UP Elections: मुस्लिम अब नहीं रह गया निर्णायक, जेहादी एजेंडा बिल्कुल साफ मोदी व योगी को हराना हैं- प्रमोद त्यागी

UP Elections: विश्व हिंदू महासंघ के प्रदेश मंत्री प्रमोद त्यागी ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी सबका साथ सबका विकास के साथ साथ सबका विश्वास भी जीतने के प्रयास में लगी हुई हैं जिसके अंतर्गत हिंदुओ के साथ साथ सभी योजनाओं में मुख्य रूप से मुस्लिम समुदाय के पुरुषों व महिलाओं को पूर्ण रूप में पोषित करने में लगें हुए हैं
जिसमें उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, बैंक खाते में भुगतान करने की बात हो, फ्री राशन, नमक, तेल, गेहूँ, चावल व चना वितरण हो या श्रम विभाग द्वारा श्रम कॉर्ड योजना के अंतर्गत बैंक खाते में 1000/- प्रति व्यक्ति जमा करने की बात हो किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया बल्कि कागजों में 20 % आबादी जगह योजनाओं में 35 से 40 % तक योजनाओं का लाभ अल्पसंख्यक समुदाय को दिया गया है
सुविधाओं का लाभः लेने के बाद भी बीजेपी को वोट न देना
लेकिन इसके बाद भी मुस्लिम बहुल 71 सीटों में से 67 पर बीजेपी बड़े अंतर हारना उनके द्वारा सब सुविधाओं का लाभः लेने के बाद भी बीजेपी को वोट न देना रहा है, जबकि पिछली बार बीजेपी को यहां से 47 सीटें मिली थी। बहुचर्चित कैराना सीट पर गैंगस्टर नाहिद हसन, व आजम खां का जेल से ही चुनाव जीतने के साथ समाजवादी पार्टी गठबंधन के 35 मुस्लिम प्रत्याशियों का जीत जाना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि इस बार मुसलमानों ने 100% वोट बीजेपी के खिलाफ किया।
श्री त्यागी ने बताया कि विश्व हिंदू महासंघ के अंतरिम राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत सुरेन्द्र नाथ अवधूत, प्रदेश अध्यक्ष भिखारी प्रजापति के नेतृत्व में महासंघ के सभी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं की लगातार वर्चुअल बैठक कर समस्त हिंदुओ को अधिक से अधिक संख्या में जागरूक करने व मतदान केंद्रों पर जाकर मतदान करने का विशेष अभियान चलाया गया जिसके परिणाम स्वरूप हिंदू जात-पात में नहीं बंटा और बीजेपी की पूर्ण बहुमत की सरकार बन गई।
उन्होंने कहा कि जेहादी कभी इस देश के नहीं हो सकते। इसलिए हिन्दुओं का जागृत होना बहुत जरूरी है।हिंदुओ के लिए इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या होगा कि कैराना से नाहिद हसन, रामपुर से आजम खां जैसे लोग जेल में बैठ कर भी चुनाव जीत गया, जबकिसरधना से संगीत सोम व थानाभवन से सुरेश राणा जो हिंदुत्व के लिए काम करते थे हर जगह हिंदुओ के लिए खडे होते थे, चुनाव हार गए।
अराजकता, गुंडागर्दी व जातिवाद का इतिहास
अराजकता, गुंडागर्दी व जातिवाद का इतिहास होते हुए भी समाजवादी पार्टी गठबंधन मुस्लिमों के दम पर 47 से 132 सीट जीत गया।
वही सुरक्षा, कानून व्यवस्था की स्थापना और लाभ की योजना व कट्टर हिंदुत्व की राजनीति करने के बावजूद योगी बाबा 50 सीट हार जाते है, यदि पांच सौ साल बाद राम मंदिर का निर्माण शुरू होने के बाद भी बीजेपी 50 सीट हार जाती है तो बताये क्या बदला है यूपी में?
क्योंकि मुस्लिमों का एजेंडा बिल्कुल साफ है उनके 10 साल के बच्चों को भी पता है कि मोदी व योगी को हराना हैं, जबकि 70 साल के हिंदुओ से पूछोगे तो आलू , प्याज, पेट्रोल सस्ता मिलना चाहिए भले ही उसके लिए पाकिस्तान समर्थकों की मुस्लिमपरस्त पार्टी को वोट देनी हो तो दे देंगे
#WATCH #Viral #Socialmedia #AkhileshYadav की जीत के लिए इबादत #Muslim #UPElectionResult2022 #SamajwadiParty (Courtesy: @HwTyagi ) pic.twitter.com/j8IEa11xlg
— News & Features Network (@mzn_news) March 11, 2022
जिसका ताजा उदाहरण पंजाब में सामने आया श्री त्यागी ने बताया कि महंत सुरेंद्र नाथ अवधूत जी ने उत्तर प्रदेश के सभी हिंदू मतदाताओं को आशीर्वाद देते हुए कहा जिन सनातनी भाई बहनों ने अपने मत का प्रयोग राष्ट्र हित मे, धर्म हित में कर अपने आपको, देश को, धर्म को और पूरे उत्तर प्रदेश को बचाने में योगदान दिया, उनका पूरा राष्ट्रीय सनातनी समाज हमेशा ऋणी रहेगा।
मुस्लिम समुदाय अब निर्णायक नहीं रह गया है
UP Elections में मुस्लिम समुदाय का समर्थन, जो यूपी की आबादी का 19 फीसदी से अधिक है, किसी भी पार्टी के लिए सरकार बनाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता था। लेकिन अब ऐसा नहीं है। ये समुदाय अब निर्णायक नहीं रह गया है।
इस चुनाव में समाजवादी पार्टी ने 57 मुस्लिम-बहुल सीटों में से 34 और उसके सहयोगी राष्ट्रीय लोक दल ने दो सीटों पर जीत हासिल की है। वहीं भाजपा ने पिछली बार जहां मुस्लिम बहुल 37 सीटों पर जीत दर्ज की थी वहीं इस बार सिर्फ 20 ऐसी सीटें जीतीं। लेकिन फाइनल टैली में भाजपा की संभावनाओं पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा और उसने भारी बहुमत से सत्ता हासिल कर ली।
एक वोट बैंक के रूप में मुस्लिम समुदाय के अप्रासंगिक होने का क्रम 2014 में शुरू हुआ जब बीजेपी लोकसभा चुनावों के लिए हिंदू एकीकरण के हिस्से के रूप में ओबीसी और एमबीसी मतदाताओं तक पहुंच गई। इस क्रम में अल्पसंख्यक वोट को चुनावी रूप से हाशिए पर छोड़ दिया गया था। उस चुनाव में एक भी मुस्लिम सांसद लोकसभा में नहीं पहुंचा।
मुस्लिम विधायकों की संख्या (2017) घटकर 25
2012 में यूपी विधानसभा में मुस्लिम विधायकों की तादाद 68 थी। लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में मुस्लिम विधायकों की संख्या घटकर 25 हो गई। ये स्थिति तब है जब कुल 403 विधानसभा क्षेत्रों में से 120 से अधिक विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जिनकी मुस्लिम आबादी 20 फीसदी या उससे अधिक है।
रामपुर में मुसलमानों की आबादी 50 फीसदी से अधिक है। मुरादाबाद और संभल में यह 47 फीसदी है। बिजनौर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली और अमरोहा में 40 फीसदी से अधिक मुसलमान हैं। पांच अन्य जिलों में मुस्लिम आबादी 30 से 40 फीसदी के बीच और 12 जिलों में 20 से 30 फीसदी मुस्लिम हैं।
दूसरी तरफ बसपा ने अपना सोशल इंजीनियरिंग ध्यान दलित-मुस्लिम संयोजन से हटाकर दलित-ब्राह्मण कॉम्बिनेशन में स्थानांतरित कर दिया और उसे इससे कोई फायदा भी नहीं मिला।
मुस्लिम समुदाय के बारे में एक खास बात ये रही कि इस बार किसी भी बड़े विपक्षी दल ने अपने घोषणापत्र में समुदाय विशेष का कोई वादा नहीं किया।
इस बार राजनीतिक दल मुस्लिम मुद्दों पर बिल्कुल खामोश रहे
इस बार राजनीतिक दल मुस्लिम मुद्दों पर बिल्कुल खामोश रहे हैं। चाहे वह मुस्लिम उम्मीदवारों को खड़ा करना हो या नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध का समर्थन करना हो, गैर-भाजपा दल ज्यादातर चुप रहे हैं। ऐतिहासिक रूप से मुस्लिम कल्याण की प्रबल समर्थक सपा ने भी मुस्लिमों के प्रति खुली हमदर्दी नहीं दिखाई और न ये प्रचार किया कि उसने कितने मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा।
अपनी संख्यात्मक ताकत के बावजूद मुस्लिम समुदाय ने देखा है कि प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार को हराने के लिए सबसे शक्तिशाली उम्मीदवार का समर्थन करने की उसकी रणनीति ने हाल के चार चुनावों – 2014 लोकसभा, 2017 विधानसभा, 2019 लोकसभा और अब 2022 विधानसभा में काम नहीं किया है।
(यह आर्टिकल News Desk द्वारा एडिटेड नहीं हैं। लेखक प्रकाशित समाचार सामग्री के लिए स्वयं जिम्मेदार हैं।)

