Meerut लिंक रोड विवाद: 40 करोड़ खर्च, काम अधूरा, विधायक और कमिश्नर ने रेलवे स्टेशन के पास बस अड्डे पर दिया जोर












Meerut शहर की सबसे चर्चित और विवादित परियोजनाओं में से एक रेलवे रोड से बागपत रोड तक की लिंक रोड का अधूरा काम एक बार फिर सुर्खियों में है। मंगलवार को कैंट विधायक अमित अग्रवाल, कमिश्नर हृषिकेश भास्कर यशोद और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण किया। 40 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी यह लिंक रोड अधूरी पड़ी है। मुख्य कारण है – एक अस्पताल की भूमि का अधिग्रहण न होना।
40 करोड़ खर्च, जनता को शून्य लाभ
जनता की नाराज़गी भी अब चरम पर है। करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं लेकिन लोग अब भी जाम, अव्यवस्था और लंबा चक्कर काटने को मजबूर हैं। स्थानीय नागरिकों ने तो इसके लिए समिति बनाकर आंदोलन तक किया था। कई बार नक्शा बदला गया, कई प्रस्ताव आए, लेकिन हर बार बाधा वही रही – जमीन का अधिग्रहण।
विधायक का तीखा सवाल: अधिसूचना क्यों नहीं जारी हुई?
कैंट विधायक अमित अग्रवाल ने निरीक्षण के दौरान सवाल दागे कि जब शुरुआत में ही यह तय हो चुका था कि अस्पताल की जमीन से रोड निकलेगी, तो अधिसूचना समय रहते क्यों जारी नहीं हुई? यही लापरवाही आज 40 करोड़ रुपये डूबने और जनता को परेशानी झेलने की वजह बनी। उन्होंने कहा, “सरकारी खजाने का पैसा जनता के टैक्स से आता है, इसे बर्बाद करने का कोई हक किसी को नहीं है।”
कमिश्नर का भरोसा: अधिग्रहण प्रक्रिया जल्द पूरी होगी
कमिश्नर हृषिकेश भास्कर यशोद ने आश्वासन दिया कि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया जल्द पूरी कराई जाएगी और लिंक रोड को प्राथमिकता से पूरा किया जाएगा।
भविष्य की योजना: रेलवे स्टेशन के पास बस अड्डा
निरीक्षण का दूसरा बड़ा मुद्दा था – भैसाली रोडवेज बस अड्डे का स्थानांतरण। अभी इसे मोदीपुरम और मोहिउद्दीनपुर शिफ्ट करने की योजना है, लेकिन विधायक अमित अग्रवाल ने इस पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यदि बस अड्डे को 20 किलोमीटर दूर ले जाया गया तो शहर की जनता को भारी दिक्कत होगी।
रेलवे स्टेशन के पास बस अड्डे की मांग क्यों?
रेलवे स्टेशन से जुड़ाव होने पर यात्रियों को सीधे ट्रेन और बस दोनों की सुविधा मिलेगी।
शहर की सड़कों पर जाम की समस्या घटेगी।
मेट्रो स्टेशन से सीधा कनेक्शन मिलेगा।
अन्य शहरों की तरह मेरठ में भी “रेलवे स्टेशन के पास बस अड्डा” मॉडल कामयाब साबित होगा।
सेना की जमीन पर नजर
विधायक और कमिश्नर ने रेलवे स्टेशन के पास सेना की खाली पड़ी बड़ी ज़मीन का निरीक्षण किया। प्रस्ताव रखा गया कि यदि रक्षा मंत्रालय से लीज पर यह भूमि मिल जाए तो भैसाली रोडवेज बस अड्डा यहीं संचालित किया जा सकता है। रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक संदीप नायक भी इस मौके पर मौजूद रहे।
मेरठ के लिए यह क्यों ज़रूरी है?
मेरठ NCR का अहम हिस्सा है। यहां रोज़ लाखों यात्री आवाजाही करते हैं। एक तरफ़ मेट्रो प्रोजेक्ट का काम चल रहा है, दूसरी तरफ रोडवेज और रेलवे को मजबूत करने की आवश्यकता है। यदि लिंक रोड और बस अड्डा प्रोजेक्ट समय पर पूरे हो जाएं, तो मेरठ ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत पा सकता है और NCR के बड़े ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित हो सकता है।
स्थानीय जनता की उम्मीदें और नाराज़गी
शहरवासी कहते हैं कि हर बार कोई न कोई योजना बनती है, करोड़ों खर्च होते हैं लेकिन नतीजा अधूरा ही रहता है। लोगों का मानना है कि अगर वास्तव में रेलवे स्टेशन के पास बस अड्डा बना तो यह ऐतिहासिक कदम होगा।
राजनीतिक हलचल और प्रशासन पर दबाव
विकास कार्यों की धीमी रफ्तार को लेकर विपक्षी दल भी सवाल उठा सकते हैं। विधायक का खुलकर सामने आना प्रशासनिक दबाव को और बढ़ा रहा है। देखना होगा कि भूमि अधिग्रहण और बस अड्डे का यह प्रस्ताव कितना जल्दी हकीकत बनता है।







