Russia के हत्यारे ड्रोन में मिले पश्चिमी देशों के उपकरण, क्या यह रूस की बड़ी साजिश का हिस्सा है?
Russia और पश्चिमी देशों के बीच चल रहे तनावपूर्ण संबंधों में एक नया मोड़ आया है, जो एक बार फिर से वैश्विक राजनीति को गरमा सकता है। रूस, जो हमेशा से पश्चिमी देशों पर आरोप लगाता आया है कि वे यूक्रेन के खिलाफ संघर्ष को बढ़ावा दे रहे हैं, अब एक ऐसे तथ्य से घिरा है, जिसने उसकी साख पर सवाल खड़ा कर दिया है। यूक्रेन की खुफिया एजेंसी, GUR (यूक्रेनी रक्षा खुफिया निदेशालय) का दावा है कि पिछले महीने, एक रूसी ड्रोन, जिसे S-70 ओखोटनिक-बी (Hunter-B) के नाम से जाना जाता है, को गिराने के बाद उसमें कई ऐसे कम्पोनेंट्स पाए गए हैं, जो पश्चिमी देशों द्वारा बनाए गए थे। यह घटना रूस के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकती है, क्योंकि यही वह रूस है, जो पश्चिमी देशों को अपनी सैन्य ताकत को बढ़ाने का दोषी ठहराता आया है।
Russia के परमाणु युद्ध की धमकी के बीच खुलासा
Russiaने हमेशा से यह चेतावनी दी है कि अगर नाटो (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन) के सदस्य देश यूक्रेन को घातक हथियारों की आपूर्ति करते हैं और वह हथियार रूस के खिलाफ इस्तेमाल होते हैं, तो नाटो और रूस के बीच सीधा युद्ध शुरू हो सकता है, जिसका परिणाम परमाणु युद्ध के रूप में निकल सकता है। इस समय, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बार-बार पश्चिमी देशों से ऐसे कदम उठाने से बचने की अपील की है। लेकिन अब, जो नया तथ्य सामने आया है, वह रूस के विरोधाभासी रुख को उजागर करता है।
GUR का खुलासा: S-70 हंटर में पाए गए पश्चिमी उपकरण
यूक्रेनी रक्षा खुफिया निदेशालय (GUR) ने 6 नवंबर 2024 को टेलीग्राम पर एक पोस्ट करते हुए कहा कि उसने पिछले महीने जो रूसी ड्रोन गिराया था, उसमें कई पश्चिमी कंपनियों द्वारा बनाए गए कंपोनेंट्स पाए गए हैं। विशेष रूप से, इन कंपोनेंट्स में टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स (यूएसए), ज़ाइलिनक्स-एएमडी (यूएसए), इन्फिनियन टेक्नोलॉजीज (जर्मनी), एसटीमाइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स (स्विट्जरलैंड) जैसी कंपनियों के उत्पाद शामिल थे। GUR ने यह भी बताया कि ड्रोन के कई महत्वपूर्ण हिस्से इन कंपनियों द्वारा निर्मित किए गए थे, जिनमें माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स, ट्रांजिस्टर, पावर मॉड्यूल, आइसोलेटर और माइक्रोप्रोसेसर शामिल हैं।
क्या Russia पश्चिमी देशों के उपकरणों का इस्तेमाल कर रहा है?
यह खुलासा उस समय हुआ है जब रूस ने लगातार आरोप लगाया था कि पश्चिमी देशों के हथियारों की आपूर्ति और सैन्य सहायता से यूक्रेन को मजबूत किया जा रहा है। रूस का दावा है कि पश्चिमी देशों का यह कदम उसके खिलाफ एक साजिश का हिस्सा है, जिसे वह पूरी दुनिया में नकारात्मक प्रभाव फैलाने की कोशिश मानता है। अब, जब रूस के ड्रोन में पश्चिमी देशों के उत्पाद पाए गए हैं, तो यह सवाल उठता है कि क्या रूस ने अपनी सैन्य मशीनरी में पश्चिमी उपकरणों का इस्तेमाल किया है? यह घटना रूस के दावों पर पानी फेरने का काम कर सकती है और यह दिखा सकती है कि रूस भी पश्चिमी देशों की तकनीक का फायदा उठा रहा है, जबकि खुद को ‘विरोधी’ साबित करने के लिए हमेशा आलोचना करता रहा है।
S-70 ओखोटनिक-बी: रूस का अत्याधुनिक ड्रोन
रूसी S-70 ओखोटनिक-बी (Hunter-B) ड्रोन एक अत्याधुनिक तकनीक से लैस है, जो स्टेल्थ फीचर्स के साथ आता है। यह ड्रोन हवा से हवा और हवा से जमीन पर हमले करने के साथ-साथ टोही मिशनों के लिए भी सक्षम है। S-70 को इस प्रकार से डिज़ाइन किया गया है कि यह मानव रहित और मानव-संचालित दोनों प्रकार के विमानों के साथ मिलकर काम कर सकता है। इस ड्रोन का चौथा प्रोटोटाइप यूक्रेन के आसमान में गिरा था, और इसमें पाए गए उपकरणों से यह सिद्ध होता है कि रूस पश्चिमी तकनीक पर निर्भर है, जबकि वह हमेशा इसे ‘प्रतिबंध’ और ‘साजिश’ का हिस्सा बताता रहा है।
रूस की सैन्य मशीनरी में पश्चिमी तकनीक: एक बड़ा सवाल
यह खुलासा यूक्रेनी खुफिया एजेंसी GUR द्वारा की गई एक रिसर्च का हिस्सा था, जिसमें S-70 ड्रोन के विभिन्न कम्पोनेंट्स की सूची भी साझा की गई थी। GUR ने यह भी कहा कि उसने लगभग 150 पकड़े गए या बरामद किए गए रूसी हथियारों में 4,000 से अधिक विदेशी मशीनें पाई हैं। इनमें से अधिकांश उपकरण उन कंपनियों द्वारा बनाए गए थे, जो पश्चिमी देशों से जुड़ी हुई हैं। यह साफ तौर पर दर्शाता है कि रूस ने प्रतिबंधों के बावजूद पश्चिमी तकनीक का उपयोग किया है, और यह अंतर्राष्ट्रीय सैन्य प्रतिबंधों को दरकिनार करने का एक तरीका बन चुका है।
क्या रूस इस रहस्यमय संबंध का खुलासा करेगा?
अब, यह सवाल उठता है कि क्या रूस अपने इस रहस्यमय संबंध को सार्वजनिक करेगा? क्या पुतिन सरकार अपने सैन्य उपकरणों में पश्चिमी तकनीक का इस्तेमाल स्वीकार करेगी, या फिर वह इस मामले को दबाने की कोशिश करेगी? यह रूस के लिए एक बड़ा खतरा हो सकता है, क्योंकि यह उसके द्वारा किए गए दावों और उनकी नीतियों को बुरी तरह से चुनौती देता है। इस खुलासे के बाद, रूस को वैश्विक स्तर पर अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है। साथ ही, यह पश्चिमी देशों के लिए भी एक संदेश हो सकता है कि रूस अपनी सैन्य ताकत को बढ़ाने के लिए प्रतिबंधों की परवाह किए बिना पश्चिमी तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि युद्ध की दुनिया में कोई भी देश पूरी तरह से निष्कलंक नहीं है। रूस, जो हमेशा पश्चिमी देशों को हथियारों और सैन्य सहायता की आपूर्ति करने का दोषी ठहराता आया है, अब खुद उन ही उपकरणों का इस्तेमाल कर रहा है जिनका विरोध करता है। इस तरह के खुलासे से दुनिया भर में सैन्य रणनीतियों और अंतर्राष्ट्रीय रिश्तों पर गंभीर सवाल उठ सकते हैं। आने वाले समय में रूस और पश्चिमी देशों के रिश्तों में किस तरह के मोड़ आएंगे, यह देखना दिलचस्प होगा।

