बांग्लादेश राजनीति

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भारत आने से पहले ही Tarique Rahman का दौरा टला! शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर अड़ा बांग्लादेश, दिल्ली से रिश्तों में फिर बढ़ी तल्खी

Tarique Rahman की प्रस्तावित भारत यात्रा फिलहाल टल गई है और इसके केंद्र में शेख हसीना का मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण बना हुआ है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों में यात्रा के लिए उचित माहौल नहीं है और ढाका भारत के जवाब का इंतजार कर रहा है। बांग्लादेश ने भारत के सामने शेख हसीना तथा अन्य फरार आरोपियों के प्रत्यर्पण और शाहिद शरीफ उस्मान हादी की हत्या के आरोपियों को सौंपने की मांग रखी है। दूसरी ओर, भारत और बांग्लादेश के बीच उच्चस्तरीय संपर्क पूरी तरह बंद नहीं हुआ है और दोनों पक्षों के अधिकारी द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई दिल्ली इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है और क्या दोनों देश कूटनीतिक संवाद के जरिए ऐसा रास्ता निकाल पाते हैं जिससे तारिक रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा दोबारा पटरी पर लौट सके।

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Bangladesh में 35 साल बाद राष्ट्रपति चुनाव में मुकाबला: BNP प्रत्याशी फखरुल की जीत तय; कट्टरपंथी जमात ने रिटायर्ड आर्मी अफसर को उम्मीदवार बनाया

Bangladesh में 35 साल बाद राष्ट्रपति पद के लिए वास्तविक चुनावी मुकाबला देखने को मिल रहा है। BNP ने अपने महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को उम्मीदवार बनाया है, जबकि जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन की ओर से लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष सेवानिवृत्त कर्नल ओली अहमद ने नामांकन दाखिल किया है। 20 अगस्त को संसद सदस्य मतदान करेंगे। फरवरी के आम चुनाव में BNP को दो-तिहाई बहुमत मिलने के कारण फखरुल की स्थिति मजबूत मानी जा रही है

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‘मुझे वापस लाने की जरूरत नहीं, खुद लौटूंगी’: Sheikh Hasina का बड़ा ऐलान, दिसंबर में बांग्लादेश जाकर कोर्ट में करेंगी सरेंडर!

Sheikh Hasina ने दिसंबर में भारत से अपने देश लौटने और अदालत के सामने आत्मसमर्पण करने की घोषणा कर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। उन्होंने दावा किया है कि उनके साथ अवामी लीग के कई वरिष्ठ नेता भी वापस लौटेंगे। 2024 के सरकार विरोधी आंदोलन के बाद भारत आईं हसीना को छात्र आंदोलन पर कार्रवाई से जुड़े मामले में अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई गई थी, जबकि वह आरोपों से इनकार करती रही हैं। बांग्लादेश सरकार प्रत्यर्पण के प्रयास जारी रखने की बात कह रही है, लेकिन हसीना का कहना है— ‘मुझे वापस लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, मैं खुद लौटूंगी।’ अब दिसंबर में उनकी संभावित वापसी, कोर्ट में सरेंडर और उसके बाद होने वाले राजनीतिक तथा कानूनी घटनाक्रम पर पूरे दक्षिण एशिया की नजर रहने वाली है।

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Bangladesh में ‘जय श्रीराम’ के नारों के बीच हिंदुओं का विशाल मशाल मार्च: राम प्रतिमा प्रोजेक्ट रुकने पर फूटा गुस्सा, सरकार को 72 घंटे का अल्टीमेटम

Bangladesh में निकला विशाल मशाल मार्च केवल एक धार्मिक परियोजना के समर्थन का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा, धार्मिक अधिकारों और न्याय की मांग से जुड़ा एक बड़ा सामाजिक संदेश भी बनकर उभरा। अब सबकी निगाहें सरकार और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि मामले में संतोषजनक कदम उठाए जाते हैं तो तनाव कम हो सकता है, लेकिन प्रदर्शनकारी संगठनों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि उनकी मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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