Supreme Court:शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने के आरोपी व्यक्ति को अग्रिम जमानत
Supreme Court ने शादी का झांसा देकर एक महिला से शारीरिक संबंध बनाने के आरोपी व्यक्ति को अग्रिम जमानत दे दी है. इस मामले में आरोपी की ओर से पेश वकील नमित सक्सेना ने दलील दी कि अगर पुरुष साथी प्रेम संबंध खत्म करने का विकल्प चुनता है तो रिश्ते में जोड़े के बीच बना शारीरिक संबंध बलात्कार की श्रेणी में नहीं आएगा.
Supreme Court जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस एमएम सुंदरेश की बेंच ने एफआईआर में गवाह द्वारा किए गए दावों पर गौर किया. बेंच ने कहा, ‘विचार करने पर हम अपीलकर्ता को अग्रिम जमानत की राहत इस निर्देश के साथ देने के इच्छुक हैं कि अपीलकर्ता को गिरफ्तार किए जाने की स्थिति में निचली अदालत द्वारा निर्धारित नियमों और शर्तों पर जमानत पर रिहा किया जाएगा.’
Supreme Court बेंच ने कहा, ‘इसके अलावा, अपीलकर्ता दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 438 (2) के आदेश का पालन करेगा.’शीर्ष अदालत ने यह भी साफ किया कि अपीलकर्ता को अग्रिम जमानत देने को मामले के गुण-दोष पर राय की अभिव्यक्ति के रूप में नहीं माना जाएगा.

