Neeraj Chopra: लखनऊ से जुड़ी यादें और ओलिंपिक गोल्ड से लेकर 90 मीटर जैवलिन थ्रो तक का सफर
ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट Neeraj Chopra का नाम जब भी लिया जाता है, एक नए जोश और प्रेरणा का एहसास होता है। Neeraj Chopra ने अपनी कड़ी मेहनत, लगन और प्रतिभा के दम पर न केवल भारत का नाम दुनिया भर में रोशन किया, बल्कि हर युवा एथलीट के लिए प्रेरणा भी बने। लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान Neeraj Chopraने अपने जीवन के कई खास लम्हों को साझा किया। उन्होंने लखनऊ की खासियतों, अपने ओलंपिक सफर, आने वाले प्लान्स और 90 मीटर जैवलिन थ्रो के लक्ष्य के बारे में विस्तार से बात की।
लखनऊ से जुड़ी खास यादें: पहला गोल्ड और लोगों का प्यार
Neeraj Chopra ने लखनऊ के साथ अपने खास संबंधों के बारे में बात करते हुए कहा, “लखनऊ में साल 2012 में मैंने अपना पहला जूनियर नेशनल गोल्ड मेडल जीता था। अंडर-16 नेशनल टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल जीतना मेरे लिए बहुत खास था। इस शहर से मुझे हमेशा बहुत प्यार मिला है। यहाँ की मेहमाननवाजी और लोगों का स्नेह मेरे दिल के करीब है।”
टोक्यो ओलंपिक के बाद भी नीरज लखनऊ आए थे और इस शहर के बारे में अपनी पसंद जाहिर करते हुए उन्होंने कहा, “लखनऊ में पहली बार घूमा हूँ, और यहाँ की पुरानी इमारतों को जिस तरह से संरक्षित किया गया है, वह बेहद अच्छा है। पालक पत्ता, चाट और खिचड़ी का स्वाद मुझे बेहद पसंद आया।”
प्रधानमंत्री के लिए मां का चूरमा
अपने सफर और लाइफस्टाइल के बारे में बात करते हुए नीरज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने खास लम्हों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया, “मैं प्रधानमंत्री के लिए मां के हाथों का बना चूरमा लेकर गया था। जब भी मैं घर जाता हूं, मेरे पांच से दस दोस्त इसे खाते हैं।” उन्होंने मजाक में कहा कि हाल ही में वजन बढ़ गया है क्योंकि ट्रेनिंग थोड़ी हल्की चल रही है, लेकिन अब डाइट पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। नीरज ने कहा, “मैंने लखनऊ में चाट खाई है, और इसके बाद 30-40 मिनट की एक्सरसाइज कर ली है।”
90 मीटर थ्रो की तैयारी और कंसिस्टेंसी पर जोर
नीरज चोपड़ा का लक्ष्य हमेशा से 90 मीटर जैवलिन थ्रो का रहा है। वह कई बार इस मैजिक मार्क के करीब पहुंचे हैं, लेकिन इसे हासिल करने के लिए कंसिस्टेंसी पर जोर देते हैं। उन्होंने कहा, “2018 से अब तक मैं कई बार 90 मीटर के करीब पहुंचा हूँ, लेकिन मेरे लिए कंसिस्टेंसी ज्यादा मायने रखती है। अगर आप मुझसे पूछें कि 90 मीटर मारना है या हर बार 88-89 मीटर का थ्रो करना है, तो मैं कंसिस्टेंसी को ही चुनूंगा।”
नीरज ने बताया कि 90 मीटर थ्रो एक “मैजिकल मार्क” है और इसे हासिल करने के लिए पूरी तरह से इंजरी फ्री होना जरूरी है। पेरिस ओलंपिक के बारे में बात करते हुए नीरज ने कहा कि उन्होंने टोक्यो ओलंपिक से भी बेहतर थ्रो किया है, लेकिन इंजरी की वजह से कुछ परेशानियाँ आईं, जिन पर अब काम कर रहे हैं।
मैच से पहले बजरंगबली और महादेव का आशीर्वाद
नीरज के अनुसार, हर मैच से पहले वह बजरंगबली और महादेव का आशीर्वाद जरूर लेते हैं। वह मानते हैं कि यह सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि ज्यादातर एथलीटों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है। नीरज ने कहा, “मुझे वॉलीबॉल बहुत पसंद है, और एथलेटिक्स में डिस्कस थ्रो मेरा फेवरेट है।”
उन्होंने जैवलिन थ्रो के दिग्गज खिलाड़ी जान ज़ेलेज़नी का जिक्र करते हुए कहा कि वह उन्हें लखनऊ लाने की कोशिश करेंगे ताकि यहाँ के युवाओं को उनसे सीखने का मौका मिले।
नई कोच की तलाश और भविष्य की योजनाएं
नीरज ने अपने कोच डॉ. क्लॉस बारटोनिएट्ज के बारे में बताया कि वह अब ट्रेनिंग छोड़कर अपने परिवार के साथ समय बिताना चाहते हैं। इसके चलते नीरज अब एक नए कोच की तलाश में हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में रहते हुए उन्हें काफी ट्रैवल करना पड़ता है, इसलिए वह ज्यादातर विदेश में रहकर ट्रेनिंग करना पसंद करते हैं। इससे उनके ट्रेनिंग और कंपटीशन के बीच बैलेंस बना रहता है।
भारतीय एथलीटों की बढ़ती मेंटलिटी और 2036 ओलिंपिक की तैयारी
नीरज चोपड़ा ने भारतीय एथलीटों की बढ़ती मानसिकता और उनके बेहतर प्रदर्शन के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, “पहले नेशनल में 75 मीटर का थ्रो गोल्ड लाने के लिए काफी होता था, लेकिन अब 80 मीटर के नीचे कुछ नहीं होता। भारत के टॉप एथलीट अब लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और मेडल भी ला रहे हैं।”
नीरज ने 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए भारत की तैयारियों के बारे में भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत में ओलंपिक की मेजबानी के लिए प्राइवेट कंपनियों को भी खेलों में निवेश करना चाहिए और क्लब्स बनाने चाहिए। इसके लिए अभी से तैयारी शुरू करनी होगी ताकि भारत इस आयोजन को सफलतापूर्वक आयोजित कर सके।

