वैश्विक

आतंकवाद का भारत किस तरह से सामना कर रहा है, उसका अंदाजा यूएन को नहीं: Indian Ministry of External Affairs

खुर्रम परवेज की सुरक्षा बलों द्वारा की गई गिरफ्तारी को लेकर संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने चिंता जताई है। उसने भारत से आतंकवाद विरोधी कानून यूएपीए में संशोधन करने का आग्रह किया है। जिसपर Indian Ministry of External Affairs की तरफ से सख्त प्रतिक्रिया दी गई है। फटकार लगाते हुए भारत ने कहा है कि सीमा पार से आतंकवाद का भारत किस तरह से सामना कर रहा है, उसका अंदाजा यूएन को नहीं है।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने पिछले हफ्ते कश्मीर अधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज को आतंकवादी गतिविधियों और आतंकवादी अधिनियम के कमीशन के लिए धन जुटाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। परवेज पर यूएपीए और दंड संहिता के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है जिसमें अधिकतम मौत की सजा है।

परवेज की गिरफ्तारी पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के प्रवक्ता रूपर्ट कॉलविल ने यूएपीए को प्रयोग को लेकर चिंता जाहिर की। जेनेवा से बुधवार को जारी बयान में कहा गया कि हम आरोपों के तथ्यात्मक आधार से अनजान हैं। परवेज के मानवाधिकार कार्यों के लिए उन्हें पहले भी निशाना बनाया जा चुका है।

https://twitter.com/MEAIndia/status/1466359112153796610?s=20

 वहीं गुरुवार को विदेश मंत्रालय Indian Ministry of External Affairs के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने संयुक्त राष्ट्र के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। मंत्रालय ने यूएपीए सही ठहराते हुए कहा कि संयुक्‍त राष्‍ट्र के बयान से साफ पता चलता है कि भारत सीमा पार के आतंकवाद का जिस तरह से सामना कर रहा है, उससे उसका अंदाजा नहीं है।

बागची ने कहा कि आतंकवाद के चलते भारतीय लोगों का मानवाधिकार काफी प्रभावित हो रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने खुर्रम की गिरफ्तारी को सही बताया गया है। भारत ने कहा कि यूएपीए को भारतीय संसद से देश की संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए बनाया है।

बागची ने आगे कहा है कि भारत में अधिकारी कानून के उल्लंघन के खिलाफ काम करते हैं न कि कानून के खिलाफ। हम OHCHR से मानवाधिकारों पर आतंकवाद के नकारात्मक प्रभाव की बेहतर समझ विकसित करने की अपील करते हैं।

News-Desk

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