Muzaffarnagar: विभिन्न प्रत्याशी रूठों को मनाने मे जुटे, सीट निकालना कैडिडेट के लिए टेढी खीर
मुजफ्फरनगर। (Muzaffarnagar News) नगर निकाय चुनाव के कारण जनपद में अब धीरे-धीरे राजनैतिक माहौल बनना शुरू हो गया है। स्थानीय निकाय के चुनाव को लेकर राजनैतिक दलों से जुडे प्रत्याशियो के समर्थक एवं पार्टी कार्यकर्ता चुनाव प्रचार अभियान मे जुट गए है। तो वहीं दूसरी और आम जन चुनावी चर्चा मे मश्गूल है। चाय, पान, होटल तथा सैलून आदि सार्वजलिक स्थल हर और लोगों के बीच चुनाव तथा प्रत्याशियों के सम्बन्ध मे चर्चाओं का दौर जारी है।
कोई किसी प्रत्याशी को अपनी पसन्द बताते हुए उसकी शान मे कसीदे पढ रहा है तो कोई तर्क देकर प्रत्याशी को अनफिट बता रहा है। हालाकि ये आम राय हो सकती है। अक्सर चुनावी माहौल मे इस तरह की चर्चाए राजनीति मे रूचि रखने वाले लोगों के बीच चलती रहती है। जबकि हकीकत यह है कि पार्टी हाईकमान को ही प्रत्याशी चयन का एकाधिकार है। निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी अरविन्द मलप्पा बंगारी एवं एसएसपी संजीव सुमन के निर्देशन में एक और जहां बीते दिन नामांकन कार्य शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हो चुका है।
अब चुनावी प्रक्रिया की अगली कडी में कल सिम्बल वितरित हो जाएंगे। जिसके पश्चात चुनाव रफ्तार पकड जायेगा। हालाकि नामांकन के बाद से ही प्रत्याशी एवं प्रत्याशी समर्थक जनसम्पर्क में जुट गए है। वहीं दूसरी और मतदाताओं की खामोशी से प्रत्याशियों मे बैचेनी है। प्रत्याशी मतदाताओं की नब्ज टटोलने के प्रयास मे हैं जबकि मतदाता अभी पूरी तरह चुप्पी साधे हुए है। टिकट वितरण से ही नाराज चल रहे पार्टी कार्यकर्ताओ का मान मुनव्वल कर रूठों को मनाने की कवायद भी बरकरार है। इस सम्बन्ध मे प्रत्याशियों का कहना है कि चुनाव के दौरान अक्सर इस तरह की स्थिती बन जाती है।
परन्तु उनका प्रयास जारी है तथा बहुत जल्द नाराज चल रहे साथी कार्यकर्ताआें को मना लिया जायेगा। पार्टी कार्यकर्ता राजनैतिक दल की रीढ की है। उनके सहयोग के बिना चुनाव जीतना असंभव ही नही बल्कि नामुमकिन है। यह तो भविष्य के गर्भ मे है कि इस चुनाव मे किस के सिर जीत का सेहरा बंधेगा तथा किस प्रत्याशी को हार का सामना करना होगा। परन्तु इस सब से दिगर असली बात यह है कि चुनाव बहुत रोचक होगा। क्योंकि चुनाव को लेकर खेमाबन्दी ही भी चर्चाए हैं। तथा प्रत्याशियों को भीतरघात का भी सामना करना पड सकता है।
राजनैतिक पंडितो का मानना है कि जरूरी नही है कि हर चुनाव मे एक सी स्थिती हो। बल्कि सही बात तो यह है कि हर चुनाव की अपनी परिस्थिती होती है। किस समय क्या राजनैतिक माहौल हो यह कहा नही जा सकता। कई बार चुनाव सीधे-सीधे पक्ष-विपक्ष के बीच होता है तो कईं बार दलिय स्थिती, जातिय एवं क्षेत्रवाद आदि ऐसे चीजें सामने होते हैं। कि जिनसे चुनाव सरल ना होकर खुद ब खुद पेचिता हो जाता है।
ऐसी स्थिती मे सीट निकालना कैडिडेट के लिए टेढी खीर है। जाति के आधार पर वोटों का ध्रुवीकरण,क्षेत्रिय समस्यायें चुनाव के प्रति मतदाताओं की मनोस्थिती ऐसे कई कारण हैं। जो चुनाव को प्रभावित करते हैं। चुनाव को लेकर मतदाताओं की जागरूकता, मतदान प्रतिशत आदि भी चुनाव समर का एक अहम हिस्सा हैं।

