Taliban का पाकिस्तान पर तंज: अफगान लड़ाकों ने बीच सड़क दिखाई पाकिस्तानी सैनिकों की पैंट और हथियार, सोशल मीडिया पर मचा बवाल
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर चल रहे तनाव ने अब खुले संघर्ष का रूप ले लिया है। Taliban लड़ाकों ने पाकिस्तान के खिलाफ जीत का ऐलान करते हुए अफगान शहरों की सड़कों पर पाकिस्तानी सैनिकों की पैंट और हथियार लहराए।
BBC के पत्रकार दाउद जुनबिश ने सोशल मीडिया पर एक फोटो शेयर की, जिसमें तालिबान फाइटर्स बीच चौराहे पर पाक सैनिकों की वर्दी और हथियारों को “ट्रॉफी” की तरह दिखाते नजर आए।
इस तस्वीर ने न सिर्फ पाकिस्तान को शर्मिंदा कर दिया है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच बढ़ते युद्ध जैसे हालात की भी पुष्टि करती है।
तालिबान का जश्न — “यह पाकिस्तान पर हमारी जीत है”
अफगानिस्तान में तालिबान लड़ाकों ने कई जगहों पर पाकिस्तानी यूनिफॉर्म और सैन्य सामान को जीत की निशानी के तौर पर प्रदर्शित किया।
स्थानीय मीडिया के मुताबिक, तालिबान लड़ाकों ने कंधार, नंगरहार और कुंदुज में “विजय जुलूस” भी निकाले।
टोलो न्यूज के अनुसार, एक कंधार निवासी ने कहा —
“जरूरत पड़ी तो हम भी मुजाहिदीन और इस्लामिक अमीरात की सेना के साथ पाकिस्तान के खिलाफ मैदान में उतरेंगे। पूरा अफगानिस्तान एकजुट है।”
8 अक्टूबर से जारी संघर्ष, 48 घंटे का सीजफायर
पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच 8 अक्टूबर से लगातार झड़पें चल रही थीं। भारी गोलीबारी और हवाई हमलों के बाद बुधवार शाम को 48 घंटे का सीजफायर घोषित किया गया।
हालांकि, सीजफायर के बावजूद दोनों तरफ तनाव बरकरार है।
पाकिस्तान के हमलों में काबुल और कंधार में 15 अफगान नागरिकों की मौत और 100 से ज्यादा घायल हुए थे, जिसके बाद अफगानिस्तान ने सीमा पर टैंक और अतिरिक्त सैनिक तैनात कर दिए।
पाकिस्तान का दावा — “हमने तालिबान के 20 लड़ाके मारे”
पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग ISPR ने बयान जारी कर कहा —
“बलूचिस्तान बॉर्डर पर अफगान तालिबान के हमले को हमारे जवानों ने नाकाम कर दिया। जवाबी कार्रवाई में 15 से 20 तालिबानी लड़ाके मारे गए।”
लेकिन अफगान पक्ष ने पाकिस्तान के दावों को झूठा बताया और कहा कि पाकिस्तानी सेना ने सीमा पार कर आम नागरिकों को निशाना बनाया।
200 से ज्यादा मौतों का दावा, दोनों तरफ तबाही
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले हफ्ते शुरू हुए संघर्ष में अब तक 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
पाकिस्तान ने दावा किया कि उसने 200 अफगान तालिबान और उनके सहयोगियों को मार गिराया है, जबकि अफगानिस्तान का कहना है कि 58 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं।
यह संघर्ष तब भड़का जब पाकिस्तान ने काबुल में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के ठिकानों पर हमला किया था।
दुरंड लाइन: विवाद की जड़
दोनों देशों के बीच दशकों पुराना विवाद दुरंड लाइन को लेकर है — यह वही सीमा रेखा है जिसे ब्रिटिश काल में भारत और अफगानिस्तान के बीच खींचा गया था।
अफगानिस्तान कभी इस रेखा को स्वीकार नहीं करता, क्योंकि इससे पश्तून जनजातियों की पारंपरिक भूमि दो हिस्सों में बंट गई।
दोनों देशों के बीच सीमा पर सात से ज्यादा जगहों पर घातक गोलीबारी हो चुकी है।
ड्रोन हमले और जवाबी फायरिंग — सोशल मीडिया पर वायरल फुटेज
अफगान तालिबान ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर एक वीडियो जारी किया, जिसमें एक ड्रोन को पाकिस्तान के पेशावर स्थित सैन्य अड्डे पर विस्फोटक गिराते हुए दिखाया गया है।
यह फुटेज पाकिस्तानी मीडिया पर भी वायरल हो गया।
वहीं पाकिस्तान ने दावा किया कि उसकी जवाबी फायरिंग में तालिबान के कई टैंक नष्ट हुए और हमलावरों को चौकियां छोड़कर भागना पड़ा।
TTP के दो गुट एकजुट — पाकिस्तान के खिलाफ एक साथ लड़ाई
अफगानिस्तान में मौजूद तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के दो गुटों ने पाकिस्तान के खिलाफ एक होने की घोषणा की है।
इनमें से एक गुट का नेतृत्व मुफ्ती अब्दुर रहमान (कुर्रम जिला) और दूसरा कमांडर शेर खान (तिराह घाटी) कर रहे हैं।
दोनों ने TTP के प्रति “वफादारी की कसम” खाई है।
यह एकीकरण पाकिस्तान के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकता है, क्योंकि इससे सीमा पार हमलों में बढ़ोतरी की संभावना है।
TTP: पाकिस्तान का पुराना सिरदर्द
2001 में अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान पर हमले के बाद कई लड़ाके पाकिस्तान के कबाइली इलाकों में छिप गए।
2007 में बेतुल्लाह मेहसूद ने 13 विद्रोही गुटों को मिलाकर TTP (Tehrik-e-Taliban Pakistan) की स्थापना की।
यह संगठन पाकिस्तानी सेना और सरकार के खिलाफ काम करता है।
अमेरिका पहले ही चेतावनी दे चुका है कि TTP के बढ़ते प्रभाव से पाकिस्तान के एटमी हथियारों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
पाकिस्तान और TTP की दुश्मनी क्यों बढ़ी
TTP का मानना है कि पाकिस्तान सरकार “इस्लाम के असली सिद्धांतों से भटक गई है” और उसने 2001 में अमेरिका का साथ देकर गुनाह किया।
TTP और अफगान तालिबान के बीच मजबूत गठजोड़ है — दोनों संगठन एक-दूसरे को सैन्य और लॉजिस्टिक सपोर्ट देते हैं।
2021 में जब अफगान तालिबान ने सत्ता संभाली, पाकिस्तान ने TTP को कमजोर करने के लिए अफगान इलाके में हवाई हमले शुरू किए, जिससे दोनों देशों के रिश्ते और बिगड़ गए।
दोनों देशों के बीच तनाव नया नहीं
डूरंड लाइन विवाद, सीमा उल्लंघन, और आतंकियों को पनाह देने के आरोप पिछले कई सालों से दोनों देशों के बीच तनाव की जड़ बने हुए हैं।
2021 में तालिबान की सत्ता वापसी के बाद से यह तनाव लगातार उबलते ज्वालामुखी की तरह बढ़ रहा है।
इस बार का संघर्ष न सिर्फ सीमित गोलीबारी है, बल्कि यह दक्षिण एशिया में नए क्षेत्रीय असंतुलन की शुरुआत भी कर सकता है।
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ता संघर्ष अब सिर्फ सीमा विवाद नहीं रहा — यह दो विचारधाराओं की लड़ाई बन चुका है। तालिबान के लिए यह “इस्लामिक अमीरात” की प्रतिष्ठा का सवाल है, जबकि पाकिस्तान के लिए यह राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौती। दोनों तरफ के दावे, वीडियो और प्रचार अब सोशल मीडिया की जंग में बदल चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष जल्द नहीं थमा, तो पूरा क्षेत्र एक नई भू-राजनीतिक आग में झुलस सकता है — जिसकी चिंगारी कंधार और पेशावर से उठी है।

