भारतीय योग संस्थान के तत्वावधान में गोष्ठी का आयोजन किया
महर्षि पतंजलि ने समाधि पाद के दूसरे सूत्र में योग को परिभाषित करते हुए लिखा है कि चित्त की वृत्तियों का निरोध करना ही योग है।योग से जीवन में आरोग्यता के साथ साथ अनुशासन,प्रेम,परोपकार सदाचार,निर्भयता,दया,करूणा ,सहनशीलता आदि मानवीय गुणों का विकास होता है।
Read more...