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काल्पनिक नहीं, बल्कि खरगोन जिले के महेश्वर नगर में इतिहास में दर्ज है माहिष्मती (Mahishmati) साम्राज्य

एसएस राजामौली की फिल्म ‘बाहुबली’ तो आपने देखी ही होगी. इस फिल्म का नायक अमरेंद्र बाहुबली जिस Mahishmati साम्राज्य का राजा होता है, उसका नाम याद करिये… उसका नाम था माहिष्मती Mahishmati . क्या आपको मालूम है कि माहिष्मती साम्राज्य काल्पनिक नहीं, बल्कि हमारे इतिहास में दर्ज है. फिल्म में इस साम्राज्य पर कब्जे के लिए लेकर कालकेय और बाहुबली के बीच युद्ध और बाहुबली व भल्लालदेव की लड़ाई भी आपने देखी ही होगी. फिल्म के दोनों भागों में इस माहिष्मती साम्राज्य की बात होती दिखी है. लेकिन असल में ये माहिष्मती कहां है? और उसकी अभी कैसी स्थिति है? यह जानना बड़ा रोचक होगा.

फिल्म ‘बाहुबली’ में दिखाए गए इस Mahishmati  साम्राज्य को भले काल्पनिक बताया गया हो, लेकिन इतिहास के पन्नों में झांकें, तो इसका संबंध मध्य प्रदेश से निकलता है. जी हां, एमपी के खरगोन जिले के महेश्वर नगर में महेश्वर किला है. इसे पहले होल्कर किले के नाम से भी जाना जाता था.

बेहद खूबसूरत दिखने वाले इस किले के बाईं ओर विंध्याचल पर्वत शृंखला है, जबकि दायीं तरफ सतपुड़ा की पहाड़ियां हैं. दोनों के बीच से नर्मदा नदी निकलती है. धर्मग्रंथों के अनुसार यह नगर रावण को पराजित करने वाले हैहयवंशी राजा सहस्रार्जुन की राजधानी रहा है. उस समय इसे माहिष्मती राज्य के नाम से जाना जाता था. आधुनिक इतिहास के मुताबिक बाद के दिनों में इस राज्य पर देवी अहिल्याबाई का शासन रहा है.

Mahishmati का इतिहास और वर्तमान नाम

नर्मदा नदी के तट पर स्थित महेश्वर किला जिसे प्राचीन काल में माहिष्मती साम्राज्य के नाम से जाना जाता था, उसका इतिहास 4500 साल से भी ज्यादा पुराना है. यह नगर आज भी अपनी खास पहचान बनाए हुए है. यह जरूर है कि माहिष्मति के नाम से पहचाने जाने वाला राज्य अब महेश्वर के नाम से जाना जाता है. यहां स्थित महेश्वर किला जिसे अहिल्या किला भी कहा जाता है, उसका नामकरण राजमाता अहिल्या देवी होल्कर के नाम पर किया गया था.

अहिल्याबाई की याद में करवाया किले का निर्माण

महेश्वर किले के निर्माण से जुड़ी एक और कहानी है. बताया जाता है कि अहिल्याबाई होल्कर की याद में उनकी बहू कृष्णाबाई होल्कर ने इस किले का निर्माण कराया था. 17वीं से 18वीं शताब्दी के मध्य होल्कर राजवंश ने यह किला बनवाया था. किले में अलग-अलग तरह की स्थापत्य शैली देखी जा सकती है. राजपूत, मराठा और मुगल शैली में बनी यह इमारत आज भी आलीशान है.

Mahishmati पर क्या कहते हैं इतिहासकार

पुराणों में वर्णित नगरी माहिष्मती Mahishmati  या महेश्वर को लेकर इतिहासकारों के बीच भेद है. कुछ लोग इसे जहां मध्य प्रदेश का नगर बताते हैं, तो वहीं कई विद्वानों का मत है कि यह भारत के पश्चिमी राज्य गुजरात में भरूच के पास नर्मदा नदी के तट पर अवस्थित था. एसएन मजूमदार की लिखी एनसिएंट ज्योग्रॉफी ऑफ इंडिया में माहिष्मती का अस्तित्व वर्तमान महेश्वर के रूप में दिया गया है, जबकि केएम मुंशी इसे गुजरात का नगर बताते हैं. 1807 में प्रकाशित एशियाटिक रिसर्चेस में मि. विल्फर्ड, स्व. करंदीकर, एसके दीक्षित जैसे इतिहासकारों ने भी वर्तमान महेश्वर को ही माहिष्मती बताया है.

 

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