खेल जगत

Uttarakhand स्पोर्ट्स कॉलेज एडमिशन 2026 शुरू: 120 सीटों के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा, 5 टेस्ट पास करने पर मिलेगा मौका

Uttarakhand में खेलों में करियर बनाने का सपना देख रहे बच्चों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश के प्रतिष्ठित राज्य वित्तपोषित स्पोर्ट्स कॉलेजों में कक्षा 6 में प्रवेश के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। 10 से 13 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए यह सुनहरा अवसर माना जा रहा है, जहां उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ प्रोफेशनल स्पोर्ट्स ट्रेनिंग भी दी जाएगी।

खेल विभाग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार आवेदन की अंतिम तिथि 14 मई निर्धारित की गई है। इस बार राज्य के तीन प्रमुख स्पोर्ट्स कॉलेजों में कुल लगभग 120 सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा। एडमिशन प्रक्रिया को लेकर Maharana Pratap Sports College के प्रधानाचार्य Rajesh Mamgain ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं।


120 सीटों के लिए प्रदेशभर से आएंगे आवेदन, मेरिट के आधार पर होगा चयन

प्रधानाचार्य राजेश ममगाईं के अनुसार इस वर्ष राज्य के तीनों प्रमुख स्पोर्ट्स कॉलेजों में करीब 120 सीटों पर एडमिशन होना है। इनमें देहरादून स्थित महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज, हरि सिंह थापा स्पोर्ट्स कॉलेज पिथौरागढ़ और बालिका स्पोर्ट्स कॉलेज चंपावत शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि अकेले महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में लगभग 60 सीटें उपलब्ध हैं। हर साल बड़ी संख्या में बच्चे इन सीटों के लिए आवेदन करते हैं, जिसके चलते प्रतिस्पर्धा काफी कठिन हो जाती है।

राजेश ममगाईं ने स्पष्ट किया कि किसी विशेष खेल के लिए कोई तय कोटा नहीं रखा गया है। यानी क्रिकेट, बॉक्सिंग, एथलेटिक्स या अन्य खेलों के लिए पहले से सीटें निर्धारित नहीं होतीं। चयन पूरी तरह बच्चों की प्रतिभा और प्रदर्शन पर आधारित रहेगा।


‘किसी खेल का फिक्स कोटा नहीं’, प्रदर्शन के आधार पर होगा सेलेक्शन

अक्सर अभिभावकों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या कुछ खेलों को ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है। इस पर प्रधानाचार्य ने साफ कहा कि स्पोर्ट्स कॉलेज में किसी भी खेल के लिए फिक्स सीट तय नहीं होती।

उन्होंने कहा कि जिस खेल में बच्चे बेहतर प्रदर्शन करेंगे, उसी आधार पर उनकी मेरिट बनेगी। अगर किसी वर्ष एथलेटिक्स में ज्यादा प्रतिभाशाली बच्चे सामने आते हैं तो उस खेल में अधिक चयन हो सकता है। वहीं किसी अन्य वर्ष बॉक्सिंग या हॉकी में प्रतिभा ज्यादा होने पर स्थिति बदल सकती है।

इस नीति का उद्देश्य हर प्रतिभाशाली खिलाड़ी को समान अवसर देना है।


5 कठिन चरणों से गुजरना होगा, तभी बनेगी फाइनल मेरिट

स्पोर्ट्स कॉलेज में प्रवेश पाने के लिए बच्चों को कई स्तरों की चयन प्रक्रिया से गुजरना होगा। प्रधानाचार्य के मुताबिक चयन प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से तैयार की गई है ताकि वास्तविक प्रतिभा सामने आ सके।

चयन प्रक्रिया के 5 प्रमुख चरण

  • शारीरिक दक्षता परीक्षण (बैटरी टेस्ट)
  • खेल कौशल परीक्षण (गेम टेस्ट)
  • लिखित परीक्षा
  • इंटरव्यू
  • मेडिकल टेस्ट

उन्होंने बताया कि ये सभी परीक्षण बच्चों की उम्र और शारीरिक क्षमता को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किए गए हैं। प्रत्येक चरण में प्रदर्शन के आधार पर अंक दिए जाएंगे और उसके बाद फाइनल मेरिट लिस्ट तैयार होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बहु-स्तरीय चयन प्रक्रिया बच्चों की खेल प्रतिभा के साथ-साथ मानसिक क्षमता और अनुशासन का भी मूल्यांकन करती है।


इंटरनेशनल स्तर की सुविधाएं, सरकार उठा रही पूरा खर्च

Rajesh Mamgain ने बताया कि चयनित बच्चों को राज्य सरकार की ओर से आधुनिक खेल सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। कॉलेज परिसर में ट्रेनिंग, पढ़ाई, डाइट और हॉस्टल जैसी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं।

उन्होंने कहा कि हर खेल का खर्च अलग-अलग होता है। उदाहरण के लिए शूटिंग जैसे खेलों में उपकरण और तकनीकी संसाधनों का खर्च ज्यादा होता है, जबकि एथलेटिक्स जैसे खेलों की आवश्यकताएं अलग होती हैं। इसलिए किसी एक औसत खर्च को तय नहीं किया जा सकता।

सरकार का प्रयास है कि राज्य के प्रतिभाशाली बच्चों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर दिया जाए ताकि वे राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकें।


स्पोर्ट्स कॉलेज से निकले खिलाड़ी बना रहे शानदार करियर

प्रधानाचार्य ने कॉलेज के ट्रैक रिकॉर्ड का जिक्र करते हुए बताया कि यहां से प्रशिक्षण लेने वाले कई खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुके हैं।

इसके अलावा स्पोर्ट्स कोटे के जरिए बड़ी संख्या में खिलाड़ी भारतीय सेना, वायु सेना, रेलवे, पैरामिलिट्री फोर्स और अन्य सरकारी संस्थानों में नौकरी हासिल कर रहे हैं। कई खिलाड़ी निजी क्षेत्र में भी सफल करियर बना रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि स्पोर्ट्स कॉलेज अब केवल खेल प्रशिक्षण का केंद्र नहीं रह गए हैं, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार और करियर निर्माण का मजबूत माध्यम भी बन चुके हैं।


उत्तराखंड में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने की बड़ी पहल

राज्य सरकार लगातार खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम कर रही है। पहाड़ी क्षेत्रों में मौजूद प्राकृतिक क्षमता और शारीरिक दक्षता को देखते हुए सरकार स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने पर जोर दे रही है।

विशेषज्ञों के मुताबिक कम उम्र में प्रोफेशनल ट्रेनिंग मिलने से बच्चों के खेल करियर को मजबूत आधार मिलता है। यही वजह है कि स्पोर्ट्स कॉलेजों में एडमिशन के लिए हर साल बड़ी संख्या में आवेदन आते हैं।


अभिभावकों में उत्साह, बच्चों के सपनों को मिल रहा नया मंच

स्पोर्ट्स कॉलेज एडमिशन प्रक्रिया शुरू होने के बाद अभिभावकों और बच्चों में उत्साह का माहौल है। कई परिवार अपने बच्चों को खेलों में करियर बनाने के लिए इन संस्थानों को सबसे बेहतर विकल्प मान रहे हैं।

खेल विशेषज्ञों का कहना है कि पढ़ाई और प्रोफेशनल ट्रेनिंग का संतुलन बच्चों के सर्वांगीण विकास में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे संस्थान राज्य के भविष्य के खिलाड़ियों को तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।


एक नजर में जरूरी जानकारी

  • आवेदन प्रक्रिया शुरू
  • अंतिम तिथि: 14 मई
  • आयु सीमा: 10 से 13 वर्ष
  • कक्षा 6 में प्रवेश
  • कुल सीटें: लगभग 120
  • मुख्य कॉलेज: देहरादून, पिथौरागढ़ और चंपावत
  • चयन प्रक्रिया: 5 चरणों में टेस्ट

उत्तराखंड के राज्य वित्तपोषित स्पोर्ट्स कॉलेजों में शुरू हुई एडमिशन प्रक्रिया राज्य के हजारों युवा खिलाड़ियों के लिए बड़ा अवसर लेकर आई है। प्रोफेशनल ट्रेनिंग, आधुनिक सुविधाएं और सरकारी सहयोग के साथ ये संस्थान खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। आने वाले वर्षों में यही खिलाड़ी उत्तराखंड और देश का नाम दुनिया भर में रोशन कर सकते हैं।

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