Muzaffarnagar में सात दिवसीय ‘सृजन’ लोक चित्रकला कार्यशाला का शुभारंभ, विद्यार्थी सीखेंगे भारतीय लोक कला की बारीकियां
News-Desk
| 5 min read
Folk Art, Muzaffarnagar News, उत्तर प्रदेश, कला कार्यशाला, छात्र-छात्राएं, जिला शैक्षणिक संग्रहालय, मुजफ्फरनगर, लोक चित्रकला, संस्कृति विभाग, सृजन कार्यशालाMuzaffarnagar News: जनपद के उभरते कलाकारों और छात्र-छात्राओं को भारतीय लोक कला एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के उद्देश्य से सोमवार को जिला शैक्षणिक संग्रहालय, मुजफ्फरनगर में सात दिवसीय ‘सृजन’ लोक चित्रकला कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। इस कार्यशाला का आयोजन उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान, लखनऊ (संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश) तथा जिला शैक्षणिक संग्रहालय, मुजफ्फरनगर के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।
कार्यक्रम का शुभारंभ जिला विद्यालय निरीक्षक हरिकेश यादव और पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य सुभाषचंद ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उद्घाटन समारोह में शिक्षकों, कला प्रेमियों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की उपस्थिति रही।
20 से 26 जुलाई तक चलेगी कार्यशाला
यह सात दिवसीय कार्यशाला 20 जुलाई से 26 जुलाई 2026 तक आयोजित की जाएगी। इसमें जनपद के विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राएं भाग लेकर भारतीय लोक चित्रकला की विभिन्न पारंपरिक शैलियों का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।
कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच विकसित करना, उनकी कलात्मक प्रतिभा को निखारना तथा उन्हें भारतीय लोक कला और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है। आयोजकों का मानना है कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
‘कला तनाव दूर करने का सबसे प्रभावी माध्यम’ – हरिकेश यादव
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक हरिकेश यादव ने कहा कि आज की तेज़ रफ्तार और तनावपूर्ण जीवनशैली में कला मानसिक शांति प्रदान करने का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम है।
उन्होंने कहा कि कला केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास का भी महत्वपूर्ण आधार है। ऐसी कार्यशालाएं विद्यार्थियों की रचनात्मक क्षमता को नई दिशा देती हैं और उनके सर्वांगीण विकास में अहम भूमिका निभाती हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से पूरे मनोयोग के साथ प्रशिक्षण लेने और इस अवसर का भरपूर लाभ उठाने का आह्वान किया।
प्रतिभाओं को मिलेगा अपनी कला दिखाने का मंच
पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य सुभाषचंद ने कहा कि जिला शैक्षणिक संग्रहालय लंबे समय से सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन करता आ रहा है।
उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रमों का दायरा बढ़ाया जाएगा, ताकि जनपद के प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं और कलाकारों को अपनी कला प्रस्तुत करने के अधिक अवसर मिल सकें।
भारतीय लोक कला हमारी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा
जिला शैक्षणिक संग्रहालय की प्रभारी ममता रानी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत विविध लोक कलाओं और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का देश है। ग्रामीण परिवेश में विकसित हुई लोक चित्रकलाएं हमारी सांस्कृतिक पहचान और विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
उन्होंने बताया कि सात दिनों के प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को विभिन्न लोक चित्रकला शैलियों से परिचित कराया जाएगा, जिससे वे अपनी संस्कृति को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे और उसे आगे बढ़ाने में योगदान दे सकेंगे।
कला शिक्षा से विकसित होती है संवेदनशीलता और रचनात्मकता
कार्यक्रम में जिला पुस्तकालय प्रभारी डॉ. रणवीर सिंह तथा डॉ. राजीव कुमार ने भी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।
उन्होंने कहा कि कला शिक्षा विद्यार्थियों में संवेदनशीलता, सकारात्मक सोच और सृजनात्मकता का विकास करती है। ऐसे कार्यक्रम न केवल कलात्मक कौशल को बढ़ाते हैं, बल्कि विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति क्षमता को भी मजबूत बनाते हैं।
प्रसिद्ध चित्रकार प्रवीण कुमार सैनी देंगे प्रशिक्षण
कार्यशाला में डीएवी इंटर कॉलेज के प्रवक्ता एवं प्रसिद्ध चित्रकार प्रवीण कुमार सैनी विद्यार्थियों को लोक चित्रकला की विभिन्न विधाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण देंगे।
कला के क्षेत्र में लंबे अनुभव रखने वाले प्रवीण कुमार सैनी प्रतिभागियों को पारंपरिक लोक चित्रकला की तकनीकों, रंग संयोजन, रेखांकन और विभिन्न शैलियों की बारीकियों से परिचित कराएंगे। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को व्यवहारिक अभ्यास के साथ लोक कला के सांस्कृतिक महत्व की भी जानकारी दी जाएगी।
नई पीढ़ी को लोक परंपराओं से जोड़ने की पहल
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जिले में कला एवं संस्कृति के संरक्षण को बढ़ावा देना और नई पीढ़ी को भारतीय लोक परंपराओं से जोड़ना है। आयोजकों का मानना है कि यदि विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर पर ही भारतीय लोक कलाओं से परिचित कराया जाए, तो वे न केवल अपनी सांस्कृतिक धरोहर को समझ पाएंगे बल्कि भविष्य में उसके संरक्षण और संवर्धन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे।
बड़ी संख्या में शिक्षक और विद्यार्थी रहे उपस्थित
कार्यक्रम में अनिल कुमार, पूनम रानी, डॉ. रणवीर सिंह, डॉ. राजीव कुमार, पुनीत राठी, सागर कल्याण, प्रशांत सहित अनेक शिक्षक, कला प्रेमी और बड़ी संख्या में प्रशिक्षु विद्यार्थी उपस्थित रहे।
सभी ने कार्यशाला की सफलता की कामना करते हुए इसे जिले में कला और संस्कृति को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

