Ukraine: जंग में चेहरा पहचानने की तकनीक का इस्तेमाल,मानवीय संकट के लिए पुतिन जिम्मेदार- UN
मारे गए रूसी सैनिकों की पहचान के लिए Ukraine टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहा है. न्यूज एजेंसी एएफपी के मुताबिक विशेषज्ञों ने गुरुवार को कहा कि यूक्रेन अपनी धरती पर मारे गए हमलावर रूसी सैनिकों की पहचान करने के लिए चेहरा पहचानने की तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है.
हालांकि ये थोड़ा जटिल जरूर है लेकिन इसे एक अभूतपूर्व अवसर के रूप में देखा जा रहा है. इस तकनीक के इस्तेमाल से मृतकों के परिवारों को ट्रैक करने और सूचित करने का प्रयास किया जा रहा है. Ukraine का कहना है कि इसका मकसद रूस के वॉर इनफॉर्मेशन फिल्टर में सुराग करना है.
चेहरा पहचानने की तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है Ukraine
अमेरिकी आधारित क्लियरव्यू एआई, जिसकी अक्सर गोपनीयता की वकालत करने वालों द्वारा आलोचना की जाती है, का कहना है कि इसने Ukraine अधिकारियों को अपनी सेवा तक मुफ्त पहुंच प्रदान की है, जो किसी की पहचान करने की कोशिश कर रहे यूजर्स द्वारा अपलोड की गई तस्वीरों के लिए इंटरनेट से छवियों से मेल खाती है.
फर्म के सह-संस्थापक और सीईओ होन टन-दैट ने एक बयान में कहा कि यूक्रेनी अधिकारियों ने क्लियरव्यू एआई तक पहुंच बनाने के लिए अपना उत्साह जताया है.
Ukraine के उपप्रधानमंत्री मायखाइलो फेडोरोव ने बुधवार को लिखा कि उनका देश आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस का उपयोग रूसी सैनिकों की मौत की सूचना प्रियजनों को देने के लिए सैनिकों के प्रोफाइल के लिए उनकी तस्वीरों का इस्तेमाल करके सामाजिक नेटवर्क खोजने के लिए कर रहा था.
24 फरवरी से रूस और Ukraine के बीच लगातार जारी है जंग
रूस और Ukraine के बीच 24 फरवरी से लगातार युद्ध जारी है. दोनों देशों के हजारों सैनिक मारे गए हैं. क्रेमलिन ने आधिकारिक रूप से अंतिम बार 500 सैनिकों के मारे जाने की बात कही थी लेकिन उसके बाद कोई अपडेट इसमें नहीं किया गया. वहीं नाटो के अधिकारियों ने कथित तौर पर मृत, घायल, लापता रूसी सैनिकों की 40,000 तक की संख्या का अनुमान लगाया है. स्थानीय रूसी मीडिया में सैनिकों की मौत और उनके अंतिम संस्कार की भी खबरें सामने आई हैं.
युद्ध में रूस की मदद की तो चीन को भुगतने होंगे गंभीर आर्थिक परिणाम– बाइडेन
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने अपने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग को स्पष्ट कर दिया है कि अगर चीन, रूस को सहायता प्रदान करता है तो उसके संभावित गंभीर आर्थिक परिणाम होंगे. चीन द्वारा रूस को सहायता प्रदान करने की संभावना पर जो बाइडेन ने कहा कि उन्होंने पिछले सप्ताह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ इस विषय पर “बहुत सीधी बातचीत” की थी. उन्होंने ब्रसेल्स में नाटो शिखर सम्मेलन और ग्रुप ऑफ सेवन मीटिंग बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन के दौरान यूक्रेन पर रूसी आक्रमण को लेकर यह टिप्पणी की.
उन्होंने कहा कि उन्होंने “कोई धमकी नहीं दी,” लेकिन यह स्पष्ट कर दिया कि शी “रूस की मदद करने के परिणामों को समझें.” उन्होंने कहा कि चीन ने पश्चिम के साथ मजबूत आर्थिक संबंध विकसित करने की मांग की थी. उन्होंने बताया कि उन्होंने शी से कहा था, “वह उन उद्देश्यों में खुद को बड़े खतरे में डाल देंगे, अगर वास्तव में उन्हें आगे बढ़ना था.” बिडेन ने कहा, “मुझे लगता है कि चीन समझता है कि उसका आर्थिक भविष्य रूस की तुलना में पश्चिम से कहीं अधिक निकटता से जुड़ा हुआ है. और, इसलिए मुझे उम्मीद है कि वह इस मामले में सम्मिलित नहीं होगा.”
रूस को जी-20 से बाहर करना चाहता हूं: बाइडेन
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि वह चाहते हैं कि रूस को जी (समूह)-20 से बाहर कर दिया जाए. बाइडन ने कहा कि उन्होंने गुरुवार को अन्य वैश्विक नेताओं के साथ मुद्दा उठाया है. उन्होंने कहा कि वह चाहेंगे कि समूह से रूस को बाहर किया जाए, अगर इससे इंडोनेशिया और अन्य असहमत होंगे तो वह कहेंगे कि यूक्रेन के नेताओं को बातचीत में शामिल होने की अनुमति दी जाए. जी-20, 19 देशों और यूरोपीय संघ का अंतर सरकारी मंच है, जो प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर काम करता है.
मानवीय संकट के लिए पुतिन जिम्मेदार
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भारी सहमति से एक प्रस्ताव पारित करके Ukraine में मानवीय संकट के लिए रूस को दोषी ठहराया है. प्रस्ताव में तुरंत संघर्ष विराम लागू करने और लाखों नागरिकों समेत घरों, स्कूलों और अस्पतालों की सुरक्षा करने की अपील की गई है.
गुरुवार को यह प्रस्ताव पांच के मुकाबले 140 मतों से पास हो गया. इस प्रस्ताव के विरोध में मतदान करने वाले पांच देशों में बेलारूस, सीरिया, उत्तर कोरिया और इरीट्रिया और रूस शामिल हैं. प्रस्ताव रूस की आक्रामकता के ‘गंभीर मानवीय परिणामों’ की निंदा करता है. प्रस्ताव मे कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने पिछले कई दशकों में इतना बड़ा मानवीय संकट यूरोप में नहीं देखा.
इसमें रूस की गोलाबारी, हवाई हमले और दक्षिणी शहर मारियुपोल सहित घनी आबादी वाले शहरों की ‘घेराबंदी’ की निंदा की गई है. प्रस्ताव में मानवीय सहायता के लिए निर्बाध पहुंच की मांग की गई है. मतदान गत दो मार्च को लाए गए प्रस्ताव पर हुए मतदान की तरह था. वह प्रस्ताव भी पांच के मुकाबले 141 देशों के समर्थन से पास हो गया था और 35 देशों ने मतदान में भाग नहीं लिया था.
रूस ने खारिज किया प्रस्ताव
रूस ने इस प्रस्ताव को रूस विरोधी बताकर खारिज कर दिया है. रूस ने कहा कि प्रस्ताव का समर्थन करने वाले देश मानवीय स्थिति को लेकर चिंतित नहीं हैं, बल्कि वह सहायता का भी राजनीतिकरण करना चाहते हैं. इसके पहले एक रूसी प्रस्ताव पर मतदान के दौरान मास्को को हार का समाना करना पड़ा था. रूसी प्रस्ताव को स्वीकार किये जाने के लिए 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में से कम से कम नौ मत चाहिए थे और स्थायी सदस्यों में से किसी की तरफ से वीटो नहीं होना चाहिए.
चीन समेत 13 देश रहे अनुपस्थित
स्थायी सदस्यों में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन और रूस शामिल हैं. लेकिन रूस को केवल एक मत चीन का मिला जबकि 13 अन्य सदस्य देश अनुपस्थित रहे. ब्रिटेन की संयुक्त राष्ट्र में राजदूत बारबरा वुडवर्ड ने रूसी प्रस्ताव को ‘सनकी प्रयास’ बताया जो संकट का दोहन करने के लिए है.
लेकिन रूसी राजदूत वासिली नेबेंजिया ने कहा कि रूसी प्रस्ताव अन्य देशों के मानवीय प्रस्ताव की तरह राजनीतिक नहीं है. अमेरिकी राजदूत लिंडा थॉमस ग्रीनफील्ड ने कहा कि रूस परिषद का इस्तेमाल करके अपनी क्रूरता पर पर्दा डालने का प्रयास कर रहा है.








