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Muzaffarnagar खतौली तहसील में सर्वर ठप, रजिस्ट्री का काम ठप — वकीलों ने किया जोरदार प्रदर्शन⚡

Muzaffarnagar /खतौली। तहसील खतौली के उप-निबंधक कार्यालय में सर्वर ठप पड़ने से रजिस्ट्री का पूरा कामकाज ठप हो गया है। इस तकनीकी गड़बड़ी ने न केवल सरकारी कामकाज को पंगु बना दिया है बल्कि वकीलों और पक्षकारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

पिछले एक सप्ताह से सर्वर बार-बार डाउन हो रहा था, लेकिन गुरुवार सुबह सर्वर पूरी तरह बंद हो जाने के बाद स्थिति और भी बिगड़ गई। इस कारण रजिस्ट्री से जुड़ी फाइलें, दस्तावेज़ और ऑनलाइन एंट्रीज़ रुक गईं। इससे न सिर्फ वकीलों का कार्य ठप पड़ा बल्कि बैनामा कराने आए सैकड़ों लोग मायूस होकर लौट गए।


वकीलों का विरोध प्रदर्शन — “हर रोज़ का सिरदर्द बना यह सर्वर”

सर्वर के ठप रहने से नाराज वकीलों ने रजिस्ट्री कार्यालय के बाहर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि यह समस्या नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से चली आ रही है।

बार एसोसिएशन अध्यक्ष नवीन उपाध्याय ने कहा — “तकनीकी खराबी का हवाला देकर प्रशासन हर बार बच निकलता है। लेकिन हर दिन काम रुकने से आम जनता का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं। अब धैर्य जवाब दे चुका है।”


सप्ताहभर से ठप प्रणाली, दो दिन से पूरी तरह बंद – तहसील में अफरा-तफरी

पिछले सप्ताह से सर्वर में रुक-रुक कर समस्या आ रही थी, लेकिन बुधवार से यह पूरी तरह ठप हो गया। रजिस्ट्री, नामांतरण, अनुबंध पंजीकरण, शपथपत्र सत्यापन जैसे सभी काम रुक गए हैं।

कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल है। लोग घंटों लाइन में लगने के बाद बिना काम किए लौट रहे हैं। कुछ ने तो कहा कि “सरकार डिजिटल इंडिया की बात करती है, लेकिन यहां तो एक सर्वर भी स्थायी रूप से नहीं चल पाता।”


पक्षकारों की दुर्दशा – समय, धन और उम्मीद सब व्यर्थ

रजिस्ट्री कराने आए पक्षकारों को भी बड़ी परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई लोग दूर-दराज के गांवों से यहां रजिस्ट्री कराने आते हैं, लेकिन सर्वर न चलने के कारण उनका समय और धन दोनों बर्बाद हो रहा है।

एक पक्षकार अनुज जैन ने बताया — “तीन दिन से आ रहे हैं, पर सर्वर चालू नहीं हो रहा। हर बार ‘थोड़ी देर में ठीक हो जाएगा’ कहकर लौटा दिया जाता है।”


प्रशासनिक उदासीनता पर उठे सवाल – “कब सुधरेगा सिस्टम?”

वकीलों का कहना है कि सर्वर की समस्या स्थायी बन चुकी है, लेकिन उच्च अधिकारी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे। यदि यह स्थिति जारी रही तो वकील समुदाय बड़े आंदोलन की तैयारी करेगा।

महासचिव प्रदीप कुमार ने चेतावनी दी — “अगर सर्वर तुरंत ठीक नहीं किया गया तो हम कार्यालय बंद कर धरने पर बैठेंगे। जनता को परेशान करना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”


रजिस्ट्री कार्य की रीढ़ टूटी – डिजिटल सिस्टम पर सवाल

तहसील खतौली में रजिस्ट्री कार्य पूरी तरह ऑनलाइन सर्वर सिस्टम पर निर्भर है। लेकिन लगातार डाउन होने से यह डिजिटल सिस्टम सवालों के घेरे में है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सर्वर की क्षमता और बैकअप सिस्टम दोनों पुराने हैं। हर थोड़े समय में ओवरलोड या नेटवर्क फेलियर के कारण सर्वर हैंग हो जाता है। यदि अपग्रेडेशन नहीं किया गया, तो भविष्य में रजिस्ट्री की प्रक्रिया और अधिक प्रभावित होगी।


वकीलों की एकजुटता – सामूहिक आंदोलन की चेतावनी

विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे, जिनमें छत्रपाल सिंह, जितेंद्र त्यागी, सत्यप्रकाश सैनी, सचिन आर्य, नवाब सिंह, मुकेश शर्मा, मोहम्मद अरशद, बिजेंद्र कुमार, शाकिर मिर्जा, सत्यम कुमार, पदम कुमार, सीताराम, मजाहिर काजी, हरिनिवास सोम, पंकज कुमार, अभिषेक गोयल, अनुज जैन, शेखर सोम सहित कई अधिवक्ता शामिल रहे।

सभी ने एक स्वर में कहा कि अब सिर्फ वादा नहीं, समाधान चाहिए। यदि उच्च स्तर से तकनीकी सुधार नहीं किया गया, तो तहसील में कार्य बहिष्कार किया जाएगा।


जनता की मांग – “स्थायी समाधान चाहिए, अस्थायी सुधार नहीं”

पक्षकारों और अधिवक्ताओं दोनों की मांग है कि सर्वर का स्थायी समाधान किया जाए। केवल रीस्टार्ट या अस्थायी मरम्मत से काम नहीं चलेगा। सिस्टम को आधुनिक और मजबूत बनाना जरूरी है।

आईटी विभाग को सुझाव दिया गया है कि तहसील कार्यालयों में डेडिकेटेड हाई-स्पीड सर्वर और बैकअप लाइनें लगाई जाएं ताकि भविष्य में यह स्थिति न बने।


डिजिटल इंडिया की जमीनी सच्चाई – जब तकनीक ठप पड़ जाए

खतौली का यह उदाहरण दिखाता है कि तकनीक का ढांचा अगर मजबूत न हो, तो डिजिटलाइजेशन जनता के लिए मुसीबत बन जाता है। सरकार ने भले ही “ई-रजिस्ट्री” की सुविधा शुरू की हो, लेकिन बिना तकनीकी स्थिरता के यह परियोजना सिर्फ कागज़ों में डिजिटल इंडिया रह जाती है।


खतौली तहसील के रजिस्ट्री कार्यालय में सर्वर ठप होने की यह स्थिति प्रशासनिक सुस्ती और तकनीकी अक्षमता की बड़ी मिसाल है। जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक जनता की परेशानियां और बढ़ती जाएंगी। खतौली के वकीलों और नागरिकों की एक ही मांग है — कामकाज सामान्य हो, सर्वर दुरुस्त हो, और डिजिटल व्यवस्था भरोसेमंद बने।

 

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