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आयात की गई रैपिड जांच किट्स में भारी मुनाफाखोरी: रोक लगी

चीन से आयात की गई रैपिड जांच किट्स में भारी मुनाफाखोरी की गई।  245 रुपए में किट आयात कर 600 रुपए में सप्लाई की गई। यानी 145 फीसदी मुनाफा कमाया गया। यह खुलासा तब हुआ जब आयातक-वितरक के बीच का विवाद दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा था।

मामला उजागर होने के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि मुनाफाखारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उधर, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने यह स्पष्ट किया है कि टेंडर प्रक्रिया के तहत ही किट्स को खरीदा गया था।

इसमें सरकार को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ है क्योंकि इन कंपनियों को भारत ने एडवांस पेमेंट में पूरा भुगतान नहीं किया है। टेंडर में साफ साफ लिखा है कि अगर किसी भी प्रकार की गड़बड़ी मिलती है तो किट्स को वापस कर दिया जाएगा।

साथ ही भुगतान भी नहीं किया जाएगा। इसके अलावा आईसीएमआर ने सोमवार को जारी आदेश में किट्स के परिणामों में अंतर बताते हुए राज्यों से इन्हें वापस लौटाने और आरटी पीसीआर पर ही भरोसा करने के लिए कहा है।

दरअसल 16 अप्रैल को चीन से आईं 5.5 लाख किट्स की खेप एक आयातक कंपनी मैट्रिक्स लैब्स के जरिए आई थीं। देश में जब इन पर रोक लगी तो डिस्ट्रीब्यूटर रेयर मेटाबोलिक्स ने आयातक मैट्रिक्स लैब्स के खिलाफ एक याचिका दी थी।

विवाद था कि आयातक बाकी 2.24 लाख किट आईसीएमआर को नहीं भेज रहा। आयातक बोला, उसे 21 करोड़ में से अभी सिर्फ 12.75 करोड़ का ही भुगतान हुआ है। जबकि करार के मुताबिक आयातक को बाकी 8.25 करोड़ रुपये के भुगतान करना है। 

आईसीएमआर ने बताया, यह कोटेशन फ्री ऑन बोर्ड था, जिसमें लॉजिस्टिक को लेकर कोई वादा नहीं किया गया था। यह कोटेशन बिना किसी गारंटी के 100 फीसदी एडवांस भुगतान पर आधारित था।

 

News-Desk

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