Muzaffarnagar में खाद्य सुरक्षा विभाग की नींद टूटी, 90 हजार रुपये के मिलावटी खोये और रसगुल्ले हुए नष्ट – त्योहारों से पहले जागे अधिकारी!
Muzaffarnagar में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने जो हाल में एक बड़ी कार्रवाई की है, उसे देखकर यह सवाल उठता है कि क्या खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी अब तक सोते रहे थे? क्या वह तभी जागे जब त्योहारों के मौसम में बासी और घटिया खोया-रसगुल्ला खा रहे लोग उनकी नजरों से बच रहे थे? क्या उनकी नींद तब टूटी, जब बाजार में त्योहारों के मौके पर खराब सामान बिकने की संभावना बढ़ी? यह सवाल इस कार्रवाई के बाद चर्चा का विषय बन गया है।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने की बड़ी कार्रवाई
मुजफ्फरनगर के खाद्य सुरक्षा विभाग ने हाल ही में एक विशाल कार्रवाई की, जिसमें लगभग 90 हजार रुपये मूल्य के खाद्य पदार्थों का विनष्टीकरण किया गया। यह कार्रवाई उप जिलाधिकारी मुख्यालय, निकिता शर्मा के निर्देशन में की गई। क्या यह पहली बार था जब खाद्य सुरक्षा विभाग ने ऐसा कदम उठाया? या फिर अधिकारियों की नींद तब टूटी जब फेस्टिव सीजन में खराब और मिलावटी खाद्य पदार्थों का बाजार में होड़ मचने वाली थी?
सहाायक आयुक्त खाद्य अर्चना धीरान के मुताबिक, मेरठ से मुजफ्फरनगर आ रही एक कार में लगभग 250 किलो (2.5 कुंटल) खोया जब्त किया गया। जांच में पाया गया कि यह खोया मानक के अनुसार नहीं था और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता था। इसलिए, उसे तुरंत नष्ट कर दिया गया। अनुमानित कीमत करीब 55 हजार रुपये बताई जा रही थी।
खोजी कार्रवाई में मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी श्री शिव कुमार मिश्रा भी शामिल थे। इनकी टीम ने विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर खाद्य पदार्थों के नमूने लिए। इनमें से महिंद्रा सुप्रो वाहन से मिल्क क्रीम, अंशुल मावा भट्टी से मिस्ड मिल्क और खोया, कुतुबपुर स्थित रमेश मावा भट्टी से भी खोया और मिस्ड मिल्क के नमूने लिए गए।
साथ ही, खतौली के बड़ा बाजार स्थित अग्रवाल किराना मर्चेंट से मिक्स मसाला पाउडर, और चंद्रसेना गांव स्थित चार मावा भट्टियों से खोया के नमूने एकत्र किए गए। एक एक्शन के बाद टीम ने मौके पर ही 50 किलो दूषित खोया नष्ट कर दिया।
रसगुल्ले का क्या हुआ?
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने सदर तहसील के कुल्हैड़ी गांव में स्थित रसगुल्ला निर्माण इकाई पर भी छापेमारी की। वहां से रसगुल्ले का एक नमूना लिया गया और पाया गया कि वह अस्वच्छ, दूषित और मिलावटी थे। इसका नतीजा यह निकला कि लगभग 340 किलो रसगुल्ला, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 51 हजार रुपये थी, उसे तुरंत नष्ट कर दिया गया।
क्या अब त्योहारों के दौरान खोये और रसगुल्ले के शौकिनों को अपना पसंदीदा मिठा खाने के लिए डरना पड़ेगा? क्या यह कार्रवाई हर बार त्योहारों के वक्त ही की जाएगी, या फिर अधिकारी हर समय ऐसे खराब उत्पादों के खिलाफ कार्यवाही करेंगे?
क्या वाकई अब जागे हैं अधिकारी?
जैसे ही यह बड़ी कार्रवाई हुई, बाजार में तरह-तरह के सवाल उठने लगे। आखिरकार, खाद्य सुरक्षा विभाग ने तब क्यों कदम उठाए जब बाजार में त्योहारों का माहौल था? क्या विभाग सो रहा था जब लोग खराब खाध्य पदार्थों का सेवन कर रहे थे? क्या यह विभाग की सोची-समझी रणनीति थी, या फिर यह सिर्फ एक औपचारिकता थी?
कई बार त्योहारों के समय में खाने-पीने की चीजों का उल्लंघन बढ़ जाता है, और इस बार भी यही हुआ। बाजार में हर जगह खराब खोया, रसगुल्ला, मावा, दूषित मिठाइयां बिकने के बावजूद विभाग की कार्यवाही का ख्याल क्यों नहीं आया? अगर विभाग पहले जाग जाता, तो क्या अब हालात अलग होते?
कृपया ध्यान दें: जबतक यह कार्रवाई होती रही, तो ऐसे घटिया खाद्य पदार्थ बाजार में फैल रहे थे
विभाग ने इस अभियान में कुल 12 विधिक नमूने एकत्र किए हैं, जिन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। इन नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद दोषी विक्रेताओं और उत्पादकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह देखना होगा कि विभाग किस हद तक सख्ती से इस कार्रवाई को अंजाम देता है और कितने विक्रेता इसे भुगतते हैं।
क्या अधिकारी केवल त्योहारों तक ही सख्त रहते हैं?
यह प्रश्न अब तक अनुत्तरित है: क्या खाद्य सुरक्षा विभाग केवल त्योहारों के समय ही जागता है? क्या खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी इस कार्रवाई के बाद आराम से अपनी कुर्सी पर बैठ जाएंगे, जबकि कई खाद्य पदार्थ दिन-प्रतिदिन मानक के खिलाफ बिकते रहेंगे? क्या यह कार्रवाई सिर्फ एक “हाई प्रोफाइल” अभियान था, या फिर विभाग को अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए और सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है?
सवाल यह भी है कि इस कार्रवाई के बाद ऐसे खाद्य पदार्थों का मंथन कैसे होगा, जो पहले से बाजार में खुलेआम बिक रहे थे? क्या विभाग को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में इस तरह की मिलावट और गड़बड़ी न हो?
खाद्य सुरक्षा विभाग की यह कार्रवाई एक बड़ी चेतावनी है। अब देखना यह होगा कि विभाग इसका पालन किस हद तक सुनिश्चित करता है, और क्या यह किसी एक अभियान तक सीमित रहेगा या फिर एक व्यापक मुहिम बनेगा। समय बताएगा कि विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाने में कितना सफल होता है।

