प्रदेश सरकार ने विकास की लाइफ लाइन कही जाने वाली सड़कों का बिछाया जाल
कि किसी भी मरीज के अस्पताल जाने छात्र-छात्राओं को स्कूल कालेज जाने, किसान को अपनी उपज बेचने मण्डी जाने, उद्योगों, व्यवसायों की स्थापना के लिए तथा आम नागरिकों को आवागमन की परेशानी नहीं होगी। अपने अब तक के कार्यकाल में मुख्यमंत्री जी ने गांवो, मजरों में सम्पर्क मार्गों का निर्माण कराकर सीधे मुख्यमार्गों से जोड़कर हर तरह के आवागमन को सुचारू और सुगम बना दिया है।
प्रदेश के लोक निर्माण विभाग द्वारा ग्रामीण सड़कों का निर्माण एवं ब्लाॅक व तहसीलों के मार्गों को चैड़ीकरण करते हुए आवागमन को सुगम बनाया है। विभाग द्वारा नवीन सड़कों का निर्माण रखरखाव, मरम्मत, चैड़ीकरण, नेशनल हाईवे की मरम्मत तथा रखरखाव, विभिन्न सेतुओं का निर्माण, सरकारी भवनों का निर्माण तथा रखरखाव आदि महत्वपूर्ण कार्य मानक एवं गुणवत्तापूर्ण किये जाते हैं।
प्रदेश सरकार ने अब तक हजारों राजस्व ग्रामों को सम्पर्क मार्गों से जोड़ते हुए 11259 किलोमीटर लम्बाई की ग्रामीण मार्गों का निर्माण कराया है तथा तहसीलों, विकासखण्डों के मार्गों को टू-लेन में बनाते हुए चैड़ीकरण कर 12600 किलोमीटर लम्बाई के मार्गों का चैड़ीकरण/सुदृढ़ीकरण का कार्य कराया गया है।
इस योजना के अन्तर्गत इस वर्ष 19 खिलाड़ियों के निवास/ग्रामों तक मार्ग का निर्माण किया जा रहा है।देश के बलिदानी शहीदों का सम्मान -देश की रक्षा करते हुए सीमा पर शहीद हुए बलिदानी शहीदों को सम्मान देते हुए उनके घर/गांव तक सड़क का निर्माण/मरम्मत करते हुए ‘‘जय हिन्द वीर पथ’’ योजना प्रदेश सरकार ने प्रारम्भ की है। प्रदेश में ऐसे शहीदों के नाम से उनके घर तक सर्वऋतु मार्ग निर्माण का कार्य किया जा रहा है, जो उनके बलिदान की शौर्यगाथा को दर्शाती रहेगी।
प्रदेश में 39 शहीदों के घर तक सड़क बनाई जा रही है, जिसमें 17 सड़कें बन गई हैं, शेष निर्माणाधीन हैं।हर्बल मार्गों का विकास – प्रदेश में लोक निर्माण विभाग द्वारा सभी जनपदों के प्रत्येक खण्डों में एक-एक हर्बल मार्ग विकसित किया जा रहा है, जिनमें मार्गों के किनारे हर्बल पौधे रोपित किये जा रहे हैं। प्रदेश के 75 जनपदों के सभी 175 खण्डों में हर्बल मार्ग का चयन करते हुए 31253 हर्बल पौधे रोपित किये जा चुके हैं। अवशेष मार्गों पर पौधरोपण का कार्य चल रहा है।
सड़कों के निर्माण में नवीन तकनीक का प्रयोग किया गया, जिसमें लागत और सामग्री की खपत में 20 से 25 प्रतिशत सामग्री की कमी आयी। नवीन तकनीक के प्रयोग से लगभग 1200 करोड़ रुपये की बचत एवं 15.4 लाख टन कार्बन उत्सर्जन की बचत हुई तथा पर्यावरण संरक्षण को भी भरपूर सहयोग मिला।
