Muzaffarnagar में 104 बीघा जमीन हड़पने की साजिश का खुलासा! फर्जी आधार-पैन से खुलवाया बैंक खाता, किसान बनकर जमीन बेचने निकले 3 शातिर गिरफ्तार
News-Desk
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104 बीघा जमीन, Muzaffarnagar Crime News, Muzaffarnagar News, ककरौली, जमीन फर्जीवाड़ा, फर्जी आधार कार्ड, फर्जी पैन कार्ड, फर्जी बैंक खाता, बिजनौर, भूमि धोखाधड़ी, मुजफ्फरनगर, रामराज, साइबर अपरा, साइबर क्राइमMuzaffarnagar पुलिस ने साइबर अपराध और दस्तावेजी फर्जीवाड़े से जुड़े एक बड़े मामले का खुलासा करने का दावा किया है। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने ऐसे कथित गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिन पर हरियाणा निवासी एक किसान के नाम और पहचान का दुरुपयोग कर उसकी 104 बीघा कृषि भूमि को धोखाधड़ी से बेचने की योजना बनाने का आरोप है।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने पहले जमीन के वास्तविक मालिक सुरेंद्र कुमार की पहचान संबंधी जानकारी का कथित तौर पर दुरुपयोग किया। इसके बाद फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड तैयार कराए गए। इतना ही नहीं, आरोपियों ने कथित रूप से सुरेंद्र कुमार के नाम पर पंजाब नेशनल बैंक की रामराज शाखा में एक बैंक खाता भी खुलवा लिया।
पुलिस का दावा है कि इस पूरे खेल में असली जमीन मालिक की जगह आरोपी आसिफ उर्फ बादशाह को सुरेंद्र कुमार के रूप में बैंक के सामने पेश किया गया और बैंक खाते में आवेदक की जगह उसकी तस्वीर का इस्तेमाल किया गया।
गिरोह की कथित योजना जमीन को बेचकर उससे मिलने वाली रकम को फर्जी बैंक खाते में जमा कराने और बाद में रकम हड़पने की थी। हालांकि जमीन की कथित बिक्री पूरी होने से पहले ही मामला पुलिस के संज्ञान में आ गया और जांच के बाद तीन आरोपियों की गिरफ्तारी की गई।
104 बीघा कृषि भूमि को निशाना बनाने की कथित साजिश
मुजफ्फरनगर साइबर क्राइम पुलिस के अनुसार, मामले में जिस संपत्ति को निशाना बनाया गया, वह हरियाणा निवासी सुरेंद्र कुमार के नाम बताई गई है।
सुरेंद्र कुमार की मुजफ्फरनगर के रामराज थाना क्षेत्र में करीब 104 बीघा कृषि भूमि होने की जानकारी सामने आई है।
इतनी बड़ी कृषि भूमि को कथित तौर पर धोखाधड़ी के जरिए बेचने की योजना ने मामले की गंभीरता बढ़ा दी है। जमीन के दस्तावेजों और मालिक की पहचान का इस्तेमाल करके किसी अन्य व्यक्ति को वास्तविक मालिक के रूप में पेश करने की कोशिश की गई।
यदि ऐसी साजिश सफल हो जाती तो जमीन के वास्तविक मालिक को भारी आर्थिक और कानूनी नुकसान उठाना पड़ सकता था।
पहले पहचान चुराने की कोशिश, फिर जमीन बेचने का प्लान
पुलिस की जांच के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर सीधे जमीन बेचने के बजाय पहले पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार करने का रास्ता अपनाया।
पीड़ित किसान के नाम और पते का कथित दुरुपयोग करके फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड तैयार कराए गए।
इन दस्तावेजों के जरिए बैंकिंग व्यवस्था में भी प्रवेश करने की कोशिश की गई। पुलिस के मुताबिक, सुरेंद्र कुमार के नाम से बैंक खाता खुलवाना इसी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा था।
इससे कथित तौर पर जमीन बेचने के बाद प्राप्त धन को किसी अन्य खाते में जाने के बजाय आरोपियों द्वारा नियंत्रित बैंक खाते में पहुंचाने की तैयारी थी।
फर्जी आधार और पैन कार्ड से खुलवाया बैंक खाता
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने पंजाब नेशनल बैंक की रामराज शाखा में सुरेंद्र कुमार के नाम से फर्जी बैंक खाता खुलवाया।
मामले में सबसे गंभीर पहलू यह बताया गया है कि खाते के लिए इस्तेमाल की गई पहचान वास्तविक जमीन मालिक की थी, लेकिन उसके स्थान पर आरोपी को वास्तविक व्यक्ति के तौर पर प्रस्तुत किया गया।
बैंक खाते में आवेदक की जगह आरोपी आसिफ उर्फ बादशाह की फोटो लगाई गई थी।
पुलिस का आरोप है कि इस तरीके से बैंक रिकॉर्ड में भी एक ऐसी पहचान बनाने की कोशिश की गई, जिसका संबंध वास्तविक जमीन मालिक से नहीं था।
आसिफ को बनाया गया कथित ‘फर्जी सुरेंद्र कुमार’
पुलिस के मुताबिक, इस कथित फर्जीवाड़े में आसिफ उर्फ बादशाह की भूमिका अहम थी।
आरोप है कि उसे ही सुरेंद्र कुमार के रूप में बैंक के समक्ष पेश किया गया।
यानी योजना में केवल कागजी दस्तावेजों का इस्तेमाल ही नहीं किया गया, बल्कि कथित तौर पर एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति की पहचान में प्रस्तुत करने का प्रयास भी किया गया।
यह कदम कथित जमीन सौदे की प्रक्रिया को वास्तविक दिखाने की कोशिश का हिस्सा बताया जा रहा है।
जमीन की रकम फर्जी खाते में पहुंचाने की तैयारी
पुलिस की जांच के अनुसार, आरोपियों का कथित उद्देश्य 104 बीघा जमीन को बेचकर मिलने वाली रकम को उस फर्जी बैंक खाते में जमा कराना था।
यदि जमीन की बिक्री और भुगतान की प्रक्रिया पूरी हो जाती तो रकम वास्तविक जमीन मालिक के बजाय आरोपियों द्वारा तैयार किए गए बैंक खाते में पहुंच सकती थी।
इसके बाद रकम को हड़पने की कथित योजना थी।
पुलिस ने समय रहते शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू की और इसी वजह से कथित साजिश को आगे बढ़ने से रोक दिया गया।
पीड़ित को जानकारी मिली तो SSP से की शिकायत
मामले की जानकारी होने के बाद हरियाणा निवासी सुरेंद्र कुमार ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मुजफ्फरनगर के समक्ष शिकायत की।
शिकायत में जमीन और उनकी पहचान से जुड़े कथित फर्जीवाड़े की जानकारी दी गई।
इसके बाद मामले की जांच साइबर क्राइम थाने को सौंपी गई।
साइबर क्राइम पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए दस्तावेजों, बैंक खाते और आरोपियों की गतिविधियों से संबंधित तथ्यों की जांच शुरू की।
साइबर क्राइम पुलिस ने शुरू की गहन जांच
जांच के दौरान पुलिस ने कथित फर्जी दस्तावेजों और बैंक खाते से संबंधित जानकारी जुटाई।
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह था कि वास्तविक जमीन मालिक और बैंक रिकॉर्ड में प्रस्तुत व्यक्ति के बीच अंतर कैसे बनाया गया।
पुलिस ने कथित रूप से इस पूरी प्रक्रिया में शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल की और अंततः तीन संदिग्धों तक पहुंची।
इसके बाद पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया।
तीन आरोपी गिरफ्तार, अलग-अलग जिलों से जुड़े हैं तार
मुजफ्फरनगर पुलिस के अनुसार, मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार बताई गई है:
अंकुर पुत्र राजपाल — निवासी ग्राम जड़वड़, थाना ककरौली, जनपद मुजफ्फरनगर।
रोबिन पुत्र नेतराम — निवासी ग्राम हंसावाला, थाना रामराज, जनपद मुजफ्फरनगर।
आसिफ उर्फ बादशाह पुत्र आबिद — निवासी शाऊद खेड़ी, थाना हल्दौर, जनपद बिजनौर।
पुलिस के अनुसार, तीनों की भूमिका मामले की कथित साजिश में सामने आई है।
मुजफ्फरनगर से बिजनौर तक जुड़े कथित तार
इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों के पते से पता चलता है कि जांच का दायरा एक ही इलाके तक सीमित नहीं रहा।
दो आरोपी मुजफ्फरनगर जनपद के अलग-अलग थाना क्षेत्रों के रहने वाले बताए गए हैं, जबकि तीसरा आरोपी बिजनौर जिले के हल्दौर क्षेत्र से संबंधित है।
इससे पुलिस के सामने मामले में कथित रूप से शामिल लोगों के आपसी संपर्क और भूमिका की जांच का दायरा भी बढ़ गया।
हालांकि आरोपियों की वास्तविक भूमिका और उनके बीच संबंधों की पूरी जानकारी पुलिस की आगे की जांच से स्पष्ट होगी।
दो मोबाइल फोन भी बरामद
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन बरामद करने की जानकारी दी है।
साइबर अपराध की जांच में मोबाइल फोन महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकते हैं। इनमें कॉल रिकॉर्ड, संपर्क, संदेश, दस्तावेजों से जुड़ी डिजिटल सामग्री और अन्य जानकारी जांच एजेंसी को कथित घटनाक्रम समझने में मदद कर सकती है।
हालांकि बरामद मोबाइल फोन से पुलिस को क्या-क्या जानकारी मिली है, इसकी विस्तृत जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।
फर्जीवाड़े में बैंकिंग सिस्टम को भी निशाना बनाने का आरोप
इस मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि कथित साजिश केवल जमीन के कागजात तक सीमित नहीं रही।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर बैंकिंग व्यवस्था में भी फर्जी पहचान के जरिए प्रवेश करने की कोशिश की।
जमीन मालिक के नाम पर बैंक खाता खुलवाने का उद्देश्य कथित तौर पर जमीन की बिक्री से प्राप्त धनराशि को उस खाते में पहुंचाना था।
इस तरह जमीन, पहचान दस्तावेज और बैंकिंग व्यवस्था—तीनों को कथित रूप से एक ही साजिश में जोड़े जाने का आरोप है।
जमीन मालिक के लिए बड़ा खतरा बन सकता था फर्जीवाड़ा
किसी व्यक्ति की जमीन उसके नाम से जुड़े वैध दस्तावेजों और पहचान के आधार पर सुरक्षित मानी जाती है। लेकिन यदि किसी व्यक्ति के नाम और पहचान का दुरुपयोग करके फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाएं तो उसके लिए गंभीर परेशानी पैदा हो सकती है।
इस मामले में 104 बीघा जमीन होने के कारण संभावित आर्थिक नुकसान बहुत बड़ा हो सकता था।
जमीन की कीमत, स्थान और बाजार मूल्य के आधार पर ऐसी संपत्ति का सौदा बेहद बड़ी रकम में हो सकता है।
इसलिए पुलिस द्वारा कथित साजिश का समय रहते खुलासा किया जाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जमीन के नाम पर होने वाले फर्जीवाड़े में पहचान सबसे बड़ा हथियार
जमीन संबंधी धोखाधड़ी के मामलों में अपराधी अक्सर जमीन मालिक की पहचान और दस्तावेजों को निशाना बनाने की कोशिश करते हैं।
फर्जी पहचान पत्र, पावर ऑफ अटॉर्नी, बैंक खाते या अन्य कागजात का दुरुपयोग करके असली मालिक की जगह किसी दूसरे व्यक्ति को पेश करने की कोशिश की जा सकती है।
ऐसे मामलों में जमीन मालिक को लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है।
इसी वजह से संपत्ति मालिकों के लिए अपने जमीन संबंधी रिकॉर्ड और पहचान दस्तावेजों की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है।
बैंक खाते की भूमिका ने बढ़ाई मामले की गंभीरता
सिर्फ फर्जी दस्तावेज तैयार करने और जमीन बेचने की कोशिश से आगे बढ़कर बैंक खाते का कथित इस्तेमाल इस मामले का महत्वपूर्ण पहलू है।
पुलिस के अनुसार, फर्जी खाते का उद्देश्य जमीन की बिक्री से आने वाले पैसे को हासिल करना था।
यदि भुगतान फर्जी खाते में चला जाता तो रकम को वापस हासिल करना वास्तविक जमीन मालिक के लिए मुश्किल हो सकता था।
इस तरह बैंक खाते को कथित साजिश में वित्तीय लेनदेन की अंतिम कड़ी के तौर पर इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई थी।
साइबर अपराध अब सिर्फ मोबाइल और इंटरनेट तक सीमित नहीं
आमतौर पर साइबर अपराध सुनते ही ऑनलाइन ठगी, OTP, बैंक फ्रॉड या सोशल मीडिया से जुड़े मामले सामने आते हैं।
लेकिन पहचान और डिजिटल दस्तावेजों का दुरुपयोग करके जमीन और संपत्ति संबंधी धोखाधड़ी भी आधुनिक अपराध का गंभीर रूप बनती जा रही है।
मुजफ्फरनगर का यह मामला इसी व्यापक चुनौती की ओर संकेत करता है, जहां कथित तौर पर पहचान दस्तावेजों और बैंकिंग व्यवस्था को जमीन के फर्जी सौदे से जोड़ा गया।
ऐसे मामलों की जांच में पारंपरिक पुलिसिंग के साथ डिजिटल और वित्तीय जांच भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेकर की कार्रवाई
पीड़ित की शिकायत के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा मामले को साइबर क्राइम थाने की जांच के लिए सौंपा गया।
इसके बाद साइबर क्राइम पुलिस टीम ने जांच शुरू की और आरोपियों की पहचान की।
पुलिस की कार्रवाई के बाद तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश शासन और पुलिस महानिदेशक की ओर से चलाए जा रहे साइबर अपराध रोकथाम अभियान के तहत की गई कार्रवाई के रूप में बताई गई है।
किसान की जमीन पर कथित कब्जे की कोशिश नाकाम
पुलिस की कार्रवाई से कथित तौर पर जमीन की धोखाधड़ी वाली बिक्री की योजना को आगे बढ़ने से पहले ही रोक दिया गया।
यदि आरोपियों की योजना सफल हो जाती तो जमीन मालिक को अपनी संपत्ति बचाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ सकती थी।
जमीन के दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड में कथित फर्जी पहचान तैयार किए जाने के कारण मामला और पेचीदा हो सकता था।
इसलिए पुलिस के अनुसार समय रहते की गई शिकायत और जांच इस मामले में अहम रही।
मामले में दर्ज हुआ मुकदमा
पुलिस के अनुसार, थाना साइबर क्राइम मुजफ्फरनगर में इस मामले में मु0अ0सं0 31/2026 दर्ज किया गया है।
मामले में धारा 318(4), 336(3), 338, 340(2) और 3(5) बीएनएस के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया है।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
मामले की जांच के दौरान यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि कथित फर्जी दस्तावेज किस तरह तैयार हुए, बैंक खाता खुलवाने की प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही और जमीन बेचने की योजना किस स्तर तक आगे बढ़ चुकी थी।
अब जांच में सामने आ सकती हैं और भी कड़ियां
तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने अगला सवाल यह होगा कि क्या इस कथित फर्जीवाड़े में और लोग भी शामिल थे।
फर्जी आधार और पैन कार्ड तैयार कराने के लिए किन माध्यमों का इस्तेमाल किया गया, बैंक खाते के दस्तावेज कैसे जमा किए गए और जमीन से संबंधित कागजातों की जानकारी आरोपियों तक कैसे पहुंची—ये सभी सवाल जांच के महत्वपूर्ण हिस्से हो सकते हैं।
यदि पुलिस को डिजिटल या दस्तावेजी साक्ष्य मिलते हैं तो मामले का दायरा आगे बढ़ सकता है।
मोबाइल फोन की जांच से खुल सकते हैं संपर्कों के राज
दो मोबाइल फोन की बरामदगी को देखते हुए उनकी जांच भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
पुलिस डिजिटल साक्ष्यों के माध्यम से आरोपियों के बीच संपर्क, संभावित बातचीत और कथित जमीन सौदे से संबंधित गतिविधियों की जानकारी जुटा सकती है।
हालांकि बरामद मोबाइल से क्या जानकारी मिली है, इसका खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट रूप से किया जा सकेगा।
104 बीघा जमीन का रिकॉर्ड भी जांच का अहम हिस्सा
इतनी बड़ी कृषि भूमि से जुड़ा मामला होने के कारण जमीन के राजस्व रिकॉर्ड, मालिकाना हक, खसरा-खतौनी और अन्य संबंधित दस्तावेज भी जांच के दायरे में हो सकते हैं।
जांच एजेंसी के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि कथित आरोपियों ने जमीन से संबंधित कौन-कौन से दस्तावेज हासिल किए थे और उनके आधार पर किस प्रकार की कार्रवाई करने की कोशिश की गई।
यदि कोई फर्जी दस्तावेज तैयार हुआ है तो उसकी पहचान भी कानूनी कार्रवाई में महत्वपूर्ण होगी।
जमीन मालिकों के लिए भी जरूरी है सतर्कता
इस घटना से संपत्ति मालिकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश निकलता है। अपनी जमीन से जुड़े दस्तावेजों की नियमित निगरानी करना जरूरी है।
यदि जमीन लंबे समय से उपयोग में नहीं है या मालिक किसी दूसरे शहर या राज्य में रहता है, तो उसे अपने नाम दर्ज संपत्ति के रिकॉर्ड पर नजर रखनी चाहिए।
बैंक, आधार, पैन और अन्य पहचान दस्तावेजों की जानकारी भी अनजान लोगों के साथ साझा करने से बचना चाहिए।
किसी दस्तावेज की कॉपी देने की स्थिति में उसका उद्देश्य और उपयोग स्पष्ट होना चाहिए।
फर्जी बैंक खाते की जानकारी मिलते ही सतर्कता जरूरी
किसी व्यक्ति को अपने नाम पर अनजान बैंक खाता खुलने की जानकारी मिले तो उसे तत्काल संबंधित बैंक से संपर्क करना चाहिए।
ऐसी स्थिति में खाते के संबंध में स्पष्टीकरण मांगना और आवश्यक शिकायत दर्ज कराना महत्वपूर्ण हो सकता है।
किसी व्यक्ति की पहचान का दुरुपयोग केवल बैंकिंग समस्या नहीं बनता, बल्कि आगे चलकर वित्तीय और कानूनी परेशानियां भी पैदा कर सकता है।
कागजों की सुरक्षा से लेकर डिजिटल सतर्कता तक जरूरी
आज संपत्ति संबंधी दस्तावेज केवल कागजों में नहीं रहते। उनके डिजिटल रिकॉर्ड, स्कैन कॉपी और ऑनलाइन प्रक्रियाएं भी महत्वपूर्ण हो गई हैं।
ऐसे में जमीन मालिकों को अपने दस्तावेजों की जानकारी सुरक्षित रखनी चाहिए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने पर तत्काल संबंधित विभाग या पुलिस को सूचित करना चाहिए।
मुजफ्फरनगर के इस मामले में भी शिकायत समय पर किए जाने से कथित साजिश का खुलासा हो सका।
साइबर क्राइम पुलिस की कार्रवाई के पीछे टीम की भूमिका
इस मामले में कार्रवाई करने वाली टीम में थाना साइबर क्राइम के प्रभारी निरीक्षक कर्मवीर सिंह, उप-निरीक्षक जय शर्मा, हेड कांस्टेबल बालकिशन सिंह, सोहनवीर सिंह और कांस्टेबल राहुल कुमार शामिल रहे।
पुलिस के अनुसार, टीम ने मामले की जांच करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से दो मोबाइल फोन बरामद किए।
जांच में आगे भी डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों को खंगाला जा सकता है।
फर्जीवाड़े के पीछे कथित संगठित योजना
पुलिस ने इस मामले को एक गिरोह की कथित संगठित गतिविधि के तौर पर बताया है।
आरोप है कि तीनों ने अलग-अलग स्तर पर पहचान, बैंक खाता और जमीन की बिक्री से जुड़े कदमों को जोड़कर योजना बनाई थी।
ऐसी कथित योजना में हर व्यक्ति की भूमिका अलग हो सकती है—कोई दस्तावेज तैयार कराने, कोई बैंकिंग प्रक्रिया में पहचान बनने और कोई जमीन सौदे की प्रक्रिया में शामिल हो सकता है।
आरोपियों की वास्तविक भूमिका जांच और न्यायिक प्रक्रिया में स्पष्ट होगी।
अभी आरोपों पर अदालत की अंतिम मुहर बाकी
पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
लेकिन किसी भी आपराधिक मामले में गिरफ्तारी को अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जाता। आरोपियों के खिलाफ पुलिस द्वारा जुटाए गए साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत किए जाएंगे और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही यह तय होगा कि आरोप कानूनी रूप से सिद्ध होते हैं या नहीं।
इसलिए फिलहाल तीनों को पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपी के रूप में देखना उचित है।
मुजफ्फरनगर में साइबर अपराध के बदलते चेहरे की बड़ी तस्वीर
यह मामला यह भी दिखाता है कि साइबर और दस्तावेजी अपराध का स्वरूप लगातार बदल रहा है।
अब धोखाधड़ी केवल किसी के बैंक खाते से पैसे निकालने तक सीमित नहीं है। पहचान दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग प्रणाली और संपत्ति के रिकॉर्ड को जोड़कर भी कथित अपराध किए जा सकते हैं।
ऐसे अपराधों से निपटने के लिए पुलिस जांच में डिजिटल फोरेंसिक, बैंकिंग जानकारी और पारंपरिक दस्तावेजी जांच का संयोजन आवश्यक हो जाता है।
जमीन बची, लेकिन जांच अभी जारी
फिलहाल पुलिस की कार्रवाई के बाद 104 बीघा कृषि भूमि को कथित धोखाधड़ी के जरिए बेचने की योजना के आगे बढ़ने पर रोक लग गई है।
तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया चल रही है।
अब जांच में यह सामने आना बाकी है कि कथित फर्जी दस्तावेज कहां तैयार हुए, बैंक खाता खुलवाने की प्रक्रिया में कौन-कौन शामिल था और जमीन की बिक्री को लेकर आरोपियों ने कितनी तैयारी कर ली थी।
मुजफ्फरनगर साइबर क्राइम पुलिस की यह कार्रवाई जमीन, पहचान और बैंकिंग व्यवस्था को जोड़कर किए जाने वाले कथित फर्जीवाड़े के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कार्रवाई के रूप में सामने आई है।

