छात्र आंदोलन

उत्तर प्रदेश

Aligarh में विधि छात्र सचिन की मौत पर उबाल, कैंडल मार्च से पहले छात्र हिरासत में; पुलिस से नोकझोंक, कुलपति के इस्तीफे और 1 करोड़ मुआवजे की मांग

Aligarh में विधि छात्र सचिन कुमार की मौत को लेकर छात्रों का आक्रोश लगातार सामने आ रहा है। शनिवार शाम प्रस्तावित कैंडल मार्च से पहले पुलिस ने छात्र लोकेश तिवारी को हिरासत में लिया, जिसके बाद छात्रों और पुलिस के बीच नोकझोंक हुई। छात्र आरएमपीयू विश्वविद्यालय प्रशासन पर प्रोन्नति से जुड़े मामले में समय पर निर्णय नहीं लेने का आरोप लगाते हुए कुलपति के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, जबकि विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रबुद्ध सिंह ने आरोपों को निराधार बताया है और सचिन के पिता के वीडियो बयान का हवाला दिया है।

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उत्तर प्रदेश

UGC Equity Regulations 2026 पर यूपी में सियासी घमासान! प्रमोद त्यागी बोले- सवर्ण नाराजगी बनी तो बदल सकता है चुनावी गणित, सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद सरकार के सामने बड़ी चुनौती

UGC Equity Regulations 2026 को लेकर उत्तर प्रदेश में राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत जरूर हैं, लेकिन फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि यही मुद्दा आगामी चुनाव का निर्णायक मुद्दा बन जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में नियमों को फिलहाल रोकते हुए 2012 के नियमों को आगे के आदेश तक जारी रखने का निर्देश दिया था और कुछ प्रावधानों की अस्पष्टता तथा संभावित दुरुपयोग को लेकर सवाल उठाए थे। अगस्त में केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि वह 2026 के नियमों पर पुनर्विचार कर रही है। ऐसे में आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार और UGC किस तरह संशोधित व्यवस्था तैयार करते हैं और सुप्रीम कोर्ट उस पर क्या रुख अपनाता है। सामान्य वर्ग की चिंताओं के साथ-साथ सामाजिक रूप से वंचित छात्रों की सुरक्षा को भी ध्यान में रखते हुए स्पष्ट, निष्पक्ष और संतुलित व्यवस्था बनाना इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण समाधान हो सकता है।

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वैश्विक

‘मुझे वापस लाने की जरूरत नहीं, खुद लौटूंगी’: Sheikh Hasina का बड़ा ऐलान, दिसंबर में बांग्लादेश जाकर कोर्ट में करेंगी सरेंडर!

Sheikh Hasina ने दिसंबर में भारत से अपने देश लौटने और अदालत के सामने आत्मसमर्पण करने की घोषणा कर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। उन्होंने दावा किया है कि उनके साथ अवामी लीग के कई वरिष्ठ नेता भी वापस लौटेंगे। 2024 के सरकार विरोधी आंदोलन के बाद भारत आईं हसीना को छात्र आंदोलन पर कार्रवाई से जुड़े मामले में अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई गई थी, जबकि वह आरोपों से इनकार करती रही हैं। बांग्लादेश सरकार प्रत्यर्पण के प्रयास जारी रखने की बात कह रही है, लेकिन हसीना का कहना है— ‘मुझे वापस लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, मैं खुद लौटूंगी।’ अब दिसंबर में उनकी संभावित वापसी, कोर्ट में सरेंडर और उसके बाद होने वाले राजनीतिक तथा कानूनी घटनाक्रम पर पूरे दक्षिण एशिया की नजर रहने वाली है।

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