उत्तर प्रदेश

Uttar Pradesh में किसानों को योगी सरकार का तोहफा नामंजूरः नरेश टिकैत

सिसौलीमुजफ्फरनगर। भाकियू सुप्रीमो चौधरी नरेश टिकैत ने Uttar Pradesh सरकार द्वारा गन्ना मूल्य में २० रूपये प्रति क्विंटल की वृद्धि को नाकाफी बताते हुए गन्ना मूल्य ४५० कुंतल किए जाने की मांग की है।

इसके पहले, गन्ना मूल्य को लेकर Uttar Pradesh सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले २०२१ में भी २५ रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की थी। वर्तमान में सामान्य गन्ने का मूल्य ३४० रुपये प्रति क्विंटल और अगेती प्रजापति के गन्ने का मूल्य ३५० रुपये प्रति क्विंटल है।

चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि इस बार भी चुनावी वर्ष है और लगभग ४ वर्ष बाद गन्ने के दाम में मामूली बढ़ोतरी की गई है जिसको लेकर किसान संतुष्ट नहीं है ।सरकार गन्ने के दाम के लिए पुन विचार कर गन्ने का दाम ४५० रुपए प्रति कुंतल करने का कार्य करें

 

किसानों के लिए गन्ने के भाव में हुई मूल्य वृद्धि पर्याप्त नहींः चौधरी शक्ति सिंहMuzaffarnagar News
Uttar Pradeshसरकार द्वारा गन्ने के भाव में की गई २० प्रति कुंतल की वृद्धि किसानों के लिए पर्याप्त नहीं है

यह फैसला बहुत ही निराशाजनक है किसानो द्वारा गन्ने को लेकर उत्तर प्रदेश में चल रहे आंदोलन के बावजूद भी सरकार द्वारा की गई २० कुंतल की वृद्धि किसानों को छलने वाली बात है जबकि पड़ोसी राज्य हरियाणा में ३८६ रुपए कुंतल व पंजाब में ३९२ रुपए कुंतल गन्ने का भाव घोषित किया गया है

ऐसे में यूपी सरकार द्वारा अगेती प्रजाति का ३५० से ३७० रुपए कर देना और अन्य प्रजातियों के लिए भी पिछले भाव से २० रूपये बढ़ाना किसानों के साथ अन्याय है यदि बाजार की बात करें तो हर वस्तु के मूल्य दर चरम पर है

लेकिन जब किसान की फसल के मूल्य की बात आती है तो सरकार देर से और अपर्याप्त फसल मूल्य वृद्धि की घोषणा करती है है उत्तर प्रदेश सरकार को चहिए कि पुनः त्वरित विचार करते हुए किसानों के पक्ष में गन्ना मूल्य की पर्याप्त वृद्धि करते हुए उचित गन्ना मूल्य की घोषणा करें अन्यथा किसान अपने अधिकारों के लिए आंदोलन करने को मजबूर होगा।

 

सरकार द्वारा बढ़ाया गया गन्ना मूल्य नाकाफीः धर्मेंद्र मलिक
भारतीय किसान यूनियन अराजनीतिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने सरकार द्वारा बढ़ाए गए गन्ना मूल्य को न कही बताया धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि पिछले साल भी गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी नहीं हुई थी

इस बार कम से कम हरियाणा और पंजाब जितना गन्ने का भाव तो होना चाहिए था ।
धर्मेंद्र मलिक ने कहा गन्ने से बनने वाले सभी उत्पाद भी महंगे हो रहे हैं और चीनी का भाव भी २५ परसेंट से अधिक बड़ा है इसलिए गन्ने का भाव हरियाणा पंजाब के बराबर होना चाहिए

 

20 रूपये गन्ना मूल्य मे वृद्धि पर्याप्त नहींः सुमित मलिकSumit Malik
समाजसेवी सुमित मलिक ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा किसान के गन्ने के रेट में २० की वृद्धि की है जो बहुत कम है

क्योंकि कई वर्षों से गन्ने का मूल्य की वृद्धि नहीं हुई थी दो अन्य राज्यों के बराबर कम से कम रेट निर्धारित करना था क्योंकि किसान की पैदावार कम हो रही है और खर्च के साधन अधिक बढ़ रहे हैं फर्टिलाइजर बहुत ज्यादा महंगे हो चुके हैं

जिससे किसान की लागत बहुत बढ़ चुकी है लेकिन गन्ने का मूल्य बहुत कम है मजदूर की मजदूरी बढ़ रही है किसान की लागत बढ़ रही है इसलिए गन्ने के मूल्य की वृद्धि भी अधिक होनी चाहिए थी

किसान बहुत आहत है सरकार को पुन विचार मंथन कर गन्ने के मूल्य में वृद्धि करने की आवश्यकता है सरकार को किसान के हित में निर्णय लेना चाहिए लेकिन २० की जो सरकार के द्वारा वृद्धि की गयी है वह कम है ओर उसे बढाना चाहिए।

 

Uttar Pradesh सरकार ने गन्ना किसानों के साथ किया मजाकः हरिओम त्यागी
मुजफ्फरनगर।(Muzaffarnagar News)-गांव खाई खेड़ी के पूर्व प्रधान और भारतीय किसान यूनियन के जिला महासचिव हरिओम त्यागी ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गन्ना मूल्य में की गई २० रुपए की बढ़ोतरी को गन्ना किसानों के साथ मजाक बताया उन्होंने कहा सभी चीजों के दाम बढ़ रहे हैं

लेकिन गन्ना किसानों के साथ अन्याय हो रहा है। २० गाने का भाव बढ़ाना कोई औचित्य की बात नहीं है सरकार को चाहिए की गन्ने का भाव ४५० रुपए प्रति कुंतल होना चाहिए गन्ना किसान विरोधी उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले तीन सालों में ं२० गाने का भाव बढ़ाया है जो की दुर्भाग्यपूर्ण।

 

गन्ने का भाव 20 रुपये बढ़ाया, लेकिन किसानों को ज्यादा आस थीः अशोक बालियान
मुजफ्फरनगर।(Muzaffarnagar News) योगी सरकार ने पेराई सत्र २०२३-२४ के लिए प्रदेश के समस्त चीनी मिलों के द्वारा क्रय किये जाने वाले गन्ना का राज्य परामर्शित मूल्य (एसएपी) २० रूपये बढाया है और इसप्रकार अगौतो प्रजाति का गन्ना ३५० रुपए प्रति क्विंटल से बढ़कर ३७० रुपए हो गया है, लेकिन किसानों को ज्यादा थी। किसान व् उद्योग हित में यह फैसला ठीक है। हम इसका स्वागत करते हैं।

यूपी की योगी सरकार ने गन्ना मूल्य भुगतान, गन्ने के प्रति हेक्टेयर उत्पादन, चीनी परता और सभी चीनी मिलों के संचालन के मामले में रिकॉर्ड बनाया है। राज्य की अधिकांश चीनी मिलें समय से भुगतान कर रही है। इससे पहले चीनी मिलों द्वारा समय से गन्ना मूल्य का भुगतान न होना किसानों के धरना प्रदर्शन की मुख्य वजह रहती थी।

योगी सरकार ने भुगतान के साथ ही सरकार ने सबसे ज्यादा जोर पुरानी मिलों के आधुनिकीकरण और नई मिलों की स्थापना पर दिया है। बसपा और सपा शासन काल में वर्ष २००७ से २०१७ के दौरान बंद होने वाली २९ मिलों के मद्देजर नई मिलों को खोलना और पुरानी मिलों का आधुनिकीकरण किसानों के हित में ऐतिहासिक कदम रहा है।

योगी सरकार से पहले प्रदेश में ४५ लाख गन्ना किसान थे, लेकिन आज ६० लाख गन्ना किसान हैं। इससे चीनी मिलें व् किसान दोनों मजबूत हुए हैं।

 

News-Desk

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