फिल्मी चक्कर

Nana Patekar का 75 साल की उम्र में निधन: गोवा में कार्डियक अरेस्ट से थमी दिग्गज अभिनेता की सांसें, PM मोदी समेत देशभर में शोक

Nana Patekar Death की खबर ने गुरुवार सुबह हिंदी और मराठी सिनेमा के साथ-साथ देशभर में उनके करोड़ों प्रशंसकों को स्तब्ध कर दिया। दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्हें गोवा स्थित अपने घर पर कार्डियक अरेस्ट आया था। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उनकी हालत नहीं संभल सकी।

मणिपाल अस्पताल के डॉ. शेखर सालकर के मुताबिक नाना पाटेकर का सुबह करीब 5:20 बजे निधन हुआ। बताया गया कि कार्डियक अरेस्ट के बाद उन्हें अस्पताल लाया गया और लगभग 45 मिनट तक सीपीआर दी गई, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। घटना के समय घर पर परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था। उनके दोस्त और केयरटेकर उनके साथ थे।

अब उनके निधन के बाद पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया की जानी है। नाना पाटेकर के जाने की खबर सामने आते ही फिल्म जगत, राजनीति, खेल और साहित्य से जुड़े लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि देना शुरू कर दिया।

PM नरेंद्र मोदी ने नाना पाटेकर को बताया बेहतरीन कलाकार

नाना पाटेकर के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने उन्हें एक बेहतरीन कलाकार बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने अलग-अलग किरदारों के जरिए दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी।

प्रधानमंत्री की श्रद्धांजलि में नाना पाटेकर की फिल्मों और उनके किरदारों की झलक भी दिखाई दी। मोदी ने अपने संदेश में ‘तिरंगा’, ‘परिंदा’, ‘प्रहार’, ‘क्रांतिवीर’, ‘खामोशी’ और ‘अंकुश’ जैसी फिल्मों का उल्लेख किया।

प्रधानमंत्री ने नाना के व्यक्तित्व और उनके सिनेमा को अलग अंदाज में याद करते हुए कहा कि उनका जीवन तिरंगे की आन-बान और शान की तरह रहा। वह बंधनों में नहीं रहे और परिंदे की तरह फिल्मों के आसमान में उड़ते रहे। उनकी फिल्मों ने समाज में व्याप्त अव्यवस्था पर तीखा प्रहार किया।

मोदी ने उन्हें एक ऐसे ‘क्रांतिवीर’ के रूप में याद किया, जिसने सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाई। उनकी वाणी जितनी प्रभावी थी, उनकी खामोशी भी उतनी ही असरदार मानी जाती थी।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में जिन छह फिल्मों का जिक्र किया, उनमें ‘परिंदा’ और ‘क्रांतिवीर’ के लिए नाना पाटेकर को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला था।

एक अभिनेता नहीं, अपने आप में अभिनय की पूरी पाठशाला थे नाना

नाना पाटेकर की खासियत यह थी कि वह पर्दे पर आते ही किसी दृश्य को अपने कब्जे में ले लेते थे। उनके अभिनय में संवाद से ज्यादा भाव, आंखों से ज्यादा असर और आवाज से ज्यादा वजन महसूस होता था।

उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा के साथ थिएटर में भी लंबा समय बिताया। लगभग पांच दशक के करियर में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। कभी वह पुलिस अधिकारी बने, कभी खलनायक, कभी गुस्सैल और विद्रोही किरदार में दिखाई दिए तो कभी ऐसे सामान्य इंसान की भूमिका निभाई जिसमें दर्शकों को अपने आसपास का कोई व्यक्ति नजर आया।

‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘प्रहार’, ‘अंकुश’, ‘खामोशी’, ‘तिरंगा’, ‘अब तक छप्पन’, ‘नटसम्राट’, ‘वेलकम’ और ‘हाउसफुल 5’ जैसी फिल्मों में उनके अलग-अलग रंग देखने को मिले।

उनका अभिनय केवल संवाद बोलने तक सीमित नहीं रहता था। उनकी आवाज, ठहराव, गुस्सा, चुप्पी और चेहरे के भाव मिलकर किरदार को एक अलग पहचान देते थे।

बॉलीवुड से राजनीति और खेल तक, हर तरफ से आई श्रद्धांजलियां

नाना पाटेकर के निधन की खबर के बाद देश की अलग-अलग हस्तियों ने उन्हें याद किया। बॉलीवुड से लेकर राजनीति, खेल और साहित्य जगत तक उनके निधन पर शोक व्यक्त किया गया।

राहुल गांधी ने कहा- दर्शकों के दिलों में छोड़ी अमिट छाप

लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनके निधन की खबर बेहद दुखद है। उन्होंने नाना के अभिनय और किरदारों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय सिनेमा और दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी।

राहुल गांधी ने उनके परिवार, मित्रों और समर्थकों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने भी किया याद

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि नाना पाटेकर ने अभिनेता के रूप में अपनी अलग और विशेष पहचान बनाई थी।

उन्होंने कहा कि अपने लंबे कलात्मक सफर में नाना ने केवल अभिनय की मिसाल ही पेश नहीं की, बल्कि सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण विषयों को लेकर लोगों के बीच सकारात्मक चर्चा को भी प्रेरित किया।

अक्षय कुमार बोले- यकीन करना मुश्किल है कि आप चले गए

अक्षय कुमार ने नाना पाटेकर के साथ ‘वेलकम’ और हाल ही में ‘हाउसफुल 5’ में काम किया था। नाना के निधन पर अक्षय ने कहा कि यह विश्वास करना मुश्किल है कि वह अब उनके बीच नहीं रहे।

उन्होंने नाना को उन दुर्लभ कलाकारों में बताया जिन्हें दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए बहुत कुछ करने की जरूरत नहीं होती थी। उनकी आवाज, इंटेंसिटी और हर प्रदर्शन में दिखाई देने वाली ईमानदारी उन्हें अलग बनाती थी।

अक्षय के लिए नाना की कमी को शब्दों में व्यक्त करना आसान नहीं था।

विराट कोहली ने कहा- पीढ़ियों तक जिंदा रहेगा उनका काम

क्रिकेटर विराट कोहली ने भी नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने उन्हें भारतीय सिनेमा का सच्चा दिग्गज बताते हुए कहा कि उनका काम और विरासत आने वाली पीढ़ियों तक जीवित रहेगी।

विराट ने नाना की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

रजनीकांत ने कहा- भरोसा नहीं हो रहा कि नानाजी अब नहीं रहे

दक्षिण भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार रजनीकांत ने भी नाना पाटेकर के निधन पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा कि उनके प्यारे दोस्त नानाजी अब इस दुनिया में नहीं रहे।

उन्होंने नाना के परिवार और करीबी लोगों के प्रति संवेदना जताई।

परेश रावल ने कहा- भाऊ, नाना साहेब, आपके लिए हमेशा प्यार और सम्मान रहेगा

अभिनेता परेश रावल ने नाना को बेहद ईमानदार और गंभीर इंसान के रूप में याद किया। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि नाना के लिए उनके मन में हमेशा प्यार और सम्मान रहेगा।

सचिन तेंदुलकर ने याद की नाना की सादगी

पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने नाना पाटेकर को बेहद सीधे और जमीन से जुड़े इंसान के रूप में याद किया। सचिन ने कहा कि नाना के काम में भी उनकी यही ईमानदारी नजर आती थी। चाहे मराठी सिनेमा हो या हिंदी फिल्में, वे हर किरदार में सच्चाई और स्वाभाविकता लेकर आते थे।

रितेश देशमुख बोले- एक युग का अंत

अभिनेता रितेश देशमुख ने नाना के निधन पर कहा कि उनके पास इस खबर के लिए शब्द नहीं हैं। उन्होंने नाना को बेमिसाल अभिनेता बताया।रितेश ने नाना के साथ ‘ब्लफमास्टर’ और ‘हाउसफुल 5’ में काम किया था। उन्होंने यह भी कहा कि नाना के साथ मराठी फिल्म में काम करने की उनकी इच्छा अधूरी रह गई।

हेमा मालिनी ने कहा- फिल्म इंडस्ट्री ने एक बड़ा सितारा खो दिया

अभिनेत्री हेमा मालिनी ने नाना को याद करते हुए कहा कि फिल्म इंडस्ट्री ने एक बड़ा सितारा खो दिया है।उन्होंने कहा कि नाना ने अपने अनूठे अभिनय से अपनी अलग पहचान बनाई और उन्हें अभिनय की पूरी पाठशाला माना जाता था। उनके जाने के बाद फिल्म जगत को उनकी कमी हमेशा महसूस होगी।

कमल हासन ने नाना को बेहतरीन कलाकार के साथ बेहतर इंसान बताया

अभिनेता कमल हासन ने नाना पाटेकर के निधन को दिल तोड़ने वाली खबर बताया। उन्होंने नाना को बेहतरीन कलाकार के साथ-साथ उससे भी बेहतर इंसान बताया।कमल हासन ने नाना की ऊर्जा और उनके व्यक्तित्व को याद किया। उन्होंने महाराष्ट्र में किसानों की मदद और कारगिल युद्ध के दौरान उनकी स्वयंसेवक सेवा का भी उल्लेख किया।

अनुपम खेर ने साझा की आखिरी मुलाकात की भावुक याद

नाना पाटेकर के करीबी मित्रों में शामिल अभिनेता अनुपम खेर ने भी उनके निधन पर भावुक पोस्ट लिखी।उन्होंने बताया कि जब उन्हें नाना के निधन की खबर मिली, तब वह अपने प्ले का शो पूरा करके स्टेज से विंग्स में पहुंचे थे। उस समय उनके लिए लोगों के सामने मुस्कुराना, मिलना और तस्वीरें खिंचवाना बेहद मुश्किल था।लेकिन अनुपम खेर के मन में यह विचार आया कि नाना शायद यही चाहते कि वह अपना काम और लोगों के प्रति अपनी जिम्मेदारी पूरी करें।

उन्होंने नाना के साथ अपने रिश्ते को याद करते हुए बताया कि नाना बिना किसी दिखावे के सीधे अपनी बात कहने वाले व्यक्ति थे।अनुपम खेर ने यह भी बताया कि करीब दो महीने पहले नाना से उनकी मुलाकात हुई थी। उस समय उन्होंने नाना के घर आने का वादा किया था। अब वह मुलाकात हमेशा के लिए अधूरी रह गई।

मिथुन चक्रवर्ती ने कहा- नाना ने कई लोगों की चुपचाप मदद की

अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने नाना पाटेकर को अपने सबसे करीबी दोस्तों में से एक बताया।

उन्होंने कहा कि लोग नाना के गुस्से और मिजाज की चर्चा करते थे, लेकिन उनके गुस्से के पीछे काम को सही तरीके से करने की उनकी आदत थी।

मिथुन ने नाना को दिल का बेहद अच्छा इंसान बताया और कहा कि उन्होंने बहुत से लोगों की बिना किसी दिखावे के मदद की थी। दोनों की दोस्ती फिल्मों की सीमा से कहीं आगे थी।

आखिरी फिल्म के निर्देशक आदित्य सरपोतदार ने भी किया याद

नाना पाटेकर की आखिरी फिल्म ‘शक्ति शालिनी’ के निर्देशक आदित्य सरपोतदार ने भी उनके निधन पर भावुक श्रद्धांजलि दी।उन्होंने नाना के पुणे स्थित फार्महाउस की एक याद साझा की। उन्होंने बताया कि नाना काका ने खुद पेड़ पर झूला बांधा था और बेहद बेफिक्र होकर उस पल का आनंद लिया था।आदित्य ने कहा कि वह नाना को उनकी जिंदादिली, उत्सुकता और बच्चों जैसी अद्भुत भावना के साथ हमेशा याद रखना चाहेंगे।

राजपाल यादव बोले- हमने उनसे अदाकारी सीखी

अभिनेता राजपाल यादव ने कहा कि जिनकी अदाकारी को उन्होंने वर्षों तक देखा और सराहा, उनके साथ काम करना उनके लिए बेहद खास अनुभव रहा।उन्होंने कहा कि नाना को सिर्फ उनके किरदारों के माध्यम से नहीं बल्कि व्यक्तिगत रूप से जानने का मौका भी मिला। नाना की सादगी और अपनापन उनके लिए हमेशा यादगार रहेगा।

सुनील शेट्टी बोले- नाना जैसा दूसरा कोई नहीं

सुनील शेट्टी ने नाना को याद करते हुए कहा कि वह जितनी ऊंचाइयों तक पहुंचे, उतने ही अपनी जड़ों से जुड़े रहे।उन्होंने नाना की बेबाकी, ईमानदारी और अभिनय की महारत को याद किया। सुनील शेट्टी ने कहा कि दुनिया में सिर्फ एक नाना थे और हमेशा वही रहेंगे।

उनके अनुसार नाना के बिना सिनेमा पहले जैसा नहीं रहेगा।

रवीना टंडन ने ‘गुलाम-ए-मुस्तफा’ की शूटिंग को किया याद

अभिनेत्री रवीना टंडन ने नाना के निधन को अपने लिए गहरा झटका बताया।

उन्होंने नाना के साथ अपने रिश्ते को आपसी सम्मान और प्यार से भरा बताया। रवीना ने ‘गुलाम-ए-मुस्तफा’ की शूटिंग के दौरान का एक प्रसंग याद किया और कहा कि नाना की समझ और मार्गदर्शन ने उनके अभिनय को बेहतर बनाने में मदद की थी।

रवीना ने उन्हें निडर, मजबूत और दयालु इंसान के रूप में याद किया।

मनोज बाजपेयी के लिए नाना थे मुंबई आने वाले युवाओं की उम्मीद

अभिनेता मनोज बाजपेयी ने कहा कि नाना पाटेकर के सफर ने मुंबई आने वाले कई युवाओं को हिम्मत दी।उनका मानना था कि अगर कोई कलाकार अपनी कला, अपनी पहचान और खुद के प्रति ईमानदार रहता है तो वह अपनी जगह बना सकता है।

मनोज ने कहा कि भारतीय सिनेमा ने अपने समय के एक बेहतरीन अभिनेता को खो दिया है।

कंगना रनोट बोलीं- नाना हमेशा फिट और सेहतमंद नजर आते थे

अभिनेत्री कंगना रनोट ने भी नाना के निधन पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि नाना हमेशा फिट और सेहतमंद नजर आते थे, इसलिए उनके निधन की खबर पर विश्वास करना उनके लिए भी मुश्किल था।उन्होंने दिवंगत अभिनेता की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

प्रकाश राज को याद आईं बातचीत और बहसें

अभिनेता प्रकाश राज ने नाना के साथ बिताए पलों को याद किया। उन्होंने कहा कि नाना के साथ हुई बातचीत और बहसें उन्हें हमेशा याद रहेंगी।उन्होंने नाना के हाथ का बना खाना और उनसे मिली सीख को भी याद किया। प्रकाश राज ने कहा कि वह नाना के अपनी जिंदगी में आने के लिए हमेशा आभारी रहेंगे।

निर्देशक प्रकाश झा के लिए नाना का जाना बहुत बड़ा खालीपन

फिल्म निर्माता प्रकाश झा ने नाना को केवल पेशेवर सहयोगी ही नहीं बल्कि व्यक्तिगत रूप से भी बेहद करीबी बताया।उन्होंने कहा कि दोनों ने एक-दूसरे के साथ बहुत कुछ साझा किया और उनके बीच एक गहरा जुड़ाव था। नाना के जाने से पैदा हुए खालीपन को समझना उनके लिए बेहद कठिन है।

मेहुल कुमार ने तिरंगा और क्रांतिवीर की यादें साझा कीं

निर्देशक मेहुल कुमार ने नाना के साथ ‘तिरंगा’, ‘क्रांतिवीर’ और ‘कोहराम’ जैसी फिल्मों में काम किया।उन्होंने नाना को जमीन से जुड़ा और सच्चाई के साथ जीने वाला इंसान बताया। उनके मुताबिक फिल्मों की सफलता और कई पुरस्कार मिलने के बावजूद नाना का व्यवहार नहीं बदला।मेहुल कुमार ने बताया कि नाना ने उनके साथ तीन फिल्में कीं और उनके साथ काम का अनुभव बेहद खास रहा।

उन्होंने यह भी याद किया कि ‘क्रांतिवीर’ को लेकर अभिनेता दिलीप कुमार ने कहा था कि लोग नाना को हमेशा उस किरदार के नाम से याद रखेंगे।‘कोहराम’ के दौरान अमिताभ बच्चन और नाना पाटेकर के बीच भी शुरुआत में कुछ संकोच था, लेकिन बाद में दोनों के बीच अच्छी दोस्ती हो गई। ‘तिरंगा’ के सेट पर नाना और राज कुमार की भी अच्छी बॉन्डिंग बनी थी।

मेहुल कुमार ने कहा कि नाना सिर्फ स्टार नहीं थे, बल्कि अच्छे इंसान भी थे और गरीबों तथा किसानों की मदद करते थे।

उदित नारायण बोले- सुबह की खबर ने हिला दिया

गायक उदित नारायण ने नाना के निधन की खबर पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि सुबह-सुबह यह खबर सुनकर उन्हें यकीन ही नहीं हुआ।उन्होंने नाना को अभिनेता के रूप में बेमिसाल और व्यक्तित्व के स्तर पर शानदार इंसान बताया।

उदित नारायण ने नाना के साथ काम की एक याद भी साझा की। उन्होंने बताया कि एक फिल्म की रिकॉर्डिंग के दौरान नाना खुद माइक पर गाकर समझा रहे थे कि उन्हें गाना किस तरह चाहिए। उदित ने एक टेक में गाना गाया और नाना ने उनकी तारीफ की।

जूनियर NTR ने कहा- हर किरदार में दिखाई देती थी ईमानदारी

दक्षिण भारतीय स्टार जूनियर NTR ने नाना को भारतीय सिनेमा के बेहतरीन कलाकारों में से एक बताया।उन्होंने कहा कि नाना के हर किरदार में एक खास ईमानदारी और इंटेंसिटी दिखाई देती थी। उनकी परफॉर्मेंस अभिनय से ज्यादा पर्दे पर जिंदगी के सामने आने जैसी लगती थी।NTR ने कहा कि भारतीय सिनेमा में नाना का योगदान आने वाली पीढ़ियों तक याद किया जाएगा।

नितिन गडकरी ने याद की नाना से दोस्ती

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नाना के साथ अपने करीबी और दोस्ताना संबंधों को याद किया।उन्होंने नाना के पांच दशक से अधिक लंबे करियर और उनकी खास संवाद अदायगी की प्रशंसा की। गडकरी ने किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए नाना के सामाजिक काम को भी याद किया।

शुभेंदु अधिकारी ने कहा- भारतीय सिनेमा ने खास आवाज खो दी

पश्चिम बंगाल के नेता शुभेंदु अधिकारी ने नाना को भारतीय सिनेमा की बेबाक और विशिष्ट आवाज बताया।उन्होंने ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘प्रहार’ और ‘अब तक छप्पन’ में उनके अभिनय को याद किया तथा सामाजिक कार्यों और ग्रामीण समुदायों के लिए उनके प्रयासों का उल्लेख किया।

करीब पांच दशक का शानदार फिल्मी सफर

नाना पाटेकर ने वर्ष 1978 में ‘गमन’ से अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा के साथ थिएटर में भी अपनी पहचान मजबूत की।उनके करियर में कई ऐसे किरदार आए जिन्हें भारतीय सिनेमा के यादगार किरदारों में गिना जाता है।

‘परिंदा’ में उनके अभिनय ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान दिलाई। ‘क्रांतिवीर’ में उनका किरदार भी दर्शकों के बीच बेहद चर्चित रहा। इसके अलावा ‘प्रहार’, ‘अंकुश’, ‘खामोशी’, ‘तिरंगा’, ‘अब तक छप्पन’, ‘नटसम्राट’, ‘वेलकम’ और ‘हाउसफुल 5’ जैसी फिल्मों ने उनके अभिनय के अलग-अलग रंग दिखाए।

उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले थे और वर्ष 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

नाना का अभिनय हमेशा उनके व्यक्तित्व से जुड़ा रहा

नाना की सबसे बड़ी ताकत उनकी सहजता थी। वह किसी किरदार को केवल निभाते नहीं थे, बल्कि उसमें पूरी तरह उतरते दिखाई देते थे।उनके संवादों में गुस्सा हो या दर्द, हास्य हो या गंभीरता, हर स्थिति में उनकी आवाज का अलग प्रभाव रहता था। यही वजह रही कि उनके कई संवाद और किरदार दर्शकों की स्मृति में लंबे समय तक बने रहे।

उनका व्यक्तित्व भी उनकी कला से अलग नहीं था। बेबाक बोलना, किसी बात को लेकर असहमति हो तो खुलकर व्यक्त करना और अपने तरीके से काम करना उनकी पहचान का हिस्सा रहा।

फिल्मी करियर में विवाद भी आए, लेकिन अभिनय की चमक कायम रही

नाना पाटेकर का सफर हमेशा आसान नहीं रहा। अपने लंबे करियर में उन्हें कई तरह के अनुभवों और विवादों का सामना करना पड़ा।एक प्रसंग के मुताबिक निर्देशक रवि चोपड़ा ने उन्हें एक फिल्म में रेपिस्ट का किरदार ऑफर किया था। इस भूमिका से नाना नाराज हो गए और मामला इतना बढ़ा कि उन्होंने निर्देशक को गालियां तक दे दीं। बाद में अभिनेत्री स्मिता पाटिल के हस्तक्षेप के बाद स्थिति शांत हुई और नाना को फिल्म में महत्वपूर्ण खलनायक की भूमिका मिली।

‘परिंदा’ की शूटिंग के दौरान भी निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा के साथ उनका विवाद हुआ था। हालांकि ऐसे मतभेद उनके अभिनय सफर को रोक नहीं सके।

उनकी पहचान एक ऐसे कलाकार की बनी जो किरदार को लेकर समझौता करने के बजाय उसे अपनी पूरी ऊर्जा के साथ निभाने में विश्वास रखता था।

पंजाब और पंजाबियों से नाना का खास लगाव

नाना पाटेकर का पंजाब से भी एक अलग जुड़ाव रहा। बताया जाता है कि करीब 17 वर्ष पहले पंजाब में शूटिंग के दौरान उन्होंने पंजाबी सीखी थी।उन्होंने पंजाबी समुदाय के प्रति अपना लगाव कई बार व्यक्त किया था। वर्ष 2009 में ‘एक: द पावर ऑफ वन’ की शूटिंग के दौरान वह चंडीगढ़ और पंजाब में थे। फिल्म में उन्होंने सीबीआई अधिकारी की भूमिका निभाई थी और कई दृश्यों में स्थानीय लोगों से बातचीत करनी थी।

मराठी पृष्ठभूमि के बावजूद संवादों को पंजाबी अंदाज में बोलने के लिए उन्होंने स्थानीय महिलाओं से पंजाबी उच्चारण सीखने की कोशिश की थी।नाना ने बताया था कि उन्हें पंजाबी बहुत पसंद है। उनके पिता भी अच्छी पंजाबी बोलते थे, क्योंकि टेक्सटाइल प्रिंटिंग के कारोबार के कारण उनका पंजाबियों से लगातार संपर्क रहता था।

नाना खुद को ‘दिल से किसान’ कहते थे

नाना पाटेकर को खेती-किसानी और प्रकृति से भी खास लगाव था। चंडीगढ़ में उन्होंने कहा था कि वह प्रकृति के करीब रहना पसंद करते हैं और दिल से किसान हैं।किसानों और ग्रामीण परिवारों के प्रति उनका जुड़ाव केवल शब्दों तक सीमित नहीं था। कई मौकों पर उनके सामाजिक काम और जरूरतमंद लोगों की मदद का उल्लेख सामने आया।

‘वेलकम’ की शूटिंग के दौरान किसान परिवार की मदद

वर्ष 2007 में ‘वेलकम’ की शूटिंग के दौरान नाना को यूनिट के एक असिस्टेंट डायरेक्टर बिट्टू चंडोक के चाचा अवतार सिंह के बारे में पता चला।अवतार सिंह चंडीगढ़ में रहते थे और किसान थे। वह गंभीर रूप से बीमार थे तथा उन्हें बाईपास सर्जरी के लिए लगभग तीन लाख रुपये की आवश्यकता थी।

नाना ने तत्काल तीन लाख रुपये की मदद की। खास बात यह थी कि उन्होंने इसे दान मानने से भी इनकार किया था।उन्होंने कहा था कि अवतार सिंह उनके पिता की उम्र के हैं और यह मदद उनके लिए अपने पिता की मदद करने जैसी थी।नाना ने यह भी कहा था कि एक समय उनके पास कुछ नहीं था और आज जो कुछ भी उनके पास है, उसमें लोगों का योगदान रहा है।

अमृतसर पहुंचे तो गोल्डन टेंपल में माथा टेका

नाना पाटेकर जनवरी 2018 में पत्नी नीलकांति पाटेकर के साथ अमृतसर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने श्री हरमंदिर साहिब यानी गोल्डन टेंपल में माथा टेका।उन्होंने वहां पूरी परिक्रमा की और लंगर हॉल में जूठे बर्तन भी साफ किए।

दर्शन के बाद नाना ने वहां मिले अनुभव को बेहद खास बताया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें यहां आकर ऐसी शांति मिली, जैसी उन्होंने कहीं और महसूस नहीं की।उन्होंने स्वर्ण मंदिर में सेवा और श्रद्धा का माहौल देखकर प्रभावित होने की बात कही थी। उनके अनुसार वहां किसी तरह का छोटा-बड़ा या भेदभाव दिखाई नहीं देता था।

उन्होंने कहा था कि यदि पूरा देश इस भावना को समझकर अपनी जिंदगी में अपना ले तो देश और भी बेहतर बन सकता है।बाद में नाना अमृतसर दोबारा पहुंचे और वाघा बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी में भी शामिल हुए। उन्होंने बीएसएफ की नशा विरोधी दौड़ में भी हिस्सा लिया था।

पिता के साथ रिश्ते की वह कहानी, जो नाना को जीवनभर याद रही

नाना पाटेकर अपने पीछे केवल फिल्में और पुरस्कार नहीं छोड़ गए। उनकी जिंदगी से जुड़े कई ऐसे प्रसंग भी हैं जो उनके निजी संघर्ष और भावनात्मक दुनिया की झलक देते हैं।दिसंबर 2024 में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने अपने पिता के साथ रिश्ते को लेकर खुलकर बात की थी।

बचपन में नाना खुद को अपने दोनों भाइयों से कमतर समझते थे। उन्हें लगता था कि वह दिखने में अपने भाइयों से कम अच्छे हैं। इसी वजह से उनके मन में धीरे-धीरे यह धारणा बनी कि शायद उनके पिता बाकी भाइयों को उनसे अधिक प्यार करते हैं।

लेकिन जिंदगी ने बाद में उन्हें इस सोच को अलग नजरिए से देखने का मौका दिया।

‘वाल्मीकि’ नाटक ने बदल दी पिता को लेकर बनी धारणा

बचपन में नाना गांव और आसपास होने वाले नाटकों में हिस्सा लेते थे। एक बार उन्होंने ‘वाल्मीकि’ नामक नाटक में अभिनय किया।इस नाटक को देखने के लिए उनके पिता मुंबई से गांव आए थे।नाना के लिए यह क्षण बेहद भावुक था। उन्हें महसूस हुआ कि उनके पिता को भी उनकी कला पर गर्व है। इस एक अनुभव ने उनके मन में पिता को लेकर वर्षों से बनी एक गलतफहमी को काफी हद तक बदल दिया।

बाद के वर्षों में पिता और बेटे का रिश्ता और गहरा होता गया।

पिता के आखिरी दिनों की याद नाना के साथ रही

नाना ने बताया था कि पिता के जीवन के अंतिम दिनों में दोनों के बीच बहुत गहरा रिश्ता बन गया था।उनके पिता कभी उनका हाथ पकड़कर कहते थे कि उन्हें हमेशा लगता रहा कि नाना के मन में यह बात रही होगी कि भाइयों को उनसे ज्यादा प्यार मिला।

नाना ने कहा था कि उन्हें पिता से कोई शिकायत नहीं थी। हालांकि, उनके मन में एक दर्द हमेशा रहा कि जब उनके पिता का निधन हुआ, तब वह उनके लिए बहुत कुछ नहीं कर सके। पिता का निधन कॉरपोरेशन के अस्पताल में हुआ था और उस समय इलाज की दवाइयों के लिए पैसों की जरूरत थी। नाना के दोस्तों ने तब उनकी आर्थिक मदद की थी।

शायद यही वजह थी कि बाद के जीवन में जरूरतमंदों की मदद करने को लेकर नाना का रवैया बेहद संवेदनशील रहा।

नाना पाटेकर की जिंदगी में संघर्ष से लेकर शिखर तक की पूरी कहानी

नाना पाटेकर की कहानी किसी सामान्य फिल्मी सितारे की कहानी नहीं रही। उन्होंने संघर्ष देखा, थिएटर किया, छोटे-बड़े किरदार निभाए और फिर ऐसे मुकाम तक पहुंचे जहां उनका नाम अभिनय की गंभीरता और दमदार प्रस्तुति का पर्याय बन गया।

उन्होंने अपनी पहचान किसी एक तरह की फिल्मों तक सीमित नहीं रखी। गंभीर सामाजिक विषयों वाली फिल्मों से लेकर एक्शन, ड्रामा, कॉमेडी और मुख्यधारा के मनोरंजन तक उन्होंने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

यही वजह रही कि उनके प्रशंसक केवल एक पीढ़ी तक सीमित नहीं रहे।

एक दौर के दर्शकों के लिए वह ‘क्रांतिवीर’ और ‘परिंदा’ के नाना थे। दूसरी पीढ़ी ने उन्हें ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में अलग अंदाज में देखा। वहीं नई पीढ़ी के दर्शकों तक उनका अभिनय ‘हाउसफुल 5’ जैसी फिल्मों के माध्यम से भी पहुंचा।

एक आवाज, कई किरदार और लाखों यादें

नाना पाटेकर की आवाज उनकी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा थी। संवाद बोलने का उनका तरीका इतना अलग था कि सामान्य वाक्य भी उनके मुंह से निकलकर यादगार लगने लगता था।

उनके अभिनय में नाटकीयता के बावजूद एक स्वाभाविकता रहती थी। वह किरदार को बड़ा बनाने के बजाय किरदार को वास्तविक बनाने पर जोर देते दिखाई देते थे।

यही कारण है कि उनके कई किरदारों को दर्शकों ने केवल पर्दे पर नहीं देखा, बल्कि उन्हें महसूस किया।

नाना के जाने से हिंदी और मराठी सिनेमा में गहरा खालीपन

नाना पाटेकर का निधन केवल एक अभिनेता के चले जाने की खबर नहीं है। यह उस पीढ़ी के एक महत्वपूर्ण कलाकार के विदा होने की खबर है जिसने अभिनय को सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति और सामाजिक टिप्पणी का माध्यम भी बनाया।

उन्होंने अपने करियर में ऐसे किरदार किए जिनमें समाज की बेचैनी, व्यवस्था पर सवाल, व्यक्तिगत संघर्ष और मानवीय संवेदनाएं दिखाई देती थीं।

उनकी फिल्मों को याद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर राहुल गांधी, मोहन भागवत, अक्षय कुमार, विराट कोहली, रजनीकांत, परेश रावल, मनोज बाजपेयी, कंगना रनोट, रवीना टंडन, सुनील शेट्टी, कमल हासन, अनुपम खेर, मिथुन चक्रवर्ती, राजपाल यादव, प्रकाश राज, हेमा मालिनी, सचिन तेंदुलकर, रितेश देशमुख, जूनियर NTR, नितिन गडकरी और शुभेंदु अधिकारी समेत अनेक लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

हर किसी की याद में नाना का अलग चेहरा सामने आया—किसी के लिए महान अभिनेता, किसी के लिए दोस्त, किसी के लिए मार्गदर्शक और किसी के लिए जरूरतमंदों की मदद करने वाला संवेदनशील इंसान।

पर्दा गिर गया, लेकिन नाना के किरदार रहेंगे

नाना पाटेकर का करीब पांच दशक लंबा सफर अब थम गया है। लेकिन उनके द्वारा निभाए गए किरदारों की जिंदगी अभी खत्म नहीं हुई।

‘परिंदा’ का तीखापन, ‘क्रांतिवीर’ का विद्रोह, ‘प्रहार’ की गंभीरता, ‘खामोशी’ की संवेदना, ‘तिरंगा’ की ऊर्जा, ‘अब तक छप्पन’ का पुलिसिया अंदाज, ‘नटसम्राट’ की भावनात्मक गहराई और ‘वेलकम’ का अलग रूप—इन सभी किरदारों में नाना की अलग-अलग छवियां दिखाई देती रहेंगी।

उनकी आवाज अब नई फिल्मों के सेट पर सुनाई नहीं देगी, लेकिन उनकी आवाज में बोले गए संवाद आने वाले वर्षों तक दर्शकों की यादों में गूंजते रहेंगे।

नाना पाटेकर का जीवन संघर्ष, कला, बेबाकी, संवेदना और अपने तरीके से जीने की कहानी रहा। एक ऐसा कलाकार, जिसने सफलता के बावजूद अपनी जड़ों से दूरी नहीं बनाई और जिसने पर्दे पर जितनी मजबूती से किरदार निभाए, निजी जिंदगी में भी कई लोगों के लिए मदद का हाथ बढ़ाया।

नाना पाटेकर का जाना भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति है। पांच दशक से अधिक लंबे सफर में उन्होंने ऐसे किरदार और संवाद दिए, जिन्हें दर्शक लंबे समय तक याद रखेंगे। उनके निधन पर देशभर से उमड़ी श्रद्धांजलियां बताती हैं कि नाना केवल पर्दे के अभिनेता नहीं थे, बल्कि अलग-अलग पीढ़ियों के दर्शकों के जीवन और यादों का हिस्सा बन चुके थे। उनका अभिनय, उनकी आवाज, उनकी बेबाकी और उनके यादगार किरदार आने वाले समय में भी भारतीय सिनेमा की विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बने रहेंगे।

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News-Desk

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