आगरा कोर्ट

उत्तर प्रदेश

Agra- 27 साल बाद आया ‘सुअर चोरी’ केस का फैसला! गवाह अदालत से गायब, पुलिसकर्मी भी नहीं पहुंचे; साक्ष्य नहीं मिले तो आरोपी किशन बरी

Agra के 1998 के सुअर चोरी मामले में 27 साल बाद अदालत का फैसला आया और थाना सदर क्षेत्र के गुम्मट रोड निवासी आरोपी किशन को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया। प्राथमिकी के अनुसार, 2 मई 1998 को ईदगाह के कुतलूपुर निवासी चंद्रमोहन ने आरोप लगाया था कि ऑटो से आए तीन युवकों ने उनका सुअर चोरी कर लिया। मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी, लेकिन सुनवाई के दौरान वादी, चश्मदीद गवाह, विवेचक और अन्य पुलिसकर्मी अदालत में गवाही के लिए पेश नहीं हुए। एक गवाह अदालत पहुंचा, लेकिन वह अपने बयान से मुकर गया। ऐसे में अभियोजन पक्ष आरोपों को पर्याप्त साक्ष्यों के साथ साबित नहीं कर सका। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आतिफ सिद्दीकी की अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी किशन को बरी कर दिया। यह मामला एक बार फिर रेखांकित करता है कि आपराधिक मुकदमे में केवल आरोप या प्राथमिकी पर्याप्त नहीं होती; अदालत में विश्वसनीय गवाही और कानूनी रूप से स्वीकार्य साक्ष्य के आधार पर ही दोष सिद्ध किया जा सकता है।

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उत्तर प्रदेश

Dayalbagh शोध छात्रा हत्याकांड में अंतिम बहस शुरू: 12 साल पुराने चर्चित केस में अदालत में तेज हुई सुनवाई

Dayalbagh Research Scholar Murder Case में न्यायालय के समक्ष अंतिम बहस शुरू हो चुकी है। यह मामला अभी विचाराधीन है और अदालत द्वारा अंतिम निर्णय सुनाया जाना शेष है। न्यायिक प्रक्रिया के तहत सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जा रहा है। अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहियों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद ही दिया जाएगा।

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