अग्निपथ योजना के विरोध में फूट-फूटकर रोने लगीं Alka Lamba, Watch Video
अग्निपथ योजना के विरोध में कांग्रेस के प्रदर्शन के बीच Alka Lamba सड़क पर बैठकर नारेबाजी करने लगीं। Alka Lamba को महिला पुलिसकर्मियों ने जबरन उठाने की कोशिश की तो वह उलझती नजर आईं। उन्होंने रोते हुए युवाओं का दर्द बयां किया। महिला पुलिस कर्मियों ने उनको उठाने की कोशिश तो वो सड़क पर लेट गईं। उन्होंने कहा कि मैं गांधी के देश में आराम से बैठी हूं। मेरे हाथ में एके 47 नहीं है।
Alka Lamba ने कहा, ”हाथ बंधे हुए हैं, भारत माता की जय, जय जवान, जय किसान, नहीं करने दे रहे हैं, यह कौन से संविधान में लिखा है। कैसी ट्रेनिंग इन्हें दी है, जब अग्निपथ में चार साल की ट्रेनिंग देकर बाहर हथियार लेकर भेजोगे ना तो ऐसी ही गर्दन तोड़ेंगे, या तो मेरी गर्दन टूटेगी या मैं इन्हें (पुलिसकर्मी के हाथ को) पीछे करूंगी तो दिखाया जाएगा कि अलका लांबा ने वर्दी पर हाथ डाला।”
#WATCH #congress नेता अलका लांबा के प्रदर्शन के दौरान छलके आंसू. निहत्थे बैठे विपक्षियों से भी डरती है pic.twitter.com/VYfJ3oVkUF
— News & Features Network (@mzn_news) June 21, 2022
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, ‘हम लोग निहत्थे हैं। हम यहां सड़क पर बैठना चाहते हैं। लोकतांत्रिक अधिकार है। भारत माता की जय, जय जवान, जय किसान। उन्होंने कहा कि मैं अपने लिए नहीं रो रही हूं, देश की जो हालत हो रही है, उसको लेकर देश रो रहा है।
Alka Lamba ने आगे कहा कि मेरी चोटें कल ठीक हो जाएंगी, जो चोटें देश के संविधान और लोकतंत्र को पड़ रहीं हैं उसका क्या? सेना का जवान देश के लिए गोली खा रहा है। इस सरकार को इलाज की जरूरत है। लोकतंत्र में सभी को अपनी आवाज उठाने का अधिकार है।
देश के करोड़ों युवा सड़क पर हैं, वो आत्महत्या कर रहे हैं, कोई सुनने वाला है क्या? उनके मां-बाप ने सोचा था कि बेटा सरहद पर जाएगा, मां भारती के लिए शहीद होगा। तिरंगे में लिपटकर आएगा। वो मां रो रही है कि मेरे बेटे ने दम तोड़ दिया।
Alka Lamba ने कहा, ‘मैं रो नहीं रही थी। मुझे दुख है जिस तरह से लोकतंत्र की हत्या हुई है। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी ने तय किया था कि हम लोग सत्याग्रह के तहत मार्च करते हुए जंतर-मंतर तक जाएंगे। पुलिस ने हमें 24 अकबर रोड के बाहर रोक दिया। हम रुक गए। हम जमीन पर बैठकर सत्याग्रह कर रहे थे। जय जवान, जय किसान और भारत माता की जय के नारे गूंज रहे थे।
इतनी देर में लाठीचार्ज होता है। महिलाओं को घसीटा और पीटा जाता है। इतनी बुरी तरह पीटा गया कि मैं बता नहीं पा रही हूं। महिलाओं को महिला पुलिस एक हद तक घसीटती थी और जब बसों में डालने की बात आ रही थी तो वहां महिला नहीं पुरुष पुलिस दरवाजे पर खड़ी थी।
मैं बता नहीं सकती कि महिलाओं के साथ कैसा व्यवहार किया गया। उसके बाद पुलिस कर्मियों ने कुछ नहीं देखा, बहुत बुरी तरह मारा। मेरा पूरी शरीर नीला पड़ चुका है, इतनी चोट मेरे है। डीसीपी ने मुझसे अस्पताल चलने के लिए कहा, लेकिन मैंने खुद मना कर दिया।’

