Muzaffarnagar में इस बार ऐतिहासिक होगी रामलीला, नई मंडी रामलीला कमेटी मनाएगी 100वां महोत्सव; 30 सितंबर से श्रीराम कथा, 8 अक्टूबर से भव्य रामलीला
मुजफ्फरनगर। Muzaffarnagar Ramlila 2026 इस बार शहर के धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में खास आकर्षण का केंद्र बनने जा रही है। श्री रामलीला कमेटी नई मंडी मुजफ्फरनगर इस वर्ष रामलीला के 100वें महोत्सव का आयोजन करने जा रही है। शताब्दी समारोह को यादगार बनाने के लिए कमेटी की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा भी सामने रख दी गई है।
रामलीला कमेटी नई मंडी के अध्यक्ष संजय मित्तल ने रामलीला भवन में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान इस वर्ष के आयोजन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 100वें रामलीला महोत्सव को विशेष और भव्य स्वरूप देने के लिए धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ पारंपरिक रामलीला मंचन और विजयदशमी से जुड़े प्रमुख आयोजनों की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
रामलीला मंचन से पहले 30 सितंबर से 6 अक्टूबर तक संगीतमय श्रीराम कथा का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद 8 अक्टूबर से रामलीला मंचन शुरू होगा। 20 अक्टूबर को विजयदशमी का पर्व रामलीला भवन में मनाया जाएगा और इसी दिन शाम को भगवान श्रीराम की विजय यात्रा भी निकाली जाएगी। अगले दिन यानी 21 अक्टूबर को भगवान श्रीराम का राजतिलक होगा।
यानी नई मंडी की रामलीला इस बार सिर्फ मंचन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कई दिनों तक चलने वाले धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए शहर में उत्सव का वातावरण तैयार करेगी।
100वां रामलीला महोत्सव बनेगा इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत
श्री रामलीला कमेटी नई मंडी के लिए इस वर्ष का आयोजन इसलिए भी विशेष है क्योंकि यह रामलीला का 100वां महोत्सव है।
एक शताब्दी तक किसी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का लगातार चलना अपने आप में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा सकती है। समय के साथ शहर बदला, पीढ़ियां बदलीं और मनोरंजन के साधन भी तेजी से बदले, लेकिन रामलीला जैसी परंपराएं आज भी लोगों को अपनी जड़ों और धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत से जोड़ती हैं।
कमेटी अध्यक्ष संजय मित्तल ने प्रेसवार्ता में कहा कि 100वां महोत्सव अपने आप में अनूठा होगा। आयोजन को लेकर कमेटी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता लगातार तैयारियों में जुटे रहे हैं।
नई मंडी क्षेत्र में रहने वाले लोगों के साथ-साथ शहर के अन्य हिस्सों से भी श्रद्धालुओं के कार्यक्रमों में पहुंचने की उम्मीद है।
30 सितंबर से शुरू होगी संगीतमय श्रीराम कथा
Muzaffarnagar Ramlila 2026 के मुख्य मंचन से पहले धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत 30 सितंबर से होगी।
30 सितंबर से 6 अक्टूबर तक प्रतिदिन संगीतमय श्रीराम कथा का आयोजन किया जाएगा। कथा का आयोजन रामलीला मंचन से पहले श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक वातावरण तैयार करेगा।
हरिद्वार से पधारे महामंडलेश्वर श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के पूज्य स्वामी डॉ. उमाकान्तानन्द सरस्वती महाराज श्रद्धालुओं को श्रीराम कथा का श्रवण कराएंगे।
कथा प्रतिदिन शाम 3 बजे से 6 बजे तक आयोजित होगी।
सात दिनों तक चलने वाली इस कथा में श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के जीवन, उनके आदर्शों, संघर्षों और मर्यादा से जुड़े प्रसंगों को सुनने का अवसर मिलेगा।
कलश यात्रा से होगी श्रीराम कथा की शुरुआत
श्रीराम कथा के शुभारंभ के अवसर पर 30 सितंबर को सुबह 9 बजे कलश यात्रा निकाली जाएगी।
आयोजकों के अनुसार, कलश यात्रा निर्धारित मार्ग से होते हुए रामलीला भवन पहुंचकर संपन्न होगी। धार्मिक आयोजनों में कलश यात्रा का विशेष महत्व माना जाता है और इसे किसी आयोजन की शुभ शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
नई मंडी में कलश यात्रा के आयोजन के साथ ही 100वें रामलीला महोत्सव की धार्मिक गतिविधियों का औपचारिक वातावरण तैयार होगा।
आयोजकों की ओर से श्रद्धालुओं से इसमें अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की गई है।
कथा के सात दिन बाद शुरू होगा रामलीला मंचन
श्रीराम कथा का आयोजन 6 अक्टूबर तक चलेगा। इसके बाद 8 अक्टूबर को रामलीला मंचन का शुभारंभ किया जाएगा।
इस वर्ष रामलीला मंचन को भी विशेष रूप देने की तैयारी की गई है। आयोजकों ने बताया कि भगवान श्रीराम की लीलाओं का मंचन श्री श्यामाश्याम ब्रज लीला संस्थान, मथुरा के कलाकारों द्वारा किया जाएगा।
मंचन का निर्देशन नंदकिशोर जी महाराज के निर्देशन में किया जाएगा।
मथुरा की ब्रज परंपरा से जुड़े कलाकारों की प्रस्तुति रामलीला के मंचन को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष स्वरूप दे सकती है।
रामलीला मंच पर जीवंत होंगी भगवान श्रीराम की लीलाएं
रामलीला का उद्देश्य केवल धार्मिक कथा का मंचन करना नहीं है। मंच पर भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से मर्यादा, कर्तव्य, त्याग, सत्य और धर्म जैसे मूल्यों को भी प्रस्तुत किया जाता है।
रामायण के प्रसंगों को मंच पर जीवंत देखने के लिए हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग रामलीला मैदान और भवनों तक पहुंचते हैं।
नई मंडी में इस बार 100वें महोत्सव के कारण लोगों में विशेष उत्सुकता रहने की संभावना है। पुराने दर्शकों के लिए यह आयोजन अपनी पुरानी यादों से जुड़ने का अवसर होगा, जबकि नई पीढ़ी को रामलीला की परंपरा और उसके सांस्कृतिक महत्व को करीब से देखने का मौका मिलेगा।
20 अक्टूबर को मनाया जाएगा विजयदशमी पर्व
रामलीला कार्यक्रमों का सबसे प्रमुख पड़ाव 20 अक्टूबर को आएगा। इस दिन रामलीला भवन में विजयदशमी पर्व मनाया जाएगा।
विजयदशमी को भगवान श्रीराम की रावण पर विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। रामलीला परंपरा में यह सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक होता है।
नई मंडी रामलीला कमेटी की ओर से इस दिन विशेष आयोजन की तैयारी की गई है।
विजयदशमी के धार्मिक महत्व के साथ-साथ इसे सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी विशेष दिन माना जाता है।
शाम साढ़े सात बजे निकलेगी भगवान श्रीराम की विजय यात्रा
विजयदशमी के अवसर पर धार्मिक कार्यक्रम के बाद शाम 7:30 बजे भगवान श्रीराम की विजय यात्रा निकाली जाएगी।
यह यात्रा रामलीला महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण होगी। भगवान श्रीराम की विजय यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।
आयोजकों के अनुसार, विजय यात्रा के बाद भरत मिलाप का आयोजन भी किया जाएगा।
पीठ बाजार में होगा भरत मिलाप का आयोजन
भगवान श्रीराम की विजय यात्रा के बाद भरत मिलाप का आयोजन पत्रकार अरविंद भारद्वाज के घर के सामने, पीठ बाजार में किया जाएगा।
रामायण की कथा में भरत मिलाप एक भावनात्मक और महत्वपूर्ण प्रसंग है। भगवान श्रीराम के वनवास से वापस लौटने के बाद भरत और राम का मिलन भाईचारे, त्याग और पारिवारिक प्रेम का प्रतीक माना जाता है।
रामलीला मंचन में इस प्रसंग को देखने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहता है।
नई मंडी के इस आयोजन में भी भरत मिलाप को परंपरागत तरीके से प्रस्तुत किए जाने की तैयारी है।
21 अक्टूबर को होगा भगवान श्रीराम का राजतिलक
रामलीला कार्यक्रमों का अगला महत्वपूर्ण चरण 21 अक्टूबर को होगा। इस दिन भगवान श्रीराम का राजतिलक किया जाएगा।
रामलीला में राजतिलक का प्रसंग भगवान श्रीराम के वनवास की समाप्ति और अयोध्या लौटने के बाद उनके राज्यारोहण का प्रतीक है।
100वें महोत्सव के दौरान इस कार्यक्रम को भी विशेष रूप से आयोजित करने की तैयारी है।
श्रद्धालुओं के लिए यह कार्यक्रम रामलीला के धार्मिक और सांस्कृतिक क्रम का महत्वपूर्ण समापन चरण होगा।
राजतिलक के बाद महाराजा अग्रसेन की जीवन लीला का मंचन
21 अक्टूबर के कार्यक्रम में एक और विशेष आकर्षण जोड़ा गया है।
भगवान श्रीराम के राजतिलक के बाद करीब दो घंटे तक महाराजा अग्रसेन की जीवन लीला का सुंदर मंचन किया जाएगा।
इस प्रस्तुति के माध्यम से महाराजा अग्रसेन के जीवन और उनके सामाजिक आदर्शों को मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा।
रामलीला के समापन कार्यक्रम के साथ महाराजा अग्रसेन की जीवन लीला का मंचन आयोजन को एक अतिरिक्त सांस्कृतिक आयाम देगा।
नई मंडी में कई दिनों तक बना रहेगा धार्मिक माहौल
30 सितंबर से शुरू होने वाली श्रीराम कथा से लेकर 21 अक्टूबर के राजतिलक और महाराजा अग्रसेन की जीवन लीला तक नई मंडी क्षेत्र में कई दिनों तक धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का माहौल बना रहेगा।
श्रीराम कथा, कलश यात्रा, रामलीला मंचन, विजयदशमी, विजय यात्रा, भरत मिलाप और राजतिलक जैसे कार्यक्रमों को एक क्रम में आयोजित किए जाने से इस वर्ष का महोत्सव सामान्य रामलीला आयोजनों की तुलना में अधिक विस्तृत नजर आ रहा है।
100वें महोत्सव के कारण आयोजकों के लिए यह आयोजन भावनात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण है।
एक सदी की परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ने की तैयारी
रामलीला की परंपरा को लंबे समय तक जारी रखने के लिए नई पीढ़ी की भागीदारी महत्वपूर्ण है।
आज के समय में बच्चों और युवाओं के पास मनोरंजन के अनेक आधुनिक साधन उपलब्ध हैं। इसके बावजूद धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में उनकी भागीदारी परंपराओं को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है।
100वें रामलीला महोत्सव के दौरान नई पीढ़ी को रामायण के प्रसंगों से जोड़ना भी आयोजन का एक महत्वपूर्ण पक्ष रहेगा।
रामलीला के मंच पर दिखाई जाने वाली कथाएं बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति और पारंपरिक लोकनाट्य शैली से परिचित कराने का माध्यम भी बनती हैं।
प्रेसवार्ता में कमेटी पदाधिकारियों ने दी कार्यक्रमों की जानकारी
रामलीला भवन में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान कमेटी अध्यक्ष संजय मित्तल ने पत्रकारों को पूरे आयोजन की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि 100वें महोत्सव के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और कार्यक्रमों को व्यवस्थित तरीके से आयोजित करने की तैयारी की गई है।
प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने श्रीराम कथा से लेकर रामलीला मंचन, विजयदशमी, विजय यात्रा, भरत मिलाप और राजतिलक तक की पूरी रूपरेखा साझा की।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष का आयोजन समिति के लिए विशेष महत्व रखता है और इसे यादगार बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर तैयारी की गई है।
प्रेसवार्ता में ये प्रमुख लोग रहे मौजूद
प्रेसवार्ता के दौरान समाजसेवी भीमसैन कंसल, मंत्री अशोक गर्ग, कोषाध्यक्ष आदित्य भरतिया, संरक्षक ब्रजगोपाल छारिया, अनिल गोयल, विवेक गर्ग, अचिन सागर गर्ग सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
कमेटी से जुड़े पदाधिकारियों ने आयोजन की तैयारियों और विभिन्न कार्यक्रमों को लेकर जानकारी साझा की।
रामलीला सिर्फ मंचन नहीं, शहर की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा
मुजफ्फरनगर में रामलीला का आयोजन लंबे समय से धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का हिस्सा रहा है। रामलीला के दौरान परिवार के लोग एक साथ कार्यक्रम देखने पहुंचते हैं और कई पीढ़ियां एक ही मंच पर रामायण के प्रसंगों को देखती हैं।
ऐसे आयोजनों में धार्मिक भावना के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति, सामाजिक मेलजोल और सामुदायिक भागीदारी भी दिखाई देती है।
100वें महोत्सव का आयोजन इस परंपरा को और विशेष बना रहा है।
बच्चों और परिवारों के लिए भी खास होगा आयोजन
रामलीला और रामकथा जैसे कार्यक्रमों में परिवारों की भागीदारी विशेष रूप से देखने को मिलती है। बच्चे मंच पर दिखाई जाने वाली रामायण की कथाओं और पात्रों को लेकर उत्साहित रहते हैं।
वहीं बुजुर्गों के लिए ऐसे आयोजन पुरानी यादों और परंपराओं से जुड़े होते हैं।
इस तरह एक ही कार्यक्रम में परिवार की अलग-अलग पीढ़ियां शामिल होती हैं और सांस्कृतिक परंपरा एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचती है।
मथुरा के कलाकारों की प्रस्तुति पर रहेगी खास नजर
इस वर्ष रामलीला मंचन में श्री श्यामाश्याम ब्रज लीला संस्थान मथुरा की प्रस्तुति विशेष आकर्षण रहेगी।
ब्रज क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का अपना विशिष्ट स्वरूप है। मथुरा से आने वाली टीम द्वारा भगवान श्रीराम की लीलाओं का मंचन किए जाने से दर्शकों को अलग प्रस्तुति देखने का अवसर मिलेगा।
नंदकिशोर जी महाराज के निर्देशन में होने वाले मंचन को लेकर आयोजन समिति को उम्मीद है कि श्रद्धालुओं को रामलीला के प्रसंगों का प्रभावी और आकर्षक मंचीय अनुभव मिलेगा।
श्रीराम कथा के दौरान श्रद्धालुओं को मिलेगा आध्यात्मिक माहौल
30 सितंबर से 6 अक्टूबर तक चलने वाली संगीतमय श्रीराम कथा में श्रद्धालु प्रतिदिन तीन घंटे कथा का श्रवण कर सकेंगे।
शाम 3 बजे से 6 बजे तक आयोजित होने वाली कथा में भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों के साथ उनके आदर्शों और मर्यादा की चर्चा भी होने की संभावना है।
कथा से पहले निकलने वाली कलश यात्रा आयोजन की धार्मिक शुरुआत को विशेष स्वरूप देगी।
100वां महोत्सव होने के कारण बढ़ी तैयारियों की जिम्मेदारी
किसी भी बड़े आयोजन में भीड़ प्रबंधन, मंच व्यवस्था, कार्यक्रमों का समयबद्ध संचालन और श्रद्धालुओं की सुविधा महत्वपूर्ण होती है।
100वें महोत्सव के कारण आयोजकों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी भी होगी। कई दिनों तक चलने वाले कार्यक्रमों के कारण आयोजन समिति को अलग-अलग कार्यक्रमों के लिए अलग व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी होंगी।
आयोजकों ने बताया है कि तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
मुजफ्फरनगर में त्योहारों के मौसम के साथ बढ़ेगी रौनक
सितंबर के अंतिम दिनों से अक्टूबर तक धार्मिक त्योहारों और आयोजनों का मौसम रहता है। ऐसे में नई मंडी की रामलीला शहर की सांस्कृतिक गतिविधियों में विशेष स्थान रखेगी।
30 सितंबर से श्रीराम कथा की शुरुआत और इसके बाद रामलीला मंचन से शहर में धार्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला तेज होगा।
20 अक्टूबर की विजयदशमी और 21 अक्टूबर के राजतिलक के साथ आयोजन का अंतिम चरण पूरा होगा।
श्रीराम कथा से राजतिलक तक पूरा कार्यक्रम एक नजर में
30 सितंबर: सुबह 9 बजे कलश यात्रा, इसके बाद शाम 3 से 6 बजे तक संगीतमय श्रीराम कथा।
30 सितंबर से 6 अक्टूबर: प्रतिदिन शाम 3 बजे से 6 बजे तक श्रीराम कथा।
8 अक्टूबर: भगवान श्रीराम की लीलाओं का रामलीला मंचन शुरू होगा।
20 अक्टूबर: रामलीला भवन में विजयदशमी पर्व का आयोजन।
20 अक्टूबर, शाम 7:30 बजे: भगवान श्रीराम की विजय यात्रा।
20 अक्टूबर: पीठ बाजार में पत्रकार अरविंद भारद्वाज के घर के सामने भरत मिलाप।
21 अक्टूबर: भगवान श्रीराम का राजतिलक।
21 अक्टूबर: राजतिलक के बाद लगभग दो घंटे तक महाराजा अग्रसेन की जीवन लीला का मंचन।
मुजफ्फरनगर की रामलीला के लिए खास बनने जा रहा अक्टूबर
Muzaffarnagar Ramlila 2026 के कार्यक्रमों की घोषणा के साथ ही शहर में रामलीला को लेकर उत्सुकता बढ़ने लगी है। इस वर्ष 100वें महोत्सव के कारण आयोजन का महत्व और बढ़ गया है।
एक तरफ श्रीराम कथा के जरिए श्रद्धालुओं को धार्मिक वातावरण मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ रामलीला मंचन के माध्यम से रामायण के प्रसंगों को मंच पर जीवंत किया जाएगा।
विजयदशमी, भगवान श्रीराम की विजय यात्रा, भरत मिलाप और राजतिलक आयोजन के प्रमुख पड़ाव होंगे।
सबसे खास बात यह है कि 21 अक्टूबर को भगवान श्रीराम के राजतिलक के बाद महाराजा अग्रसेन की जीवन लीला का मंचन भी किया जाएगा, जिससे कार्यक्रम का सांस्कृतिक विस्तार और बढ़ जाएगा।
100वें रामलीला महोत्सव के कारण इस बार नई मंडी का आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही सांस्कृतिक परंपरा का उत्सव भी बनने जा रहा है। 30 सितंबर की कलश यात्रा से शुरू होने वाली गतिविधियां 21 अक्टूबर तक चलेंगी और इस दौरान श्रीराम कथा, रामलीला मंचन, विजयदशमी, विजय यात्रा, भरत मिलाप, राजतिलक और महाराजा अग्रसेन की जीवन लीला जैसे कार्यक्रम श्रद्धालुओं और शहरवासियों को जोड़ेंगे।

