ऐसी किसी भी गतिविधि का हिस्सा बनना विशेष रूप से दुःखद है। सेना की ताकत और उसकी सम्मानजनक भूमिका को खोखला करने वाले ऐसे कार्यों से समाज को एक सख्त संदेश मिलता है कि ऐसी हरकतें ना सिर्फ नकारात्मक प्रभाव डालती हैं, बल्कि उनके परिणाम भी अत्यधिक भयानक हो सकते हैं।
इस घटना को देखते हुए हमें सोचने पर मजबूर होता है कि क्या हमारे समाज में देशद्रोह और अनैतिकता के मामले कितने गंभीर हो रहे हैं। स्थिति को समझने के लिए सकारात्मक पहलू देखना बहुत आवश्यक है, और साथ ही उसके निष्कर्षों पर काम करना भी।

