Muzaffarnagar: आपसी गुटबाज़ी की शिकार सपा: स्वयंभू प्रत्याशी बनकर मोहल्ले के लोगो के साथ फोटो खींच सर्व समाज का समर्थन बता रहे मिनी नेता
Muzaffarnagar:उत्तर प्रदेश में 2022 के आगामी चुनाव आते ही पूरे साल गायब रहने वाले सपा नेता मैदान में उतर आए हैं। अखबारों और न्यूज़ चैनल्स के दफ्तरों में डेली बेसिस पर विज्ञप्ति और फ़ोटो भेजते न थकने वाले सपाई नेता अब अलग अलग मोहल्लों में जाकर चंद लोगो के बीच फ़ोटो खींच कर स्वयं को सर्व समाज का समर्थन मिलना घोषित कर रहे हैं।
मोहल्ला दर्शन के साथ साथ कोविड के नाम पर वैक्सीनेशन कैंपो के फीता काटकर चेहरा चमकाने का सिलसिला बदस्तूर जारी हैं। वो अलग बात हैं कि बिना मास्क के और उचित दूरी अपनाए, ज्यादा से ज्यादा मिनी नेता फ़ोटो में समाहित होने को आतुर रहते हैं।जनपद मुजफ्फरनगर में अब समाजवादी पार्टी की अंदरूनी कलह जगजाहिर होने लगी है वही समाजवादी पार्टी में भी मुजफ्फरनगर में क़ई गुट बने हुए है और अंतर्कलह दिखती नजर आ रही है।
अभी कुछ दिन पूर्व ही मुज़फ्फरनगर सपा के पुराने और वरिष्ठ कार्यकर्ता सुमित खेडा ने जिलाध्यक्ष प्रमोद त्यागी पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दिया था। उन्होंने जिलाध्यक्ष प्रमोद त्यागी पर अपमान करने के आरोप लगाए है।
उन्होंने कहा कि पार्टी में लगातार जिलाध्यक्ष द्वारा पुराने कर्मठ कार्यकर्ताओं की अनदेखी करते हुए जनाधारविहिन लोगों को पार्टी के मुख्य पदों पर विराजमान किया जा रहा है। जिससे पार्टी की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। इस संबंध में जब जिलाध्यक्ष से बात की जाती है तो वह तानाशाही रवैया दिखाते हैं और पंजाबी व सिख समाज का अपमान करते हैं।
उन्होंने कहा कि @samajwadiparty में लगातार तानाशाह जिलाध्यक्ष @PramodTyagispa द्वारा पुराने कर्मठ कार्यकर्ताओं की अनदेखी करते हुए जनाधारविहिन लोगों को पार्टी के मुख्य पदों पर विराजमान किया जा रहा है। जिससे पार्टी की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। https://t.co/2wlmlZuRO8
— News & Features Network (@mzn_news) October 12, 2021
जिससे मैं मानसिक रुप से परेशान होकर पार्टी से इस्तीफा दे रहा हूं। वहीं आज सपा के क़ई ग्रुपो पर पोस्ट वायरल होती नजर आयी ओर सुमित खेडा अपनी भड़ास निकालते नजर आए।आपसी गुटबाज़ी की शिकार सपा: स्वयंभू प्रत्याशी बनकर मोहल्ले के लोगो के साथ फोटो खींच सर्व समाज का समर्थन बता रहे मिनी नेता जबकि कल ही सपा में लम्बे समय से रहे सुमित खेड़ा ने आपसी गुटबाजी के चलते पार्टी को अलविदा कहा है.
उन्होंने जिलाध्यक्ष प्रमोद त्यागी पर अपमानित करने का आरोप भी लगाया था पार्टी का एक गुट ने जिला पंचायत चुनाव में भी जिलाध्यक्ष पर समर्पित कार्यकर्ताओं के स्थान पर जेबी व चाटुकार प्रत्याशियों को चुनाव लड़वाने का आरोप लगाया था जिससे जिला पंचायत में सपा का सूपड़ा साफ हो गया था।
आज भी मोहल्ला भ्रमण के नाम पर सुमित खेड़ा के रिश्तेदार और सपाई राहुल वर्मा ने पूर्व प्रत्याशी गौरव स्वरूप का स्वागत समारोह अपने घर पर आयोजित किया। उललेखनीय हैं की वर्मा स्वयं ही टिकट पाने की जुगत में लगे रहे हैं। अब पता नही कौन से अंतर्ज्ञान की प्राप्ति हुई या आपसी गुटबाज़ी का दबाव पड़ा कि, बिना पार्टी के ऑफिसियल अनाउंसमेंट के ही घोषित प्रत्याशी स्वरूप के आगे पीछे घूमते नज़र आये।
अन्य विज्ञप्ति एक्सपर्ट सपाइयों द्वारा और भी मोहल्ला भ्रमण के फ़ोटो जारी किए गए और 8-10 नए पुराने चेहरों के साथ सर्व समाज की ठेकेदारी बताते हुए उनका समर्थन पाया बताया गया।जब मौहल्ले को और लोगो से पता किया गया तो उनका कहना था कि हमने किसी को कोई समर्थन नही दिया हैं। 5 आदमी बैठकर सर्व समाज या किसी इलाके के वोट नहीं तय कर सकते।
#Muzaffarnagar पहले स्वयं टिकट के जुगाड़ में लगे रहे सपाई और सोशल मीडिया नेता राहुल वर्मा के निवास पर लोगों ने गौरव स्वरूप का जोरदार स्वागत समारोह आयोजित किया गया। गुटबाज़ी के लिए मशहूर मुज़फ्फरनगर सपा के नेता कब पलटी मार जाएं कोई नही कह सकता। फिलहाल गौरव स्वरूप चुनावी मैदान में। pic.twitter.com/a3NeLqjEEk
— News & Features Network (@mzn_news) October 12, 2021
कुछ वरिष्ठ लोगो ने पूर्व मंत्री स्वर्गीय चितरंजन स्वरूप को याद करते हुए कहा कि चित्तो चाचा ही सपा में मिलनसार व्यक्ति थे जिनके पास शहर का कोई भी व्यक्ति किसी भी समय जा सकता था और वो हरसम्भव साथ देने के लिए तैयार रहते थे। ये नई पीढ़ी तो चाटुकारों से घिरी रहती हैं, जिसको केवल कुछ चेहरे ही दिखाई और सुनाई देते हैं। मगर वो भूल गए कि वोट के लिए सबका साथ जरूरी हैं।
गौरतलब रहे कि, इन स्वघोषित कार्यक्रमो में सपा के मुख्य और जमीनी नेता, जनसेवी चेहरे गायब रहे। अब देखना ये होगा कि कैसे सपा के जिलाध्यक्ष प्रमोद त्यागी, अन्य वरिष्ठ और जमीनी नेता पार्टी को डूबने से बचाते हैं? जनमानस का फिर से समर्थन और विश्वास पाना अब आसान राह नहीं हैं। जनता जागरूक हैं और चुनावी तालाब के मेंढकों को पहचानती हैं।
(यह आर्टिकल सम्पादकीय मण्डल द्वारा एडिटेड नहीं हैं।)

