शुकतीर्थ Muzaffarnagar में श्रद्धा का महासागर उमड़ा: स्वामी ज्ञान भिक्षुकदास महाराज के 66वें परिनिर्वाण दिवस पर विशाल सत्संग, लाखों श्रद्धालुओं ने लिया आशीर्वाद
मोरना।Muzaffarnagar शुकतीर्थ में अखिल भारतीय संत शिरोमणि सतगुरु रविदास–सतगुरु समनदास मिशन के तत्वावधान में आयोजित स्वामी ज्ञान भिक्षुकदास महाराज के 66वें परिनिर्वाण दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला। 13वें विशाल सत्संग समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया और सत्संग के माध्यम से आध्यात्मिक संदेश ग्रहण किया।
रविवार रात्रि आयोजित मुख्य कार्यक्रम का शुभारंभ गुरु पूजन के साथ हुआ। इसके पश्चात प्रमुख सेवक संदीपदास द्वारा आरती-वंदना प्रस्तुत की गई। पूरे परिसर में भक्ति गीतों, गुरु वंदना और सत्संग की मधुर ध्वनि से वातावरण भक्तिमय हो गया।
संतों की उपस्थिति में संदीपदास महाराज को मिली संन्यासी दीक्षा
कार्यक्रम का सबसे विशेष और भावनात्मक क्षण उस समय आया जब संतों की पावन उपस्थिति में गुरु परंपरा के अनुसार संदीपदास महाराज को संन्यासी दीक्षा प्रदान की गई। उन्हें विधिवत बाना पहनाकर साधु वेश धारण कराया गया।
इस अवसर पर उन्हें मिशन की सेवा और आध्यात्मिक परंपरा को आगे बढ़ाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी सौंपी गई। उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस पावन क्षण का साक्षी बनकर गुरु परंपरा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
महंत गोरधन दास महाराज ने दिया सत्संग और मानव कल्याण का संदेश
आश्रम के महंत महात्मा गोरधन दास महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि सतगुरु रविदास महाराज और सतगुरु स्वामी समनदास महाराज ने मानव जीवन के कल्याण के लिए सत्संग का मार्ग बताया।
उन्होंने कहा कि संतों ने सदैव शाकाहार अपनाने, सभी जीवों पर दया करने और प्रेम, करुणा तथा समानता के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उनके अनुसार सत्संग केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और जीवन को सकारात्मक दिशा देने का माध्यम है।
महंत गोरधन दास महाराज ने कहा कि गुरु की वाणी और सत्संग की अमृतवर्षा व्यक्ति के जीवन को आनंदमय और सार्थक बनाती है।
सतगुरु समनदास महाराज की शिक्षाओं को आगे बढ़ाएंगे संदीपदास महाराज
महंत गोरधन दास महाराज ने बताया कि ब्रह्मलीन सतगुरु समनदास महाराज की प्रेरणा और आदेश के अनुरूप परम सेवक संदीपदास महाराज को बाना प्रदान कर मिशन की सेवा व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संदीपदास महाराज गुरु परंपरा की शिक्षाओं और मानव कल्याण के संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने का कार्य पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ाएंगे।
युवा पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने की आवश्यकता पर दिया जोर
संदीपदास महाराज ने अपने संबोधन में वर्तमान समय की सामाजिक चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी धीरे-धीरे पारिवारिक और आध्यात्मिक संस्कारों से दूर होती जा रही है।
उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि माता-पिता तो सत्संग और धार्मिक आयोजनों में भाग लेते हैं, लेकिन नई पीढ़ी का जुड़ाव अपेक्षाकृत कम हो रहा है। इसका प्रभाव परिवारों में बढ़ते तनाव और सामाजिक मूल्यों के कमजोर होने के रूप में दिखाई दे रहा है।
उन्होंने युवाओं से भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और गुरु परंपरा की शिक्षाओं को अपनाने का आह्वान किया।
गांव-गांव पहुंचकर समाज को जागृत किया था सतगुरु समनदास महाराज ने
संदीपदास महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन सतगुरु समनदास महाराज ने कठिन तपस्या और साधना के माध्यम से अपना जीवन समाज के उत्थान के लिए समर्पित किया।
उन्होंने गांव-गांव पैदल भ्रमण कर लोगों को सत्य, प्रेम, समानता और मानव सेवा का संदेश दिया। उनके प्रयासों से समाज में आध्यात्मिक जागरूकता और उच्च संस्कारों का व्यापक प्रसार हुआ।
उन्होंने कहा कि गुरु महाराज की शिक्षाओं और आदर्शों का प्रचार-प्रसार भविष्य में भी निरंतर जारी रहेगा और उनका आशीर्वाद सदैव भक्तों पर बना रहेगा।
देशभर से पहुंचे संतों और श्रद्धालुओं ने बढ़ाई आयोजन की गरिमा
विशाल सत्संग कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से महात्मा गुलाब दास (हरियाणा), महात्मा सतनाम दास, राजकुमार दास (सहारनपुर), अरविंद डाबरा, प्रीतम दास, राजकुमार ब्रह्मचारी, गुरमुख दास, राजवीर, सूरजभान, संत सुरेंद्र दास, संत ज्ञानचंद दास, आजाददास, उमराव दास सहित अनेक संत एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन जय विलास (लखनऊ) ने किया।
विशाल भंडारे में लाखों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद
सत्संग कार्यक्रम के उपरांत सोमवार प्रातः आश्रम परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इस दौरान लाखों श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और भक्ति के साथ प्रसाद ग्रहण किया।
आयोजकों द्वारा भोजन व्यवस्था, श्रद्धालुओं के आवागमन और अन्य व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित किया गया। बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने सेवा कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई।
सत्संग के माध्यम से सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक जागरूकता का संदेश
आयोजकों ने कहा कि ऐसे आध्यात्मिक आयोजन समाज में प्रेम, भाईचारे, समानता और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का कार्य करते हैं। सत्संग केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता और नैतिक जीवन के लिए भी प्रेरणा का महत्वपूर्ण माध्यम है।
कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने गुरु परंपरा के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने तथा समाज में सद्भाव, सेवा और मानवता का संदेश फैलाने का संकल्प भी लिया।

