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Muzaffarnagar: डीआईओएस कार्यालय पर शिक्षकों का जबरदस्त धरना, 31 मांगों का ज्ञापन सौंपा, पुरानी पेंशन बहाली की मांग | Exclusive News

Muzaffarnagar जनपद के शिक्षकों का लंबे समय से चला आ रहा आक्रोश बुधवार को सड़क पर उतर आया। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के बैनर तले हजारों की संख्या में एकत्रित शिक्षकों ने महावीर चौक स्थित जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय का घेराव करके जोरदार धरना प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने प्रशासन को एक 31 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा और लंबित मुद्दों के तुरंत समाधान की मांग करते हुए सरकार को एक प्रकार का अल्टीमेटम भी दे दिया। शिक्षकों ने साफ कहा कि अगर उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो आगे का आंदोलन और भी बड़े स्तर पर होगा।

प्रदेशव्यापी आह्वान पर हुआ एकजुट प्रदर्शन

यह धरना प्रदर्शन किसी स्थानीय घटना का परिणाम नहीं, बल्कि संगठन के प्रान्तीय नेतृत्व के आह्वान पर पूरे उत्तर प्रदेश में एक साथ आयोजित किया गया एक संगठित अभियान था। संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. अमित कुमार जैन की अध्यक्षता में हुए इस धरने में जिले के कोने-कोने से शिक्षकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे स्पष्ट होता है कि उनमें अपने हक की लड़ाई को लेकर कितना गुस्सा और एकजुटता है।

नेताओं ने रखी मुख्य मांगें, पुरानी पेंशन बहाली सबसे ऊपर

धरना स्थल पर संगठन के जिला संरक्षक एवं प्रदेश उपाध्यक्ष शिवकुमार यादव ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “आज प्रदेश के समस्त जिलों में यह धरना हो रहा है। हमारी मांगें बहुत स्पष्ट और जायज हैं। अगर प्रदेश सरकार ने इस ज्ञापन में दी गई विभिन्न मांगों पर शीघ्र संज्ञान नहीं लिया, तो आगामी विचार-विमर्श के बाद एक बहुत बड़े आन्दोलन की घोषणा की जाएगी। हमारा संगठन शिक्षकों की समस्याओं के लिए हमेशा संघर्ष करता रहेगा।”

मांगों की लंबी清单, हर मुद्दा जरूरी

जिलाध्यक्ष डॉ. अमित कुमार जैन ने मांग पत्र की मुख्य बातें रखते हुए कहा कि शिक्षक समुदाय की सबसे बड़ी और प्राथमिक मांग पुरानी पेंशन को पूर्ण रूप से बहाल करने की है। इसके अलावा अन्य प्रमुख मांगों में शामिल हैं:

  • शिक्षकों की सेवा सुरक्षा के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 21, 18 व 12 का पूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित करना।

  • सभी शिक्षकों और उनके परिवारों के लिए निशुल्क और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था करना।

  • समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत का पालन करना और सभी भेदभाव खत्म करना।

  • सरल और पारदर्शी स्थानान्तरण नीति लागू करना ताकि शिक्षकों को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।
    डॉ. जैन ने जोर देकर कहा कि सरकार को इन लंबित समस्याओं को अविलंब मानना चाहिए।

वित्तीय अनियमितताओं पर भी उठाए सवाल

जिला मंत्री अरूण कुमार ने प्रशासनिक उपेक्षा की ओर इशारा करते हुए कुछ चिंताजनक मुद्दे उठाए। उन्होंने बताया कि पुरानी पेंशन योजना (OPS) में आए साथियों के मामलों का निराकरण नहीं हो रहा है। एमपीएस (मास्टर प्रिंटर स्कीम) का पैसा उनके व्यक्तिगत प्रोविडेंट फंड खातों में स्थानांतरित नहीं किया जा रहा है। साथ ही, पिछले महीने हुई पदोन्नति के बाद भी कई शिक्षकों का वेतन निर्धारण, चयन और प्रोन्नत वेतनमान जैसे मामले डीआईओएस और लेखाधिकारी कार्यालय में लंबित पड़े हैं, जिनके तुरंत निस्तारण की मांग की गई।

समय पर वेतन की मांग

जिला कोषाध्यक्ष संजय कुमार मोघा ने एक बहुत ही basic और महत्वपूर्ण मांग रखी। उन्होंने कहा कि हर माह की पहली तारीख को जनपद के सभी शिक्षकों के वेतन उनके बैंक खातों में स्थानांतरित होना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। महीनों के अंत तक वेतन का इंतजार करना शिक्षकों के लिए एक बड़ी आर्थिक समस्या पैदा करता है।

धरने में शामिल हुए जिले के प्रमुख शिक्षक

इस ऐतिहासिक धरने में जिले के शिक्षक समुदाय का बड़ा नेतृत्व मौजूद रहा। इनमें प्रधानाचार्य सुरेन्द्र कुमार सिंह, प्रवीण कुमार शर्माश्रीमति सारिका जैन, सुभाष सिंह, आदित्य कुमार सक्सैना, पूर्व प्रधानाचार्य धर्मपाल सिंह, संजीव त्यागी, अजय कुमार अहलावत, राहुल कुमार, रवि प्रकाश यादव, राजीव कुमार, नमन जैन, संजय कुमार, हाक्कम सिंह, बिजेंद्र बहादुर सिंह, उषा सिंह, विजय कुमार त्यागी शामिल रहे। इसके अलावा, उ.प्र. माध्यमिक शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष और जिला मंत्री गौरव चैधरी भी इस आंदोलन में शिक्षकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े दिखे।

मुजफ्फरनगर में आज का यह धरना केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के शिक्षक समुदाय की बढ़ती बेचैनी और असंतोष का एक स्पष्ट संकेत है। यह घटना दर्शाती है कि नीतिगत स्तर पर लंबे समय से जारी लापरवाही और देरी ने शिक्षकों के धैर्य का बांध तोड़ दिया है। पुरानी पेंशन जैसे मुद्दे केवल आर्थिक सुरक्षा का मामला नहीं हैं, बल्कि ये शिक्षकों के प्रति सम्मान और उनके भविष्य के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रश्न बन गए हैं। सरकार के सामने अब एक स्पष्ट विकल्प है: या तो शिक्षकों की जायज मांगों को शीघ्र और गंभीरता से हल करे, या फिर एक बहुत बड़े और व्यापक आंदोलन के लिए तैयार रहे जो पूरे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

 

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