Dayalbagh शोध छात्रा हत्याकांड में अंतिम बहस शुरू: 12 साल पुराने चर्चित केस में अदालत में तेज हुई सुनवाई
Dayalbagh Research Scholar Murder Case से जुड़े बहुचर्चित मामले में आगरा की अदालत में न्यायिक प्रक्रिया अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। वर्ष 2013 में दयालबाग शैक्षिक संस्थान (डीईआई) की नैनो बायोटेक्नोलॉजी लैब में हुई शोध छात्रा की हत्या के मामले में मंगलवार से अंतिम बहस (Final Arguments) की शुरुआत हो गई। मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम पुष्कर उपाध्याय की अदालत में चल रही है, जहां अभियोजन एवं वादी पक्ष ने अपने अंतिम तर्क अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए।
करीब एक दशक से अधिक समय से चल रहे इस मामले में अब दोनों पक्षों की अंतिम दलीलों के बाद अदालत का निर्णय आने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। मामले की अगली सुनवाई बुधवार, 16 जुलाई को निर्धारित की गई है।
2013 में नैनो बायोटेक्नोलॉजी लैब में हुई थी वारदात
यह मामला 15 मार्च 2013 का है, जब आगरा स्थित दयालबाग शैक्षिक संस्थान (Dayalbagh Educational Institute – DEI) की नैनो बायोटेक्नोलॉजी लैब में एक शोध छात्रा मृत अवस्था में मिली थी।
जांच एजेंसियों के अनुसार, घटना के संबंध में दुष्कर्म के बाद हत्या किए जाने का मामला दर्ज किया गया था। इस घटना ने न केवल शैक्षणिक जगत बल्कि पूरे प्रदेश में व्यापक चर्चा को जन्म दिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की थी।
प्रारंभिक जांच में दो लोगों की हुई थी गिरफ्तारी
घटना के बाद प्रारंभिक पुलिस जांच में उदय स्वरूप और लैब टेक्नीशियन यशवीर संधू को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
हालांकि, बाद में मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई। सीबीआई ने अपनी स्वतंत्र विवेचना के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के आधार पर केवल उदय स्वरूप को आरोपी बनाया। यह मामला उसी आरोपपत्र के आधार पर अदालत में विचाराधीन है।
चार दर्जन से अधिक गवाहों के बयान हो चुके हैं दर्ज
इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने चार दर्जन से अधिक गवाहों के बयान अदालत में दर्ज कराए।
इन गवाहों में जांच अधिकारी, फोरेंसिक विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, चिकित्सक तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों की गवाही शामिल रही। अभियोजन पक्ष का उद्देश्य उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के माध्यम से अपने मामले को न्यायालय के समक्ष स्थापित करना रहा।
दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने भी अपने पक्ष में पांच गवाह पेश किए।
विदेशी फोरेंसिक विशेषज्ञ की भी हुई गवाही
बचाव पक्ष की ओर से जिन पांच गवाहों को प्रस्तुत किया गया, उनमें लंदन (इंग्लैंड) निवासी फोरेंसिक डीएनए विशेषज्ञ डॉ. एंडेरी सेमिकोस्की भी शामिल रहे।
उनकी गवाही मामले के वैज्ञानिक और फोरेंसिक पहलुओं से संबंधित रही। इसके बाद वादी पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक ने सभी बचाव गवाहों से विस्तृत जिरह भी की।
फोरेंसिक साक्ष्यों को इस मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मुकदमे के दौरान वैज्ञानिक रिपोर्टों और डीएनए विश्लेषण पर भी विस्तृत बहस हुई है।
अदालत में अभियोजन पक्ष ने रखीं अंतिम दलीलें
मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान अभियोजन एवं वादी पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक एवं पूर्व डीजीसी ने अदालत में अंतिम बहस की शुरुआत की।
उन्होंने न्यायालय के समक्ष उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और जांच से जुड़े विभिन्न तथ्यों के आधार पर अपने तर्क प्रस्तुत किए। अंतिम बहस के दौरान मामले के विभिन्न कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
अब बचाव पक्ष रखेगा अपना पक्ष
वादी पक्ष की अंतिम बहस पूरी होने के बाद अगला चरण बचाव पक्ष का होगा।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता अदालत के समक्ष अपने अंतिम तर्क प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद न्यायालय उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहियों, फोरेंसिक रिपोर्टों और दोनों पक्षों की अंतिम दलीलों पर विचार करेगा।
न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत उचित समय पर अपना निर्णय सुरक्षित रख सकती है अथवा आदेश सुना सकती है।
सुनवाई के दौरान अदालत में रहे दोनों पक्ष मौजूद
मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान वादी पक्ष के प्रतिनिधियों के साथ-साथ आरोपी उदय स्वरूप और यशवीर संधू भी अदालत में मौजूद रहे।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए न्यायालय में सुनवाई निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ाई गई।
क्यों चर्चा में रहा यह मामला?
दयालबाग शैक्षिक संस्थान में शोध कार्य के दौरान हुई इस घटना ने वर्ष 2013 में व्यापक जनचर्चा का विषय बनाया था। शैक्षणिक संस्थान के भीतर हुई इस गंभीर घटना के बाद जांच की दिशा, फोरेंसिक साक्ष्य, विभिन्न एजेंसियों की भूमिका और न्यायिक प्रक्रिया लगातार चर्चा में रही।
बाद में जांच सीबीआई को सौंपे जाने और विस्तृत वैज्ञानिक जांच के चलते यह मामला लंबे समय तक न्यायालय में विचाराधीन रहा।
अगली सुनवाई 16 जुलाई को
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई निर्धारित की है। इस दौरान वादी पक्ष की बहस आगे बढ़ सकती है अथवा प्रक्रिया के अनुसार बचाव पक्ष अपनी अंतिम दलीलें शुरू कर सकता है।
मामले की आगे की सुनवाई न्यायालय की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगी।

