Moradabad: अपने ही थाने में अरेस्ट हुआ रिश्वतखोर पुलिस इंस्पेक्टर, मांगी थी 20 हज़ार की रिश्वत
पुलिस रिश्वत लेने का मामला एक ऐसी बुरी प्रथा है जो देश की न्यायिक प्रक्रिया और व्यवस्था को काफी हानि पहुंचा रही है। यह अभिशाप है कि वे लोग जो समाज की सुरक्षा और क़ानून की रक्षा के लिए होते हैं, वे ही अक्सर अपने स्वार्थ के लिए इस तरह के गलत काम में शामिल हो जाते हैं।\
Moradabad पुलिस के रिश्वतखोर पुलिस इंस्पेक्टर को एंटीकरप्शन टीम ने पांच हज़ार की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है. आरोपी थाना सिविल लाइंस के अगवानपुर चौकी का सहायक इंचार्ज है. इस दरोगा पर आरोप है कि उनसे शस्त्र लाइसेंस पर रिपोर्ट लगाने के नाम पर 20 हज़ार की रिश्वत मांगी थी. रिश्वत न देने पर दरोगा, शिकायतकर्ता को प्रताड़ित कर रहा था. दरोगा की प्रताड़ना से तंग आकर शिकायतकर्ता ने एंटीकरप्शन की टीम से शिकायत की थी. इसके बाद एंटीकरप्शन की टीम ने दरोगा को 5 हज़ार की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है.
एंटीकरप्शन टीम के सीओ मोहम्मद फाजिल सिद्दीकी ने बताया कि हमारे पास एक शिकायत कर्ता निजार खां पुत्र फिदा खां आए थे; जो थाना सिविल लाइंस मुरादाबाद के रहने वाले हैं. इन्होंने शिकायत की थी कि शस्त्र लाइसेंस पर रिपोर्ट लगाने के नाम पर 20 हजार की मांग की गई है. इसमें से 5 हजार रुपए लेकर इनको बुलाया गया था. इधर, जब शिकायतकर्ता निजार ने 5 हजार की पहली किस्त दारोगा को दे रहे थे; ठीक उसी समय हमारी टीम ने उनको गिरफ्तार कर लिया.
अब इस मामले में मुकदमा पंजीकृत कर आरोपी को कस्टडी में ले लिया गया है. आगे की कार्रवाई करते हुए आरोपी को रिमांड पर बरेली लेकर जाएंगे उसके बाद इन्वेस्टिगेशन होगी.
शिकायकर्ता निजार खां ने बताया कि सिविल लाइंस थाने में एसआई महेशपाल के द्वारा घूस मांगी जा रही थी; मैं पैसे देना नहीं चाह रहा था. ये लोग मुझे बहुत प्रताड़ित कर रहे थे. मैं गरीब आदमी हूं; दो-तीन महीने से लगातार फर्जी केस मेरे ऊपर लगवा रहे थे. इन्होंने 25 हजार रुपए मांगे थे और कहा था कि हम उसमें आपकी रिपोर्ट लगा देंगे. मजबूर होकर मैं एंटी करप्शन से गुहार लगाई और तब जाकर दारोगा पकड़ में आए. अगवानपुर चौकी प्रभारी ने 25 हजार रुपए मांगे थे. फिर 20 हजार रुपए तय हुए. इसमें से पहली किस्त के रूप में 5 हजार रुपए लेते हुए पकड़े गए.
यूपी के मुरादाबाद में हुए इस मामले में पुलिस इंस्पेक्टर को रिश्वत लेते पकड़ा गया है, जोकि एक गंभीर समस्या है। इसमें सिविल लाइंस थाने के अधिकारी की जिम्मेदारी भी आ रही है, जिन्होंने इस प्रकार की गलत क्रियाओं को बढ़ावा दिया। रिश्वत के मामले में शिकायतकर्ता निजार खां का बहादुरी सलामी जाने चाहिए, जिन्होंने इस अन्याय के खिलाफ उठाव दिया।
भारतीय समाज में रिश्वत लेना और देना एक गंभीर समस्या है, जिसे लेकर समाज को गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है। रिश्वत लेना और देना दोनों ही अपराध हैं, जो समाज के न्यायिक तंत्र को कमजोर करते हैं। यह समस्या न केवल पुलिस वर्ग में है, बल्कि यह समाज के हर वर्ग में मौजूद है।
हमें समाज में रिश्वत के खिलाफ एक मजबूत और सशक्त आंदोलन चलाना चाहिए। हमें इस बुरी प्रथा को समाप्त करने के लिए सक्रिय रूप से काम करना चाहिए। रिश्वत न लेना और न देना हमारा कर्तव्य है, और हमें इसे जनहित में बदलने के लिए उत्साहित होना चाहिए।
इस मामले में आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए और ऐसे ही रिश्वतखोर पुलिस अधिकारियों को सजा मिलनी चाहिए, ताकि ये संदेश दिया जा सके कि राष्ट्र की कानूनी व्यवस्था को कोई भी अपमानित नहीं कर सकता।
अखबारों और मीडिया के माध्यम से लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है, ताकि रिश्वत के इस कठिन समस्या को हल किया जा सके। इस समस्या को हल करने के लिए हमें सभी को मिलकर काम करना होगा, ताकि हम समाज में न्याय और सच्चाई की भावना को मजबूत बना सकें।

