Ukraine : मोरियूपोल में सुपरमार्केट में लगी, नो-फ्लाई ज़ोन लागू करने से इनकार
Ukraine के कई शहरों को तबाह कर दिया है. लोग अपना देश छोड़ अन्य देशों में छिपने को मजबूर हो गए हैं. लेकिन फिर भी यूक्रेन रूस के सामने झुकने को तैयार नहीं है. अब भी यूक्रेन के कई शहर रूसी सेना के नियंत्रण से बाहर हैं. हालांकि इस युद्ध को लेकर अमेरिका और नाटो के अधिकारियों ने आशंका जताई है कि पुतिन इस देश पर तब तक मिसाइलें बरसाता रहेगा जब तक यूक्रेन के सभी शहर खुद आत्मसमर्पण नहीं कर देते.
एक तरफ जहां इस युद्ध में दोनों ही पक्ष रणभूमी छोड़ने को तैयार नहीं हैं. वहीं अफसरों की माने तो रूस के हवाई हमलों की वजह से आने वाले दिनों में आम नागरिकों के मारे जाने का आंकड़ा और ज्यादा बढ़ सकता है. इस बीच मास्को- रुस के राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि यूक्रेन में स्पेशल ऑपरेशन पर निर्णय काफी कठिन फैसला था
साथ ही उन्होंने कहा कि इस जंग के दौरान यूक्रेन पर नो-फ्लाई जोन लगाने वाला कोई भी देश हमारा दुश्मन होगा, रूस के खिलाफ प्रतिबंध युद्ध की घोषणा के समान हैं.
Ukraine में स्पेशल ऑपरेशन पर निर्णय लेना कठिन- पुतिन
रुस के राष्ट्रपति शनिवार को कहा कि Ukraine में स्पेशल ऑपरेशन पर निर्णय लेना उनके लिए कठिन था. पुतिन ने कहा कि रूस यूक्रेन में संघर्ष को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की कोशिश कर रहा था. डोनबास को रूसी बोलने और अपने तरीके से जीने की अनुमति देना आवश्यक था. पुतिन ने कहा कि 2014 से अब तक डोनबास में 13 से 14 हजार लोग मारे गए हैं, लेकिन पश्चिम देशों ने इस पर ध्यान नहीं दिया.
पुतिन ने कहा कि रूस-नाटो संघर्ष के परिणाम, अगर ऐसा हुआ, तो सभी के लिए स्पष्ट हैं. पुतिन ने कहा कि रूस ने मारियुपोल से मानवीय गलियारा देने के कीव के अनुरोध का तुरंत जवाब दिया, लेकिन नियो-नाजी किसी को रिहा नहीं कर रहे हैं. पुतिन ने कहा कि यूक्रेनी पक्ष ने 6,000 से अधिक विदेशी नागरिकों को बंधक बना रखा है, अपने नागरिकों के साथ और भी बुरा व्यवहार कर रहा है. पुतिन ने कहा कि रूस में भी नियो-नाज़ी हैं, लेकिन सरकार में नहीं, जैसा कि यूक्रेन में है.
Ukraine पर रूस की सेना के हमले तेज़ हो रहा हैं. एक के बाद एक शहर रूसी फौजी (Russian army) की कार्रवाई का निशाना बनते जा हैं. ऐसे में कुछ लोग देश छोड़कर जा रहे हैं तो बाक़ी लोग रूसी सेना से लोहा लेने और अपने परिवारों को बचाने के लिए हथियारों से लैस हो रहे हैं.
मार्शल लॉ लगा चुकी Ukraine सरकार
ऐलान-ए-जंग के बाद मार्शल लॉ लगा चुकी यूक्रेन सरकार ने युद्धकाल में लोगों को हथियार रखने में रियायत भी दी है. जिसके बाद देश के कई शहरों में गन स्टोर्स के बाहर लंबी कतारें नज़र आती हैं. लोग नई बंदूकें ले रहे हैं तो साथ ही बड़े पैमाने पर गोलियां और कारतूस भी जमा कर रहे हैं.
लोगों के दस्तावेज़ों की जांच के बाद उन्हें एक-एक कर स्टोर में जाने दिया जाता है. उसके बाद स्टोर से बंदूकें और कारतूस लेकर लोग निकलते हैं. हर किसी को डर है कि न जाने कब उनके मुल्क में चल रही लड़ाई उनके घर-परिवार के दरवाजे तक आ जाए.
नो-फ्लाई ज़ोन लागू करने से इनकार
Ukraine के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की (volodymyr zelensky) ने नाटो नेताओं के देश भर में नो-फ्लाई ज़ोन लागू करने से इनकार करने पर हमला किया है. एक उग्र भाषण में, ज़ेलेंस्की ने कहा कि हस्तक्षेप करने के लिए पश्चिम की अनिच्छा ने रूस को कस्बों और गांवों पर बमबारी जारी रखने के लिए “एक हरी बत्ती” दी थी. वहीं दूसरी तरफ नाटो ने तर्क दिया है कि नो-फ्लाई ज़ोन के परिणामस्वरूप मास्को के साथ टकराव होगा.

