Sudan त्रासदी: टाइल फैक्ट्री में एलपीजी टैंकर धमाका, 23 की मौत – 18 भारतीय शामिल, 130 से अधिक घायल🔥
Sudan की राजधानी खारतोम के बाहरी इलाके में मंगलवार को हुए एक भयावह हादसे ने पूरे भारत समेत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनसनी मचा दी। ‘सालूमी टाइल फैक्ट्री’ में एलपीजी टैंकर विस्फोट ने 23 लोगों की जान ले ली, जिनमें 18 भारतीय नागरिक शामिल हैं। इस हादसे में 130 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। फैक्ट्री में 50 से अधिक भारतीय मजदूर काम करते थे, जिनमें से कई अपनी मेहनत की कमाई से घर परिवार का गुजारा कर रहे थे।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर का बयान
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ट्विटर पर इस घटना की पुष्टि करते हुए लिखा कि उन्हें यह खबर बताते हुए गहरा दुख हो रहा है। उन्होंने कहा – “हमें यह बताते हुए खेद है कि सूडान के खारतोम में एक फैक्ट्री में बड़ा धमाका हुआ है। इसमें कई भारतीय श्रमिकों की मौत हुई है और कई गंभीर रूप से घायल हैं।”
भारतीय दूतावास भी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर रहा है।
हादसे की भयावह तस्वीरें
प्रारंभिक रिपोर्ट्स बताती हैं कि फैक्ट्री परिसर में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था। अत्यधिक मात्रा में ज्वलनशील पदार्थ गलत तरीके से रखे गए थे। एक टैंकर में गैस लीक होने के बाद अचानक हुए विस्फोट ने पूरे परिसर को आग के गोले में बदल दिया।
गवाहों के मुताबिक, कुछ ही सेकंड में फैक्ट्री धधक उठी और श्रमिक जान बचाने के लिए चीखते-चिल्लाते इधर-उधर भागने लगे। धुआं और आग की लपटें आसमान तक पहुंच गईं, जिससे पास-पड़ोस में भी अफरातफरी मच गई।
भारतीय समुदाय में मातम
इस हादसे में 18 भारतीयों की मौत की पुष्टि के बाद प्रवासी भारतीय समुदाय में गहरा शोक है। खारतोम और आस-पास के इलाकों में रहने वाले भारतीय नागरिक अस्पतालों में जाकर मदद कर रहे हैं। कई घायलों को तुरंत चिकित्सा सहायता नहीं मिल पाई, क्योंकि अस्पतालों में अचानक से मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी।
भारत सरकार ने अपने नागरिकों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।
फैक्ट्रियों में सुरक्षा की अनदेखी – एक बड़ा सवाल
यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों की खुली अनदेखी का परिणाम है। खाड़ी देशों, अफ्रीका और एशिया के कई हिस्सों में काम करने वाले मजदूर अक्सर बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के काम करते हैं।
सूडान की फैक्ट्री में भी न तो दमकल यंत्र पर्याप्त संख्या में थे और न ही गैस लीकेज रोकने के लिए कोई आधुनिक तकनीक इस्तेमाल की जा रही थी। कई मजदूरों ने आरोप लगाया है कि फैक्ट्री प्रबंधन ने सुरक्षा नियमों की ओर कभी ध्यान नहीं दिया।
भारत सरकार की भूमिका
विदेश मंत्रालय ने कहा है कि घायल भारतीयों को हर संभव चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। भारत सरकार सूडान प्रशासन से लगातार संपर्क में है ताकि मृतकों के पार्थिव शरीर जल्द से जल्द भारत लाए जा सकें।
जयशंकर ने कहा कि यह समय बहुत कठिन है और भारत सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है।
ऐसे हादसे पहले भी झकझोर चुके हैं
सिर्फ सूडान ही नहीं, दुनिया भर में कारखानों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी से समय-समय पर ऐसे हादसे सामने आते रहते हैं।
2013 में बांग्लादेश की राना प्लाज़ा फैक्ट्री हादसे में 1,100 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।
भारत में भी 2020 में विशाखापट्टनम के एलजी पॉलिमर्स गैस लीक हादसे ने कई लोगों की जान ली थी।
2021 में पाकिस्तान के लाहौर में एक फैक्ट्री में आग लगने से 52 मजदूरों की मौत हुई थी।
यह घटनाएं बताती हैं कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी मजदूरों की जिंदगी के साथ एक खतरनाक खिलवाड़ है।
परिवारों पर टूटा दुख का पहाड़
भारत के कई राज्यों – बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और तमिलनाडु के मजदूर इस फैक्ट्री में काम कर रहे थे। उनके परिजनों को जब यह खबर मिली तो गांवों और कस्बों में मातम छा गया। कई परिवार अपने इकलौते कमाने वाले सदस्य को खोकर बेसहारा हो गए हैं।
गांवों में गमगीन माहौल है और हर कोई यही सवाल पूछ रहा है – आखिर कब तक भारतीय मजदूर ऐसे हादसों में अपनी जान गंवाते रहेंगे?
सरकार के लिए चुनौती
भारत सरकार के सामने अब यह बड़ी चुनौती है कि भविष्य में विदेशों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। न केवल सूडान, बल्कि खाड़ी देशों और अफ्रीका के कई देशों में हजारों भारतीय मजदूर काम करते हैं।
उनके जीवन की सुरक्षा, बीमा, और उचित कार्य वातावरण अब एक गंभीर मुद्दा बन चुका है।

