रामनगर: मनरेगा से लोनिवि द्वारा करवाए गए पटरियों के कार्य पर उठ रही उंगलियां
रामनगर ।लोक निर्माण विभाग द्वारा सड़क पटरी की झाड़ी झंखाडी हटाने, पटरी मरम्मत कराने व घास छीलवाने के नाम पर मनरेगा योजना के तहत काम दिखाकर लाखों का वारा न्यारा किया गया है।
अब जब सड़क की पटरियों पर मनरेगा के बोर्ड लग रहे हैं तो लोग बर्बस ही कह उठते है कि इस पर काम ही नहीं हुआ तो वह कैसा बोर्ड। रामनगर इलाके में ही नही पूरे जिले में लोनिवि द्वारा मनरेगा से पटरी मरम्मत का कार्य और घास छीलने का कार्य कराया जाना बताया जा रहा है लेकिन हकीकत इसके उलट है।
मनरेगा कार्य पर उठ रहे सवाल : तहसील रामनगर ही लें तो कई सड़कों पर तो पटरी मरम्मत की कौन कहे झाड़ी झंखाडी तक साफ नहीं की गई और वहां बोर्ड लगा दिया गया ।
तमाम सडकें ऐसी है जहां पर पांच पांच से लेकर छ छ लाख तक का खर्चा दिखाया गया है लेकिन धरातल पर हकीकत ठीक इसके विपरीत है. लोग अनुमान लगा रहे हैं कि किसी भी सड़क पर मजदूरों से काम कराने में वह भी वहां जहां घास छीलाई गई है
एक लाख के बीच में ही खर्च आया होगा लेकिन मिलीभगत से ज्यादा कार्य दिखाकर पैसा निकाल लेना भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना ही है ।ऐसा लोगों का मानना है कि इस विभाग द्वारा घास छिलाई और पटरी मरम्मत के नाम पर पूरे जिले में मनमानी की गई है जिसकी जांच हो।
जेई द्वारा अपने खास चहेते ठेकेदारों को काम देकर उनसे कमीशन खोरी की गई जिसके चलते अभी भी तमाम झाड़ियां लगी हुई है पटरी उबड़ खाबड़ हैं।
लगा बोर्ड तो लोग जाने: बुढ़वल मिल के सामने गन्ना दफ्तर के बगल से एक डामर रोड विछलखा होते हुए सीहामउ तक गई है। इस पर भी घास छीलाई का काम होना बताया गया है।
इस सड़क पर जाकर देखने से पता लगता है कि अभी भी तमाम झाड़ियां लगी हुई हैं और पटरिया उबड़ खाबड़ हैं। लोगों का मानना था कि दो चार मजदूर लगाकर केवल खानापूरी की गई और पैसा हड़प लिया गया ।
अब तो मांग उठने लगी है कि जो भी भारत सरकार की मनरेगा टीम आती है वह ब्लॉक के कार्य, सिंचाई विभाग के कार्य ही क्यों देखती है। उसे लोक निर्माण विभाग के कार्यो को भी देखना चाहिए। हकीकत सामने आएगी जब स्थलीय निरीक्षण किया जाए।

