वैश्विक ऊर्जा और खाद्य संकट को दूर करने की तत्काल आवश्यकता है: S Jaishankar
S Jaishankar ने शुक्रवार को ताशकंद में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के एक सम्मेलन में कहा कि कोविड-19 महामारी और यूक्रेन संघर्ष से उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा और खाद्य संकट को दूर करने की तत्काल आवश्यकता है. चीनी विदेश मंत्री वांग यी, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव, पाकिस्तान के उनके समकक्ष बिलावल भुट्टो की मौजूदगी में जयशंकर ने यह भी कहा कि सभी तरह के आतंकवाद के प्रति कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति होनी चाहिए. जयशंकर ने परोक्ष रूप से पाकिस्तान के संदर्भ में यह टिप्पणी की.
आठ देशों के समूह की विदेश मंत्री स्तरीय बैठक में अपने संबोधन में S Jaishankar ने एससीओ के आर्थिक भविष्य के लिए चाबहार बंदरगाह की क्षमताओं को भी रेखांकित किया. जयशंकर ने एससीओ की बैठक में कहा कि वैश्विक ऊर्जा और खाद्य संकट का समाधान करने की तत्काल आवश्यकता है.
सम्मेलन में कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने भी भाग लिया. उन्होंने 15-16 सितंबर को समरकंद में आगामी एससीओ शिखर सम्मेलन की तैयारियों पर चर्चा की. शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और समूह के अन्य नेताओं के भाग लेने की उम्मीद है.
S Jaishankar ने ट्वीट किया, ‘ताशकंद में एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लिया. इस बात पर प्रकाश डाला कि कोविड महामारी और यूक्रेन संघर्ष से व्यवधानों के कारण दुनिया एक ऊर्जा और खाद्य संकट का सामना कर रही है. तत्काल इसका समाधान करने की आवश्यकता है.’ उन्होंने कहा कि आतंकवाद के सभी प्रारूपों के प्रति शून्य सहनशीलता जरूरी है.
एससीओ आठ सदस्यीय आर्थिक एवं सुरक्षा संगठन है, जिसे उत्तर एटलांटिक संधि संगठन (नाटो) का जवाब माना जाता है. हाल के वर्षों में यह एक प्रमुख अंतरक्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठन बनकर उभरा है. भारत और पाकिस्तान साल 2017 में इसके स्थाई सदस्य बने थे. रूस, चीन, किर्गिज गणराज्य, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपतियों ने 2001 में शंघाई में एक सम्मेलन के दौरान एससीओ की स्थापना की थी.

