Vigyan Dhara Scheme: भारत की विज्ञान और प्रौद्योगिकी में नई दिशा
नई दिल्ली – केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने केंद्रीय कैबिनेट की एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद Vigyan Dhara Scheme की घोषणा की। यह योजना, जो 15वें वित्त आयोग की अवधि 2021-22 से 2025-26 तक लागू होगी, के लिए 10,579 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है। इस योजना के तहत तीन प्रमुख घटक शामिल हैं, जिनमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में संस्थागत और मानव संसाधन क्षमता निर्माण, अनुसंधान और विकास, तथा नवाचार, प्रौद्योगिकी विकास और तैनाती शामिल हैं।
Vigyan Dhara Schemeका मुख्य उद्देश्य भारत को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करना है। इस योजना के अंतर्गत न केवल उच्च शिक्षण संस्थानों को सशक्त बनाया जाएगा, बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नए वैज्ञानिक प्रतिभाओं की खोज भी की जाएगी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों और शोधकर्ताओं को नवीनतम प्रौद्योगिकियों से परिचित कराया जाएगा।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में संस्थागत और मानव संसाधन क्षमता निर्माण
विज्ञान धारा योजना का पहला घटक विज्ञान और प्रौद्योगिकी में संस्थागत और मानव संसाधन क्षमता निर्माण पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य भारतीय संस्थानों को उन्नत बनाने के लिए आवश्यक संसाधनों की आपूर्ति करना है। इसके तहत, विभिन्न वैज्ञानिक शोध संस्थानों को अधिक वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी ताकि वे नवीनतम प्रयोगशालाओं, उपकरणों, और प्रौद्योगिकियों से सुसज्जित हो सकें। इसके साथ ही, इस घटक के अंतर्गत विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने वाले छात्रों और शोधकर्ताओं को भी सहायता प्रदान की जाएगी।
अनुसंधान और विकास तथा नवाचार
इस योजना का दूसरा घटक अनुसंधान और विकास तथा नवाचार पर ध्यान केंद्रित करता है। इसके अंतर्गत विभिन्न अनुसंधान परियोजनाओं के लिए फंडिंग उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि भारतीय वैज्ञानिक और शोधकर्ता वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना सकें। विज्ञान धारा योजना के तहत, न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित किया जाएगा, बल्कि नवाचार को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही, शोधकर्ताओं को नए विचारों और तकनीकों को विकसित करने के लिए अवसर प्रदान किए जाएंगे।
प्रौद्योगिकी विकास और तैनाती
विज्ञान धारा योजना का तीसरा और अंतिम घटक प्रौद्योगिकी विकास और तैनाती पर आधारित है। इसके तहत, नई तकनीकों को विकसित करने और उन्हें व्यावसायिक रूप से उपयोग में लाने के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा। इस घटक के अंतर्गत, भारत की प्रौद्योगिकी क्षमता को बढ़ाने के लिए विभिन्न परियोजनाओं को समर्थन दिया जाएगा। इसके साथ ही, भारतीय कंपनियों को भी उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।
बायो ई 3: भारत की जैव प्रौद्योगिकी में नई क्रांति
मंत्रिमंडल ने विज्ञान धारा योजना के साथ ही जैव प्रौद्योगिकी विभाग के उच्च प्रदर्शन जैव विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए ‘बायो ई 3’ (अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी) नीति को भी मंजूरी दी है। इस नीति का उद्देश्य भारत को जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विश्व स्तरीय नेतृत्व प्रदान करना है। यह नीति, अनुसंधान और विकास, नवाचार, और उद्यमिता के लिए समर्थन प्रदान करती है, जो जैव प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में नए अवसरों का निर्माण करेगी।
पर्यावरण के लिए जीवन शैली और शुद्ध शून्य कार्बन अर्थव्यवस्था की दिशा में कदम
बायो ई 3 नीति सरकार की शुद्ध शून्य कार्बन अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के लिए जीवन शैली (LiFE) जैसी पहलों को सशक्त करेगी। इस नीति के तहत, भारत चक्रीय जैव-अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देकर हरित विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा। चक्रीय जैव-अर्थव्यवस्था का मुख्य उद्देश्य उन तकनीकों का विकास करना है जो न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि आर्थिक रूप से भी लाभप्रद हैं। इस नीति के माध्यम से, जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नए रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
विज्ञान धारा और बायो ई 3: भारत के विकास की नई इबारत
विज्ञान धारा और बायो ई 3 नीतियों का संयोजन भारत को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। इन योजनाओं के माध्यम से, न केवल वैज्ञानिक शोध और विकास को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि देश के युवाओं को नए अवसर भी मिलेंगे। यह योजनाएं भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं, जो न केवल देश के आर्थिक विकास को बढ़ावा देंगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी योगदान देंगी।
सरकार की इन योजनाओं का उद्देश्य है कि भारत वैश्विक मंच पर विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी देश के रूप में उभरे। इसके साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे। विज्ञान धारा और बायो ई 3 के माध्यम से, भारत के युवा और वैज्ञानिक समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे।
इन योजनाओं का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह देश में रोजगार के नए अवसर उत्पन्न करेंगी, जिससे देश की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ होगी। विज्ञान धारा और बायो ई 3 नीतियों के सफल कार्यान्वयन से भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक नई क्रांति का आगाज होगा, जिससे देश का हर क्षेत्र लाभान्वित होगा।
विज्ञान धारा और बायो ई 3 जैसी योजनाएं भारत को वैश्विक मंच पर विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मजबूत बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम हैं। इन योजनाओं के माध्यम से, भारत न केवल अपने विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी नई ऊंचाइयों को छुएगा। इन योजनाओं का सफल कार्यान्वयन देश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और रोजगार के नए अवसरों का भी सृजन करेगा।

