लखीमपुर खीरी में Shankaracharya Avimukteshwaranand का बड़ा बयान: गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग दोहराई, सरकार पर साधा निशाना
News-Desk
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कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग मौजूद रहे। शंकराचार्य ने अपने संबोधन में गोसंरक्षण, धार्मिक परंपराओं और जनभागीदारी से जुड़े कई विषयों पर विस्तार से विचार रखे।
गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने के अभियान का किया उल्लेख
अपने संबोधन में शंकराचार्य ने बताया कि वह गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित कराने की मांग को लेकर लगातार जनजागरण अभियान चला रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस अभियान की शुरुआत 3 मई को गोरखपुर से हुई थी और अब तक वह उत्तर प्रदेश के लगभग 300 विधानसभा क्षेत्रों से होकर लोगों के बीच पहुंच चुके हैं। उनके अनुसार अभियान का उद्देश्य गोसंरक्षण के मुद्दे को व्यापक स्तर पर जनचर्चा का विषय बनाना है।
सरकार पर लगाए चुनावी वादे पूरे न करने के आरोप
कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य ने प्रदेश सरकार पर चुनाव पूर्व किए गए वादों को पूरा न करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि गोसंरक्षण और गोमाता से जुड़े विषयों पर अपेक्षित निर्णय अभी तक नहीं लिए गए हैं। उन्होंने अपने संबोधन में सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इन मुद्दों पर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
यह उनके सार्वजनिक संबोधन का हिस्सा था।
महाराष्ट्र का उदाहरण देकर रखी अपनी बात
शंकराचार्य ने अपने संबोधन में महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की सरकार द्वारा गाय से जुड़े कुछ निर्णय लिए गए हैं।
उन्होंने प्रश्न उठाया कि यदि अन्य राज्य इस दिशा में कदम उठा सकते हैं तो उत्तर प्रदेश में भी इस विषय पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने इस संदर्भ में राज्य सरकार से आवश्यक पहल करने की अपील की।
जनता से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी की अपील
कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य ने उपस्थित लोगों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी की भी अपील की।
उन्होंने कहा कि मतदाताओं को अपने मतदान का निर्णय उन मुद्दों को ध्यान में रखकर लेना चाहिए जिन्हें वे महत्वपूर्ण मानते हैं। इसी क्रम में उन्होंने गोसंरक्षण से जुड़े अपने अभियान के समर्थन में उपस्थित लोगों को एक संकल्प भी दिलाया।
धार्मिक और सामाजिक विषयों पर रहा जोर
संबोधन के दौरान उन्होंने गोसंरक्षण को धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण विषय बताया।
उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में गौसेवा और गोसंरक्षण का विशेष स्थान रहा है तथा इस विषय पर समाज के विभिन्न वर्गों के बीच जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
अभियान के अगले चरण पर भी चर्चा
शंकराचार्य ने बताया कि उनका जनसंपर्क अभियान आगे भी जारी रहेगा और वह विभिन्न जिलों तथा विधानसभा क्षेत्रों में जाकर लोगों से संवाद करेंगे।
उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य केवल धार्मिक संदेश देना नहीं, बल्कि गोसंरक्षण से जुड़े विषयों पर व्यापक जनसमर्थन तैयार करना भी है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर रहेगी नजर
शंकराचार्य के बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं आने की संभावना है। फिलहाल कार्यक्रम में दिए गए उनके वक्तव्य सार्वजनिक मंच पर व्यक्त किए गए विचार हैं। इस संबंध में राज्य सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

