चर्चित रिया हत्याकांड पर 12 जून को आएगा फैसला
मुजफ्फरनगर। अपने पिता को बचाने के लिए सीने पर बदमाशों की गोली खाकर जान गंवाने वाली रिया के मामले में एडीजे प्रथम की अदालत 12 जून को फैसला सुनाएगी। इस मामले में जांच के बाद सीबीआइ ने चार्जशीट न्यायालय में दाखिल कर दी थी। तब से ही हत्याकांड से जुड़े तीन आरोपितों में से दो सगे भाई जेल में हैं। राष्ट्रपति ने वर्ष 2015 में रिया को मरणोपरांत राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से नवाजा था।
2014 में राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा पाने वाले रिया हत्याकांड के मामले में अदालत ने सुनवाई पूरी कर फैसले की तिथि 12 जून मुकर्रर की है। अब से करीब पांच वर्ष पूर्व 10 मार्च 2014 में थाना भौराकलां क्षेत्र के गांव मुंडभर में विवाद के बाद सुबह के समय घर पर चढ़कर आए गांव के ही कुछ बदमाशों ने फायरिग की थी। इस दौरान घर से बाहर आई रिया ने देखा कि एक बदमाश ने उसके पिता को निशाना बनाते हुए फायर का इरादा किया, तो उसने अपने पिता को धक्का देकर उनकी जान बचाने के लिए बदमाश की गोली के आगे खुद आ गई थी। गोली रिया की छाती पर लगी थी। इस हमले में रिया की माता अनीता को भी गोली लगी थी। जिसके बाद दोनों को शामली अस्पताल ले जाया गया, जहां रिया को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया था, जबकि अनीता उपचार के बाद ठीक हुई। इस मामले में रिया के पिता सुरेश पाल की तहरीर पर गांव के ही रोहताश, सुनील तथा ललित पुत्रगण रामस्वरूप तथा एक पूर्व प्रधान को भी आरोपित बनाया गया था।
मुजफ्फरनगर दंगे का भी आरोपी है रोहतास
– रिया हत्याकांड को केंद्र सरकार की सिफारिश पर सीबीआई को ट्रांसफर किया गया था।
– घटना के बाद से रोहतास फरार चल रहा था। उस पर एक लाख रुपए का इनाम भी घोषित किया गया था।
– एसटीएफ डीएसपी राजकुमार मिश्र ने बताया, रोहतास साल 2013 में मुजफ्फरनगर में हुए दंगे में भी आरोपी था।
– उसपर दंगे भड़काने का केस दर्ज है।
– मुजफ्फरनगर पुलिस भी रोहतास की तलाश कर रही थी।
– यही नहीं, जानकारी ये भी है कि वह कुख्यात अपराधी विनोद बावला गैंग का सक्रिय सदस्य भी है।
सुप्रीम कोर्ट ने लिया था हत्याकांड का संज्ञान-घटना के डेढ़ माह के भीतर थाना भौराकलां पुलिस ने आरोपित ललित एवं सुनील को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, लेकिन पुलिस चार माह बाद भी आरोपित रोहताश तथा पूर्व प्रधान को गिरफ्तार नहीं कर पाई थी। जिसके बाद रिया के पिता सुरेश पाल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुरेश पाल ने बताया कि उनकी अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को तलब कर आरोपितों का रिकार्ड मांगा था।
सीबीआई ने पूरी की थी मामले की जांच-राज्य सरकार को तलब करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हत्याकांड की जांच सीबीआइ से कराने का आदेश जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 23 मई 2015 को सीबीआइ ने हत्याकांड की जांच शुरू की थी। हालांकि इससे पूर्व थाना भौराकलां पुलिस ललित व सुनील के विरुद्ध न्यायालय में चार्जशीट लगा चुकी थी। जांच पूरी कर सीबीआइ ने हत्याकांड में आरोपित पूर्व प्रधान को क्लीनचिट देते हुए तीसरे आरोपित रोहताश के विरुद्ध चार्जशीट लगा दी थी।
एसटीएफ ने दबोचा था इनामी रोहताश-रिया हत्याकांड में फरार चल रहे तीसरे आरोपित रोहताश की गिरफ्तारी पर पुलिस ने एक लाख रुपये का इनाम रखा था। रोहताश को जुलाई 2016 में एसटीएफ ने नोएडा से उस समय गिरफ्तार किया था, जब वह नोएडा में तैनात रिया के रिश्ते के चाचा पुलिसकर्मी चन्द्रपाल सिंह की हत्या के इरादे से कहीं जा रहा था।
बहस के बाद कोर्ट ने पूरी की सुनवाई-सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता जितेन्द्र त्यागी ने बताया कि मुकदमे की सुनवाई एडीजे प्रथम न्यायालय में हुई। उन्होंने बताया कि इस मामले में न्यायालय ने दो माह तक लगातार चली बहस के बाद तीन जून को सुनवाई पूरी कर ली। उन्होंने बताया कि रिया हत्याकांड से जुड़े मुकदमे में न्यायालय 12 जून को अपना फैसला सुनाएगा। हत्याकांड में नामजद तीन भाइयों में से सुनील हाईकोर्ट से जमानत पर है।
बाल वीरता पुरस्कार से नवाजी गई रिया-हत्या के बाद रिया को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने 2015 मरणोपरांत राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार देकर सम्मानित किया था। रिया को तत्कालीन मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश अखिलेश यादव ने भी 2015 में मरणोपरांत रानी लक्ष्मी बाई पुरस्कार से सम्मानित किया था। इसके अलावा भी रिया को कई पुरस्कार दिए गए।
