कोयला खदानें अडानी को देनी हैं, किसान खेती छोड़ मजदूर बन रहे- Rakesh Tikait
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ( Rakesh Tikait) ने देश में छिड़े लाउडस्पीकर विवाद पर अपनी राय देते हुए कहा कि लाउडस्पीकर को धार्मिक आधार पर नहीं, साउंड के आधार पर बंद करना चाहिए। एक न्यूज चैनल से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि देश में केवल एक चीज पर काम चल रहा है कि वोट कैसे मिलेंगे। वोट हासिल करने पर पीएचडी चल रही है।
राकेश टिकैत ( Rakesh Tikait) ने कहा कि लाउडस्पीकर कहीं पर भी हो वो आवाज करता है, ऐसे में उसको धार्मिक आधार पर नहीं नॉइस पॉल्यूशन फैलाने के आधार पर बंद करना चाहिए। देश में व्याप्त बिजली संकट के बीच किसानों को सस्ती बिजली मुहैया कराने के सवाल पर किसान नेता ने कहा कि सरकार और बिजली कंपनियां मिली हुई हैं। उन्होंने कहा कि चार-पांच महीने पहले कोयले का रेट 8000 रुपए प्रति टन था आज 18,000 रुपए है।
ऑक्सफैम इंडिया की रिपोर्ट, 2021 में 84 % परिवारों की आय गिरी, 20% की तो आधी हो गई।भारतीय अरबपतियों की आय दोगुना बढ़ी। हरदिन 25000 किसान खेती छोड़ मजदूर बन रहे। फसलों का लाभकारी मूल्य (#msp गारंटी) नहीं मिलेगा तो ये क्रम जारी रहेगा और #kisanandolan ही रास्ता बचेगा। @ANI @PTI_News
— Rakesh Tikait (@RakeshTikaitBKU) May 2, 2022
राकेश टिकैत ( Rakesh Tikait) ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि कोयला खदानें अडानी को देनी हैं इसलिए कोयले और बिजली का संकट दिखाकर खदानें अडानी को कैसे दी जाएं इसका षड्यंत्र रचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को अब तक सस्ती बिजली नहीं मिली है। साथ ही उन्होंने बताया कि दिल्ली के किसान आंदोलन के बाद उत्तर प्रदेश में एग्रिकल्चर बिजली के रेट आधे करने की बात जरूर की है पर बिजली की आपूर्ति में कटौती हुई है।
एमएसपी के सवाल पर राकेश टिकैत ( Rakesh Tikait) ने कहा कि भारत सरकार ने कमेटी के नाम मांगे हैं पर हमने सरकार से कुछ सवाल पूछे हैं, उन सवालों के जवाब मिलते ही हम एक हफ्ते के अंदर कमेटी के नाम बता देंगे।
राकेश टिकैत ( Rakesh Tikait) ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए ट्वीट किया था कि किसान खेती छोड़कर मजदूर बन रहे हैं। किसानों की आय घट रही है और अरबपतियों की संपत्ति लगातार बढ़ती जा रही है।
बीकेएस-नाबार्ड रिपोर्टः कृषि कर्ज माफी से किसानों की स्थिति नहीं सुधरती।
संकट में कृषि क्षेत्र बना सहारा, 3 वर्षों में 1.1 करोड़ को दिया रोजगार: सीएमआईई। फिर भी खेती घाटे में।इन खबरों से भी सरकारों की चुप्पी न टूटी तो किसानों को तो आवाज उठानी ही पड़ेगी। @Ani @PTI_News @PMOIndia pic.twitter.com/jy8vrSQUN7— Rakesh Tikait (@RakeshTikaitBKU) April 23, 2022
उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन ही रास्ता बचेगा। साथ ही राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए सबका साथ-सबका विकास मुद्दे की कमियां भी गिनाई थीं।
उन्होंने ट्वीट कर कहा कि जिला पंचायत का बजट अपने समर्थित सदस्यों के इलाके में आवंटित करना “सबका साथ-सबका विकास” में सबसे बड़ी बाधा है।
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