उत्तर प्रदेश

Roorkee रेलवे स्टेशन पर हाई-वोल्टेज ड्रामा: पारस सोम का एक फोन बना गिरफ्तारी की वजह, मेरठ–हरिद्वार पुलिस की संयुक्त कार्रवाई

Paras Som arrest ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड Roorkee पुलिस के बीच एक हाई-स्पीड ऑपरेशन की पूरी कहानी सामने ला दी है। मेरठ के सरधना क्षेत्र में मां सुनीता की हत्या और बेटी रूबी के अपहरण के बाद फरार चल रहे पारस सोम की गिरफ्तारी किसी फिल्मी सीन से कम नहीं रही। एक साधारण-सी फोन कॉल ने पूरे ऑपरेशन की दिशा बदल दी और अपराधी पुलिस के जाल में फंस गया।


🔴 “मैं बाहर निकल रहा हूं…” बना सबसे बड़ा सुराग

Roorkee रेलवे स्टेशन पर खड़ा पारस सोम जैसे ही अपने दोस्त को फोन कर यह कहता है कि “मैं बाहर निकल रहा हूं”, उसी पल उसकी किस्मत पलट जाती है। पुलिस पहले से ही उसके मोबाइल को सर्विलांस पर रखे हुए थी।

इस एक वाक्य ने पुलिस को यह साफ संकेत दे दिया कि आरोपी किसी बड़े मूवमेंट की तैयारी में है। कॉल को सुनते ही मेरठ पुलिस हरकत में आई और सीधे हरिद्वार के एसएसपी को जानकारी दी गई।


🔴 रुड़की स्टेशन पर पुलिस की घेराबंदी

हरिद्वार पुलिस ने देर नहीं की। एसएसपी के आदेश पर एसपी देहात की टीम तुरंत रुड़की रेलवे स्टेशन पहुंची और पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई।

इससे पहले कि पारस सोम और रूबी किसी ट्रेन में सवार होकर फरार हो पाते, पुलिस टीम ने प्लेटफॉर्म से युवती को सुरक्षित निकाल लिया और पारस सोम को दबोच लिया।


🔴 सहारनपुर में दो दिन की फरारी

गिरफ्तारी से पहले Paras Som arrest की कहानी सहारनपुर से शुरू होती है। हत्या और अपहरण को अंजाम देने के बाद पारस सोम युवती को लेकर अपने एक रिश्तेदार के घर नागल गांव पहुंचा था।

वहां दोनों करीब दो दिन तक छिपे रहे। पुलिस को इनपुट मिला था कि शनिवार को वे दोनों किसी दूसरी जगह जाने की तैयारी में हैं, लेकिन उससे पहले ही वे रुड़की की ओर निकल गए।


🔴 रूबी सुरक्षित, आरोपी सलाखों के पीछे

रुड़की स्टेशन पर हुई कार्रवाई में युवती रूबी को सुरक्षित बरामद कर लिया गया, जबकि पारस सोम को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।

मेरठ से एसपी सिटी की टीम भी रात में रुड़की पहुंची और दोनों को कड़ी सुरक्षा में वापस मेरठ लाया गया।


🔴 सलावा चौकी पर शीर्ष अफसरों का डेरा

सरधना के कपसाड़ गांव में तनावपूर्ण हालात को देखते हुए एडीजी भानु भास्कर, डीआईजी कलानिधि नैथानी और एसएसपी सलावा चौकी पर डटे रहे।

पूरे दिन ये अधिकारी लखनऊ मुख्यालय को पल-पल की रिपोर्ट देते रहे और गांव में किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर सख्त रोक लगाई गई।


🔴 अन्य आरोपियों की भूमिका पर सवाल

हालांकि Paras Som arrest हो चुका है, लेकिन एफआईआर में नामजद सुनील राजपूत और दो अज्ञात युवकों की भूमिका अब भी स्पष्ट नहीं है।

पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही है कि हत्या और अपहरण की साजिश में शामिल बाकी लोगों को कैसे पकड़ा जाए। अभी तक उनके ठिकाने या गतिविधियों का कोई ठोस सुराग नहीं मिला है।


Paras Som arrest ने यह साबित कर दिया कि डिजिटल सर्विलांस आज अपराधियों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। एक मामूली फोन कॉल ने न केवल आरोपी को बेनकाब किया, बल्कि एक अपहृत बेटी को सुरक्षित उसके परिवार तक वापस पहुंचाने का रास्ता भी खोल दिया।

 

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