राज्यसभा में भी तीन तलाक बिल मंजूर
तीन बार राज्यसभा में खारिज किए जा चुके मुस्लिम महिला (शादी पर अधिकारों की सुरक्षा) विधेयक, 2019 को आखिरकार उच्च सदन ने भी मंजूरी दे दी। अब मौखिक, लिखित या किसी भी अन्य माध्यम से तीन तलाक देना कानूनन अपराध होगा। सरकार के पास राज्यसभा में पूर्ण बहुमत न होने के बावजूद विपक्षी दलों के बिखराव और मित्र दलों की सहायता से यह बिल पास हुआ। बिल के पक्ष में 99 और विरोध में 84 वोट पड़े। अब ये बिल कानून का रूप लेगा। तीन तलाक का जिक्र न तो कुरान में कहीं आया है और न ही हदीस में। यानी तीन तलाक इस्लाम का मूल भाग नहीं है।
Rajya Sabha passes Muslim Women (Protection of Rights on Marriage) Bill, 2019. #TripleTalaqBill pic.twitter.com/gVLh2wTzXK
— ANI (@ANI) July 30, 2019
तीन तलाक से पीड़ित कोई महिला उच्च अदालत पहुंची है तो अदालत ने कुरान और हदीस की रौशनी में ट्रिपल तलाक को गैर इस्लामिक कहा है। तीन बार तलाक को ‘तलाक-ए-बिद्दत’ कहा जाता है। बिद्दत यानी वह कार्य या प्रक्रिया जिसे इस्लाम का मूल अंग समझकर सदियों से अपनाया जा रहा है, हालांकि कुरान और हदीस की रौशनी में यह कार्य या प्रक्रिया साबित नहीं होते।
पिछले सप्ताह ही इस बिल को लोकसभा ने मंजूरी दी थी। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बिल पेश करने के दौरान कहा था कि तीन तलाक 20 से ज्यादा देशों में प्रतिबंधित है, इस कानून को राजनीति के चश्मे से न देखें। अब तीन तलाक देने पर आरोपी को तीन साल की जेल होगी।
सेलेक्ट कमेटी में भेजने पर वोटिंग हुई, प्रस्ताव गिरा
तीन तलाक बिल को सेलेक्ट कमेटी में भेजे जाने के मुद्दे पर वोटिंग हुई। नए सांसदों को सीट अलॉट न होने कारण पर्ची से वोटिंग की गई। हालांकि, यह प्रस्ताव 100-84 के अंतर से गिर गया। इसके पक्ष में 84 वोट पड़े तो न भेजे जाने के पक्ष में 100 सांसदों ने वोट किया। वोटिंग के दौरान कई सांसदों का नदारद रहना भी इसके पक्ष में गया। जदयू, अन्नाद्रमुक, टीआरएस और बसपा जैसे दल सदन में मौजूद ही नहीं थे।
खामोश हुआ विपक्ष, सभी दलीलें हुईं खारिज
बता दें कि तीन तलाक बिल को विपक्ष ने शुरुआत से ही खारिज किया है। तृणमूल कांग्रेस की एक नेता ने तो कहा था कि यह अध्यादेश बिना संसदीय समीक्षा के लाया गया है इसलिए वह इसके विरोध में हैं। वहीं, बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता दुलाम नबी आजाद ने कहा था कि यह बिल मुस्लिम महिलाओं की शादी के अधिकार की सुरक्षा पर है, लेकिन इसका असली मकसद परिवारों को बर्बाद करना है।
जदयू ने विरोध में किया था वॉकआउट
इस बिल के विरोध में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) सांसद वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा था कि हमारी पार्टी इस बिल के समर्थन में नहीं है। उन्होंने कहा कि विधेयर पर बड़े पैमाने पर जागरूकता फैलाने की जरूरत है। इस विधेयक के विरोध में हमारी पार्टी वॉकआउट करती है।
तीन तलाक बिल में क्या हैं प्रावधान
- तुरंत तीन तलाक यानी तलाक-ए-बिद्दत को रद्द और गैर कानूनी बनाना
- संज्ञेय अपराध यानी पुलिस को बिना वारंट गिरफ्तार करने का अधिकार
- तीन साल तक की सजा का प्रावधान है
- बिना पीड़ित महिला का पक्ष सुने नहीं दी जाएगी जमानत
- पीड़ित महिला के अनुरोध पर मजिस्ट्रेट समझौते की अनुमति दे सकता है
- पीड़ित महिला पति से गुजारा-भत्ता का दावा कर सकती है
