शेख हसीना

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‘मुझे वापस लाने की जरूरत नहीं, खुद लौटूंगी’: Sheikh Hasina का बड़ा ऐलान, दिसंबर में बांग्लादेश जाकर कोर्ट में करेंगी सरेंडर!

Sheikh Hasina ने दिसंबर में भारत से अपने देश लौटने और अदालत के सामने आत्मसमर्पण करने की घोषणा कर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। उन्होंने दावा किया है कि उनके साथ अवामी लीग के कई वरिष्ठ नेता भी वापस लौटेंगे। 2024 के सरकार विरोधी आंदोलन के बाद भारत आईं हसीना को छात्र आंदोलन पर कार्रवाई से जुड़े मामले में अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई गई थी, जबकि वह आरोपों से इनकार करती रही हैं। बांग्लादेश सरकार प्रत्यर्पण के प्रयास जारी रखने की बात कह रही है, लेकिन हसीना का कहना है— ‘मुझे वापस लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, मैं खुद लौटूंगी।’ अब दिसंबर में उनकी संभावित वापसी, कोर्ट में सरेंडर और उसके बाद होने वाले राजनीतिक तथा कानूनी घटनाक्रम पर पूरे दक्षिण एशिया की नजर रहने वाली है।

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भारत से Bangladesh की गुहार: क्या शेख हसीना का प्रत्यर्पण संभव है?

23 दिसंबर को नई दिल्ली स्थित Bangladesh उच्चायोग ने भारतीय विदेश मंत्रालय को “नोट वर्बेल” के माध्यम से शेख हसीना के प्रत्यर्पण का अनुरोध किया। यह कूटनीतिक प्रक्रिया का सबसे निचला स्तर है और आमतौर पर ऐसे संवेदनशील मुद्दों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता।

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Bangladesh में उथल-पुथल और शेख हसीना का प्रत्यर्पण विवाद: जमात की साजिश

Bangladesh के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण द्वारा शेख हसीना के खिलाफ मामले दर्ज होने के बाद, बांग्लादेश सरकार ने शेख हसीना के प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। भारत और बांग्लादेश के बीच 2013 में हस्ताक्षरित प्रत्यर्पण संधि इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। भारत के पास शेख हसीना को बांग्लादेश को प्रत्यर्पित करने के कई कानूनी विकल्प हैं, लेकिन इसमें कई कानूनी और राजनीतिक पेच भी हैं।

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Bangladesh की बदलती राजनीति: जमात-ए-इस्लामी पर से प्रतिबंध हटाने के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों पर असर

बांग्लादेश (Bangladesh) में मोहम्मद युनुस की सरकार के आने के बाद से राजनीतिक और सामाजिक माहौल में तेजी से बदलाव हो रहा है। जमात-ए-इस्लामी पर से प्रतिबंध हटाने का फैसला न केवल बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति में उथल-पुथल मचा रहा है, बल्कि भारत-बांग्लादेश संबंधों को भी प्रभावित कर रहा है।

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Bangladesh में बढ़ती अस्थिरता: शेख हसीना की सत्ता का पतन और राष्ट्रीय शोक दिवस पर विवाद

Bangladesh शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद देश में बढ़ते हिंसक विरोधों और अराजकता ने यह संकेत दिया है कि उनकी लोकप्रियता अभी भी जनता के बीच बनी हुई है। शेख हसीना के पिता, शेख मुजीबुर्रहमान, जिन्होंने बांग्लादेश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, की 15 अगस्त 1975 को हत्या कर दी गई थी। इस दिन को बांग्लादेश में राष्ट्रीय शोक दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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