Sri Lanka की स्थिति से भारत के लिए खतरे की संभावना- सुब्रमण्यम स्वामी
Sri Lanka में लोग सड़कों पर उतर आए हैं और सरकार के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। इसे लेकर बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि मोदी सरकार को भारतीय सेना को वहां भेजना चाहिए। साथ ही उन्होंने वहां की स्थिति से भारत के लिए खतरे की संभावना भी जताई है।
उन्होंने एक ट्वीट कर कहा, “संवैधानिक पवित्रता को बहाल करने के लिए भारत को इंडियन आर्मी को श्रीलंका भेजकर हस्तक्षेप करना चाहिए। वर्तमान में भारत विरोधी विदेशी ताकतें लोगों के गुस्से का फायदा उठा रही हैं। यह भारत की सुरक्षा के लिए खतरा है।”
Premadasa threatened war with India, says former envoy https://t.co/GRW08LXznN
— Pritam Sarbabidya (@PSarbabidya) May 11, 2022
उधर, Sri Lanka के बिगड़ते हालातों को लेकर विपक्षी दल केंद्र की मोदी सरकार पर हमलावर हैं। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सलाह दे रहे हैं कि पड़ोसी देश की स्थिति से कुछ सीखें और उन्हें अब संभल जाना चाहिए। वहीं, भारत ने मंगलवार (10 मई, 2022) को कहा कि पड़ोसी देश और पुराने रिश्तों के नाते भारत श्रीलंका में लोकतंत्र, स्थिरता और आर्थिक स्थिति को वापस पटरी पर लाने के लिए अपना पूरा समर्थन करता है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि “पड़ोसी प्रथम” नीति को ध्यान में रखते हुए, भारत ने श्रीलंका के लोगों को कठिन स्थिति से बाहर निकालने में मदद करने के लिए इस साल 3.5 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा की सहायता प्रदान की है। इसके अलावा, भारतीयों ने भोजन और दवा जैसी जरूरी चीजों की कमी को दूर करने में सहायता प्रदान की है। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा श्रीलंका के लोगों के सर्वश्रेष्ठ हित के लिए काम करेगा।
गौरतलब है कि Sri Lanka में आर्थिक और राजनीतिक संकट के कारण स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। यहां सोमवार (9 मई, 2022) को पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के इस्तीफे के बाद सड़कों पर प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने यहां बवाल मचाया हुआ है। भीड़ ने महिंदा राजपक्षे के पैतृक आवास सहित कई नेताओं के घरों में आगजनी की।
श्रीलंका में कई दिनों से सरकार के विरोध में देशव्यापी प्रदर्शन हो रहा है जो अब चरम पर पहुंच गया है। यहां आवश्यक चीजों की बढ़ती कीमतों और बिजली कटौती को लेकर पिछले महीने से लगातार विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। देश में आर्थिक संकट मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा की कमी के कारण पैदा हुआ है, जिसके चलते देश मुख्य खाद्य पदार्थों और ईंधन के आयात के लिए भुगतान नहीं कर पा रहा है।
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