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Muzaffarnagar में किसानों की महापंचायत, 34 मांगों को लेकर भाकियू तोमर ने भरी हुंकार; कर्जमाफी से लेकर एमएसपी कानून तक उठे मुद्दे

Muzaffarnagar में किसानों के मुद्दों को लेकर एक बार फिर बड़ी आवाज उठी। सर्कुलर रोड स्थित राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में भारतीय किसान यूनियन (तोमर) की ओर से मुजफ्फरनगर किसान महापंचायत का आयोजन किया गया। महापंचायत में बड़ी संख्या में किसान और संगठन के कार्यकर्ता पहुंचे। मंच से किसानों से जुड़े बिजली, सिंचाई, कर्ज, गन्ना भुगतान, एमएसपी, फसल मुआवजा, प्रदूषण, रोजगार और प्रशासनिक समस्याओं समेत कुल 34 प्रमुख मांगें शासन-प्रशासन के सामने रखी गईं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भाकियू (तोमर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजीव तोमर ने कहा कि किसी भी संगठन की असली ताकत उसकी एकजुटता में होती है। उन्होंने किसानों से अपने अधिकारों और समस्याओं को लेकर संगठित होकर संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया। उनका कहना था कि जब तक किसानों की मांगों का समाधान नहीं होता, संगठन का आंदोलन जारी रहेगा।

संगठन की एकजुटता को बताया किसानों की सबसे बड़ी ताकत

महापंचायत में संजीव तोमर ने कहा कि कोई भी आंदोलन तभी प्रभावी हो सकता है, जब उसके पीछे लोगों की एकजुट ताकत और अपने उद्देश्य के प्रति दृढ़ता हो। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपने अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर एकजुट रहें।

उन्होंने साफ कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान होने तक आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। महापंचायत में रखी गई मांगों में कई मुद्दे ऐसे हैं, जो लंबे समय से किसानों और ग्रामीण आबादी के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।

कर्जमाफी और एमएसपी गारंटी कानून की मांग

भाकियू (तोमर) ने किसानों का सम्पूर्ण कर्ज माफ करने की मांग उठाई। इसके साथ ही फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर कानूनी गारंटी लागू करने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई।

संगठन ने कहा कि किसानों को उनकी फसल का लाभकारी मूल्य मिलना चाहिए और उत्पादन लागत के अनुरूप मूल्य निर्धारण की व्यवस्था को मजबूत किया जाना चाहिए। मंडी व्यवस्था को भी बेहतर बनाने की मांग की गई, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने के दौरान बिचौलियों और अनावश्यक कटौती से परेशानी न हो।

मुजफ्फरनगर में एम्स और मेरठ में हाई कोर्ट की शाखा की मांग

महापंचायत में मुजफ्फरनगर में एम्स अस्पताल की स्थापना की मांग भी उठाई गई। इसके अलावा मेरठ में हाई कोर्ट की शाखा लाने की मांग को भी किसानों की प्रमुख मांगों में शामिल किया गया।

संगठन का कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य और न्यायिक सुविधाओं के लिए लंबे समय से कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में क्षेत्र में बड़े संस्थानों की स्थापना से आम लोगों को राहत मिल सकती है।

आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे खत्म करने की मांग

किसान संगठन ने आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज किए गए मुकदमों को समाप्त करने की मांग भी रखी। इसके साथ ही पुलिस और प्रशासन से किसानों के साथ सहयोगात्मक रवैया अपनाने की मांग की गई।

संगठन ने कहा कि छोटे कृषि विवादों को स्थानीय स्तर पर ही सुलझाया जाना चाहिए और कृषि भूमि से जुड़े मामलों में किसानों को अनावश्यक पुलिस या प्रशासनिक कार्रवाई से राहत मिलनी चाहिए।

नहरों और रजवाहों की सफाई, टेल तक पानी पहुंचाने की मांग

किसानों की प्रमुख समस्याओं में सिंचाई को भी शामिल किया गया। भाकियू (तोमर) ने नहरों और रजवाहों की नियमित सफाई कराने तथा टेल तक पानी पहुंचाने की मांग की, ताकि किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सके।

साथ ही किसानों को सिंचाई के लिए बिजली निर्धारित समय पर उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई।

स्मार्ट मीटर पर रोक और बिजली बिलों की समस्या उठी

महापंचायत में स्मार्ट मीटर लगाने पर पूर्ण रोक लगाने की मांग की गई। संगठन ने आरोप लगाया कि किसानों पर जबरन स्मार्ट मीटर नहीं थोपे जाने चाहिए।

बिजली बिलों की समस्याओं के समाधान के लिए ब्लॉक स्तर पर बिजली विभाग के कैंप लगाने की मांग की गई, जहां किसानों के बिलों की जांच और सुधार के बाद उन्हें जमा कराया जा सके।

संगठन ने बिजली विभाग पर किसानों के उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कहा कि तहसील और बिजली विभागों में किसानों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से किया जाना चाहिए।

एक अन्य मांग में कहा गया कि किसानों के महज 5 हजार रुपये के बकाये पर कनेक्शन काट दिए जाते हैं, जबकि बड़े उद्योगपतियों पर करोड़ों-अरबों रुपये बकाया होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होती। संगठन ने इस व्यवस्था में समानता की मांग की।

नलकूप कनेक्शन मुफ्त और घरेलू बिजली में 50 प्रतिशत छूट

किसानों के नलकूप कनेक्शन मुफ्त करने तथा घरेलू बिजली पर 50 प्रतिशत छूट देने की मांग भी महापंचायत में उठाई गई।

किसान संगठन का तर्क है कि बिजली और सिंचाई की लागत बढ़ने से खेती करना लगातार महंगा होता जा रहा है। ऐसे में किसानों को बिजली के क्षेत्र में राहत देने की जरूरत है।

60 साल के बाद 10 हजार रुपये मासिक पेंशन की मांग

भाकियू (तोमर) ने 60 वर्ष की आयु पूरी करने वाले किसानों को हर महीने 10 हजार रुपये पेंशन देने की मांग रखी। इसके साथ ही किसानों की समस्याओं और नीतिगत मुद्दों पर निर्णय लेने के लिए किसान आयोग के गठन की मांग भी की गई।

संगठन ने किसानों के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं के रोजगार का मुद्दा भी उठाया और किसानों के बच्चों तथा बेरोजगार युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की।

गन्ना किसानों के भुगतान और पर्ची का मुद्दा

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों से जुड़े अहम मुद्दे गन्ने को लेकर भी महापंचायत में आवाज उठी। संगठन ने गन्ने का भुगतान समय से कराने और बकाया भुगतान पर किसानों को ब्याज देने की मांग की।

गन्ने की पर्ची और टोल व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की मांग भी की गई। संगठन ने कहा कि किसानों को गन्ने की पर्ची के लिए अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाना चाहिए।

बारिश और ओलावृष्टि से फसल नुकसान का मुआवजा मांगा

महापंचायत में हाल की भारी बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का मुद्दा भी उठाया गया। भाकियू (तोमर) ने सरकार से फसलों के नुकसान का सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग की।

इसके साथ ही आवारा पशुओं और जंगली जानवरों से फसलों को होने वाले नुकसान का स्थायी समाधान निकालने की मांग की गई। संगठन ने किसानों के खेतों की तारबंदी कराने और जानवरों द्वारा नष्ट की गई फसलों का मुआवजा देने की मांग रखी।

किसानों की जमीन और छोटे विवादों का स्थानीय समाधान

संगठन ने कृषि भूमि से जुड़े विवादों में किसानों को राहत देने की मांग की। छोटे कृषि विवादों को स्थानीय स्तर पर सुलझाने तथा किसानों को अनावश्यक प्रशासनिक और पुलिस कार्रवाई से बचाने की बात कही गई।

साथ ही किसानों को घरेलू जरूरत के लिए मिट्टी या रेत ले जाने पर अनावश्यक रूप से परेशान न करने और पुलिस-प्रशासन से ऐसे मामलों में सहयोग करने की मांग की गई।

रोहन राठी हत्याकांड की निष्पक्ष जांच की मांग

महापंचायत में रोहन राठी की हत्या का मामला भी उठाया गया। संगठन ने कहा कि 24 सितंबर को अज्ञात लोगों द्वारा रोहन राठी की हत्या की गई थी। भाकियू (तोमर) ने मुजफ्फरनगर पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और वास्तविक आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजने की मांग की।

ट्रैक्टर की उम्र को लेकर भी बड़ा मुद्दा

किसान संगठन ने ट्रैक्टरों की निर्धारित उम्र को लेकर भी मांग रखी। संगठन का कहना है कि ट्रैक्टर को केवल उसकी उम्र के आधार पर स्थायी रूप से प्रतिबंधित नहीं किया जाना चाहिए। जब तक ट्रैक्टर चलने की स्थिति में है, तब तक किसानों को उसके संचालन को लेकर पुलिस की ओर से परेशान नहीं किया जाना चाहिए।

यह मांग किसानों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि ट्रैक्टर खेती के लिए सबसे जरूरी कृषि उपकरणों में शामिल है और नए ट्रैक्टर खरीदना हर किसान के लिए आसान नहीं होता।

पेपर मिलों के प्रदूषण पर भी उठी आवाज

मुजफ्फरनगर में औद्योगिक प्रदूषण का मुद्दा भी महापंचायत में प्रमुखता से उठाया गया। भाकियू (तोमर) ने आरोप लगाया कि जिले में पेपर मिलों से होने वाले प्रदूषण के कारण किसानों और ग्रामीण आबादी को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

संगठन ने मांग की कि यदि प्रदूषण के कारण कोई किसान बीमार होता है तो उसके इलाज का खर्च संबंधित फैक्ट्री मालिक से दिलाया जाए। साथ ही प्रशासन से जिले में प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण की कार्रवाई करने की मांग की गई।

केला गांव में अंडरपास की मांग

मुजफ्फरनगर से बिजनौर, पानीपत और खटीमा मार्ग पर केला गांव में अंडरपास की मांग भी महापंचायत में उठाई गई। संगठन के मुताबिक किसान पिछले करीब सात महीने से अंडरपास की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक इस दिशा में समाधान नहीं हुआ है।

भाकियू (तोमर) ने जल्द से जल्द अंडरपास उपलब्ध कराने की मांग की।

महंगाई और महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा भी शामिल

महापंचायत में बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण की मांग भी रखी गई। संगठन ने कहा कि महंगाई ने किसानों के साथ-साथ आम लोगों की आर्थिक स्थिति पर भी दबाव बढ़ाया है।

इसके अलावा महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए बलात्कार के मामलों में आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई, ताकि ऐसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

बिना जांच मुकदमा दर्ज न करने की मांग

भाकियू (तोमर) ने प्रदेशभर की पुलिस को निर्देश दिए जाने की मांग की कि किसी भी मामले में बिना जांच के मुकदमा दर्ज न किया जाए। संगठन के अनुसार पहले मामले की सही जांच हो और उसके बाद ही मुकदमा दर्ज किया जाए।

संगठन ने कहा कि झूठे या विवादित मामलों में किसानों और आम लोगों को अनावश्यक कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

परमिट और टैक्स जमा करने वाली बसों को चलाने की अनुमति की मांग

महापंचायत में परिवहन से जुड़ा मुद्दा भी सामने आया। भाकियू (तोमर) ने दावा किया कि पिछले करीब छह महीने से परमिट वाली और टैक्स जमा करने वाली कुछ बसों को एसपी ट्रैफिक की ओर से रुकवाया गया है।

संगठन ने ऐसी बसों को चलाने की अनुमति देने की मांग की, जिनके परमिट और टैक्स संबंधी औपचारिकताएं पूरी हैं।

महापंचायत में ये पदाधिकारी रहे मौजूद

महापंचायत में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रतिनिधि पवन त्यागी, कोषाध्यक्ष श्रवण त्यागी, जिलाध्यक्ष हनी बालियान, निखिल चौधरी, मीडिया प्रभारी अजय त्यागी, नितिन त्यागी, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष अंकित गुर्जर और प्रदेश उपाध्यक्ष दीपक तोमर समेत कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।

महापंचायत के जरिए भाकियू (तोमर) ने किसानों से जुड़े स्थानीय और प्रदेश स्तरीय मुद्दों को एक साथ उठाते हुए शासन-प्रशासन से उनके समाधान की मांग की। अब देखना यह होगा कि इन मांगों पर प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से क्या कार्रवाई होती है।

मुजफ्फरनगर की इस किसान महापंचायत में कर्जमाफी, एमएसपी की कानूनी गारंटी, गन्ना भुगतान, बिजली, सिंचाई, फसल मुआवजा, प्रदूषण और किसानों के बच्चों के रोजगार जैसे कई अहम मुद्दे एक साथ उठाए गए। भाकियू (तोमर) ने साफ किया है कि मांगों का समाधान होने तक संगठन किसानों की आवाज उठाता रहेगा। अब प्रशासन और सरकार के स्तर पर इन मांगों को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर किसानों की नजर रहेगी।

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