मनाई गई 139 वी जयंती, वीर सावरकर को मिले भारत रत्न- Hindu Mahasabha
आज अखिल भारत हिंदू महासभा (Hindu Mahasabha) के राष्ट्रीय संपर्क भवन पर वीर सावरकर जी की 139 वी जयंती मनाई गई जिसमें हिंदू वीरों ने वीर सावरकर के पद चिन्हों पर चलने का संकल्प लिया.देश के एकमात्र ऐसे क्रांतिकारी जिन्हें काले पानी की तीन बार सजा हुई और अपने अंतिम समय तक हिंदू महासभा की सेवा करते रहे
ऐसे वीर सावरकर को हम शत शत नमन करते हैं और उनके पद चिन्हों पर चलने का संकल्प लेते हैं वीर सावरकर जी ने अपना पूरा जीवन देश सेवा के लिए बलिदान कर दिया वह हिंदू महासभा के कई बार राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनोगे उन्हीं ने हिंदू महासभा को राजनीतिक रूप में लाने का जो कार्य किया उसके लिए हम उनके रेनी है
अपने कार्यकाल में उन्होंने एक नारा दिया था सावरकर का मंत्र महान हिंदी हिंदू हिंदुस्तान इसके अलावा उन्होंने हिंदुओं को सेना में भर्ती चलाने का अभियान भी चलाया जिसमें पूर्ण रूप से सफल हो गए लेकिन श्यामा प्रसाद मुखर्जी और अनेक ऐसे हिंदूवादी हिंदू महासभा के नेता थे जिन्होंने उन्हें धोखा दिया और हिंदू महासभा राजनीतिक रूप से सत्ता में नहीं आ सकी क्योंकि 1949 के बाद जो चुनाव हुए उसमें हिंदू महासभा के नेताओं ने ही उन्हें धोखा दिया
अगर वीर सवारकर की बात को कांग्रेस ने माना होता तो देश विभाजन की त्रासदी से बच गया होता: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री #YogiAdityanath pic.twitter.com/51ESxu7Cmy
— News & Features Network (@mzn_news) May 28, 2022
हिंदू महासभा (Hindu Mahasabha) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने हिंदू महासभा से अलग होकर जनसंघ की स्थापना की जिस कारण जो वोट हिंदू महासभा को मिलने से वह जनसंघ को मिले और इसका फल पूरे देश को भुगतना बना देश में कांग्रेस की सरकार बनी है जिसने पूरे देश को बर्बाद कर दिया
श्रद्धांजलि देने वालों में मुख्य रूप से (Hindu Mahasabha) राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष योगेंद्र वर्मा राष्ट्रीय महामंत्री अभिनव अग्रवाल महिला प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय अध्यक्ष शुभा गिरवाल प्रदेश अध्यक्ष अरुण चौधरी कार्यालय मंत्री एडवोकेट नीलम देवी कार्यालय प्रभारी सचिन कपूर जोगी युवा जिलाध्यक्ष आशीष शर्मा महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष पूजा चौहान लक्ष्मी नगर के नगर अध्यक्ष कमल त्यागी हर्षित त्यागी अमन पूजा शर्मा गोपाल वर्मा सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे और और सभी ने वीर सावरकर के पद चिन्हों पर चलने का संकल्प.

