Muzaffarnagar में वरिष्ठ अधिवक्ता ने शस्त्र लाइसेंस हस्तांतरण में देरी पर उठाए सवाल, एसएसपी को दोबारा भेजी शिकायत
मुजफ्फरनगर। Arms License से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसमें वरिष्ठ अधिवक्ता प्रमोद त्यागी ने शस्त्र लाइसेंस हस्तांतरण प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। उनका कहना है कि शस्त्र लाइसेंस हस्तांतरण के लिए आवश्यक Muzaffarnagar पुलिस आख्या एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी संबंधित थाने से प्रेषित नहीं की गई है। इस संबंध में उन्होंने एक बार फिर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) मुजफ्फरनगर को व्हाट्सएप के माध्यम से शिकायत भेजकर शीघ्र कार्रवाई की मांग की है।
वरिष्ठ अधिवक्ता का कहना है कि इससे पहले भी उन्होंने इस विषय में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुजफ्फरनगर तथा पुलिस महानिदेशक, लखनऊ को शिकायत भेजी थी, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो सकी है। उन्होंने अपनी नवीन शिकायत के साथ संबंधित व्हाट्सएप संदेश का स्क्रीनशॉट भी संलग्न करने की बात कही है।

10 मई को भेजा गया था थाना मंसूरपुर को प्रार्थना पत्र
प्रमोद त्यागी के अनुसार वे ग्राम नावला, थाना मंसूरपुर क्षेत्र के निवासी हैं तथा पेशे से अधिवक्ता हैं। उन्होंने बताया कि 68 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद उन्होंने अपने शस्त्र लाइसेंस को अपने पुत्र अमित त्यागी एवं कपिल त्यागी के नाम हस्तांतरित कराने की वैधानिक प्रक्रिया प्रारंभ की।
उनका कहना है कि इस प्रक्रिया के तहत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय से 10 मई 2026 को थाना मंसूरपुर को आवश्यक पुलिस आख्या भेजने के लिए पत्र प्रेषित किया गया था। इसके बावजूद निर्धारित रिपोर्ट अब तक संबंधित कार्यालय को उपलब्ध नहीं कराई गई है।
‘पांच बार थाने जाने के बाद भी नहीं भेजी गई रिपोर्ट’
वरिष्ठ अधिवक्ता का आरोप है कि पुलिस रिपोर्ट तैयार कराने के लिए वे स्वयं पांच बार थाना मंसूरपुर जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद संबंधित आख्या लंबित है। उनका कहना है कि लगातार प्रयासों के बावजूद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है, जिससे शस्त्र लाइसेंस हस्तांतरण का कार्य भी अटका हुआ है।
उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया है कि मामले में विलंब के कारणों की जांच कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी हो सके।
एक जैसे नाम के कारण भ्रम की आशंका जताई
प्रमोद त्यागी ने अपनी शिकायत में यह भी उल्लेख किया है कि थाना स्तर पर उन्हें बताया गया कि उनके पुत्र कपिल त्यागी के नाम पर एक आपराधिक मामला दर्ज है। हालांकि उन्होंने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि संबंधित मामला किसी अन्य व्यक्ति प्रमोद का है, जिसका नाम समान है, लेकिन वह अलग जाति एवं परिवार से संबंधित है।
उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में उन्होंने स्वयं थाना मंसूरपुर जाकर अपना तथा अपने पुत्र का आधार कार्ड भी प्रस्तुत किया था, ताकि पहचान संबंधी भ्रम दूर किया जा सके। इसके बावजूद उनकी रिपोर्ट लंबित बनी हुई है।
एसएसपी से निष्पक्ष जांच और सही आख्या भेजने की मांग
वरिष्ठ अधिवक्ता ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से अनुरोध किया है कि संबंधित मामले की तथ्यात्मक जांच कराई जाए और यदि किसी अन्य व्यक्ति के मामले के कारण भ्रम उत्पन्न हुआ है तो उसे दूर करते हुए सही पुलिस आख्या शीघ्र संबंधित कार्यालय को भेजने के निर्देश दिए जाएं।
उन्होंने कहा कि पुलिस सत्यापन जैसी प्रशासनिक प्रक्रिया समयबद्ध और तथ्यपरक होनी चाहिए, ताकि आवेदकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार
फिलहाल इस संबंध में पुलिस प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह मामला फिलहाल शिकायत के स्तर पर है और संबंधित अधिकारियों द्वारा जांच एवं आवश्यक कार्रवाई किए जाने की प्रतीक्षा की जा रही है।
यदि जांच में यह स्पष्ट होता है कि समान नाम के कारण भ्रम की स्थिति बनी है, तो नियमानुसार आवश्यक संशोधन करते हुए आगे की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। वहीं यदि किसी अन्य कारण से रिपोर्ट लंबित है, तो उसका भी परीक्षण संबंधित विभाग द्वारा किया जाएगा।

