फीलपांव: लक्षण और घरेलु उपचार
फीलपांव रोग कुष्ठ रोगों में सबसे ऊपर माना जाता है। इसे गजचर्म भी कहते हैं। जिन स्थानों पर वर्षा का पानी बहुत दिनों तक भरा रहता है या जहां सभी ऋतुओं में पानी भरा रहता है अथवा सीलन बनी रहती है, वहां यह रोग विशेष रूप से होता है। बंगाल तथा उड़ीसा में यह रोग अधिक होता है।
फीलपांव के रोग में रोगी के पेड़ू तथा जांघों की जड़ में सूजन उत्पन्न हो जाती है और धीरे-धीरे करके रोगी के पैरों तक पहुंच जाती है। जिसके कारण रोगी का पैर फूलकर मोटा हो जाता है। इस रोग में रोगी के अंदर बुखार के लक्षण भी पाये जाते हैं
भोजन -पुराने सांठी चावल, जौ, परवल, लहसुन, गाय का पेशाब, एरण्डी का तेल तथा भूख को बढाने वाले पदार्थ आदि खाने चाहिएं।
परहेज -गुड़, मीठा, दूध, भारी पदार्थ और नदियों का जल आदि का प्रयोग न करें।
घरेलु उपचार/home remedy–
✍🏻20 ग्राम हल्दी, 10 ग्राम पारस, 20 ग्राम जीरा, 10 कालीमिर्च के दाने, 10 ग्राम सिन्दूर, 10 ग्राम आमलासार और 10 ग्राम मैनसिल को ले लें। सबसे पहले पारा और गन्धक की कज्जली बना लें और फिर बाकी औषधियों को पीसकर और छानकर गाय के पेशाब में मिलाकर अच्छी तरह से 1 दिन तक सुखा लें एवं इसको उलट-पलट करके मिलाते रहें। इस तैयार लेप को फीलपांव से ग्रस्त रोगी के पैरों पर लेप करने से लाभ होता है।
✍🏻गन्धक, पारा, नीलाथोथा, कत्था, मेहंदी, खुरासानी अजवायन, मोम, मालकांगनी को बराबर मात्रा में ले लें। सबसे पहले पारा और गन्धक की कज्जली करें। इसके पश्चात बाकी औषधियों को पीसकर और छानकर 1 दिन तक गाय के पेशाब में फेंट कर इसकी मालिश करने से फीलपांव और रक्तविकार यानी खूने के विकार नष्ट हो जाते है। पामा और छाजन जैसे रोगों में भी इसकी मालिश करने से लाभ मिलता है।
✍🏻दिन में 3-4 बार सफेद मिट्टी का तेल लगाने से फीलपांव, कुष्ठ और पानी देने वाला छाजन आदि रोगों में लाभ पहुंचता है।
✍🏻 चमेली के तेल में नींबू के रस को मिलाकर मालिश करने से फीलपांव के रोगी को आराम मिलता है। इसके अलावा इस तेल से खुजली, छाजन और शीतपित्त आदि से ग्रस्त त्वचा रोगियों को लाभ पहुंचता है।
✍🏻थूहर के पत्तों को पीसकर नमक मिलाकर 20 ग्राम प्रतिदिन सेवन करने से फीलपांव के रोगी को लाभ मिलता है।
✍🏻सहदेवी की जड़ को ताड़ के फल के रस के साथ पीसकर लगाने से फीलपांव का रोग ठीक हो जाता है।
✍🏻एरण्ड के तेल में छोटी हरड़ को भूनकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 6 ग्राम की मात्रा में लेकर 100 मिलीलीटर गाय के पेशाब में मिलाकर पीने से फीलपांव का रोग ठीक हो जाता है।
✍🏻फीलपांव के रोग को दूर करने के लिए चीता, देवदारू और सरसों अथवा सहजने में से किसी एक पेड़ की जड़ की छाल को गाय के पेशाब में पीसकर गर्म-गर्म लेप करने से फीलपांव के रोगी को लाभ पहुंचता है।
✍🏻 सात नागरपान को ठंडाई की तरह घोंटकर कुछ दिन तक सेवन करने से फीलपांव के रोगी को लाभ मिलता है।
✍🏻6 मिलीलीटर सरसों और 6 मिलीलीटर जियापोते का रस मिलकर पीने से फीलपांव का रोग दूर हो जाता है।
✍🏻गाय का पेशाब दिन में 3 बार 30-30 मिलीलीटर की मात्रा में पीने से फीलपांव के रोग में लाभ होता है।
✍🏻10 से 20 मिलीलीटर गिलोय के रस में 50 मिलीलीटर सरसों के तेल को मिलाकर रोजाना सुबह-शाम खाली पेट पीने से फीलपांव रोग दूर हो जाता है।
गाय के पेशाब को गिलोय के रस के साथ पीने से फीलपांव रोग में लाभ होता है।
✍🏻गाय के पेशाब और कालीमिर्च को पीसकर पैरों पर लेप करने से रोगी को आराम मिलता है।
फीलपांव के रोग में कालीमिर्च को सिल पर घिसकर पैरों पर लेप करने से रोगी को लाभ मिलता है।
कालीमिर्च को मुंह में रखकर चूसते रहने से फीलपांव के रोगी को फायदा मिलता है।
✍🏻फीलपांव के रोगी का रोग दूर करने के लिए चीता की जड़ को पीसकर लगाने से लाभ मिलता है। फोड़ा पक गया हो तो वह खुद ही फूट जाता है।
✍🏻राल का मलहम बनाकर फीलपांव के फोड़े पर लगाने से फोड़े के कारण होने वाला दर्द दूर हो जाता है।
✍🏻 5 ग्राम हरड़ को घी में भूनकर गाय के पेशाब के साथ लेने पर फीलपांव के रोगी को लाभ मिलता है।
✍🏻2 से 4 ग्राम हल्दी और गुड़ को गाय के पेशाब के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से फीलपांव के रोगी का रोग दूर हो जाता है।
फीलपांव के रोगी का रोग दूर करने के लिए 10 ग्राम हल्दी के चूर्ण को 20 ग्राम गुड़ में मिलाकर कांजी के साथ प्रतिदिन खाने से फीलपांव के रोग में लाभ होता हैं।
18. मिश्री- 1.20 ग्राम लोध्र का चूर्ण मिश्री के साथ प्रतिदिन 3 से 4 बार लेने से 1 सप्ताह के अन्दर ही फीलवांव के रोगी का रोग मिट जाता है।
✍🏻3 से 6 ग्राम देवदारू का चूर्ण या 10 से 40 बूंद देवदारू का रस प्रतिदिन सेवन करने से फीलपांव के रोगी के पैरों की सूजन समाप्त हो जाती है।
पुराने फीलपांव के रोगी के पैर की सूजन कम करने के लिए देवदारू, हल्दी और गुग्गुल को एकसाथ पीसकर लेप करने से रोगी को लाभ मिलता है।
✍🏻लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग आक की जड़ की छाल कपूर के रस या सिन्दूर रस, सुरमा एवं सांमरसांग भस्म के साथ सुबह-शाम सेवन करने और फीलपांव के फोड़े पर लेप करने से फीलपांव रोग में लाभ मिलता है।
✍🏻10-10 नीम और तुलसी के पत्तों को मिलाकर रोजाना सुबह खाते रहने से फीलपांव की शिकायत दूर हो जाती हैं। नीम के तेल की मालिश करने से और सोते समय सूजन वाला पैर ऊंचा रखने से भी इस रोग में लाभ होता है।
फीलपांव के रोगी का रोग दूर करने के लिए 5 से 10 बूंद नीम का तेल प्रतिदिन 2 बार सेवन करना चाहिए।
✍🏻फीलपांव के फोड़े पर महाबला की जड़ को पीसकर लेप करने से लाभ होता है। यह नए फीलपांव के रोग को दूर करने में भी सहायक होता है।
✍🏻10 से 20 ग्राम गोरखमुण्डी के पंचांग (जड़, फूल, पत्ती, तना, फल) को सुबह-शाम फीलपांव के फोड़े पर लगाने से रोगी को लाभ मिलता है।
✍🏻 20 से 40 मिलीलीटर की मात्रा में केले के पेड़ से प्राप्त रस का सेवन करने से फीलपांव के रोगी को आराम मिलता है।
✍🏻20 ग्राम ढाका की जड़ लेकर सरसों के तेल में मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से फीलपांव रोगी को लाभ मिलता है।
✍🏻कसोन्दी की जड़ शहद के साथ मिलाकर सेवन करने से फीलपांव का रोग ठीक हो जाता है।
✍🏻धतूरे की जड़, एरण्ड की जड़, सम्भालू की जड़, सांठी की जड़, सहजना की जड़ तथा सरसों को एकसाथ मिलाकर बारीक पीसकर लेप करने से फीलपांव का रोग दूर हो जाता है।
✍🏻सरसों, सांठी की जड़ तथा सोंठ को एकसाथ बारीक पीसकर लेप करने से फीलपांव का रोग दूर हो जाता है।
✍🏻मक्खन, घी, शहद, पीपल, अदरक, मिर्च और सेंधानमक को मिलाकर पीने से फीलपांव का रोग दूर हो जाता है।
✍🏻सिंहोड़े के काढ़े को गाय के पेशाब में मिलाकर पीने से फीलपांव के रोगी को आराम मिलता है।
✍🏻चीता की जड़ को पीसकर सूजन पर लेप करना चाहिए। इससे श्लीपद के कारण उत्पन्न सूजन नष्ट हो जाती है।
✍🏻पान के 7 पत्तों का चूर्ण गर्म पानी और 1 ग्राम सेंधानमक के साथ दिन में 3 बार लेने से फीलपांव के रोग मे आराम आता है।
✍🏻धतूरा, एरण्ड की जड़, सम्भालू, पुनर्नवा, सहजन की छाल और सरसों को एक साथ मिलाकर लेप करने से फीलपांव के रोग में आराम मिलता है।
✍🏻भांगरा के पंचांग (जड़, तना, पत्ती, फल और फूल) की लुग्दी को तिल के तेल में मिलाकर अथवा केवल इसके रस से फीलपांव रोग में मालिश करने से लाभ मिलता है।
✍🏻सौंठ, राई और पुर्ननवा को 10-10 ग्राम की मात्रा में गाय के पेशाब में पीसकर पैरों पर लेप करने से फीलपांव के रोगी का रोग दूर हो जाता है।
सौंठ को रोजाना गाय के पेशाब या गर्म पानी के साथ सेवन करने से फीलपांव रोग में लाभ होता है।
✍🏻 पपीते के पत्तों को आग में गर्म करके फीलपांव रोग के कारण होने वाली सूजन पर लगातार दिन में 3 बार सिंकाई करने से लाभ होता है।
✍🏻फीलपांव व नहारू (बाला रोग) पर अपराजिता की 10-20 ग्राम जड़ को थोड़े पानी के साथ पीसकर, गर्म करके लेप करने से तथा 8-10 पत्तों के कल्क की पोटली बनाकर सेंकने से लाभ होता है।
✍🏻पलास की जड़ के 100 मिलीलीटर रस में थोड़ा सा सफेद सरसों का तेल मिलाकर 2 चम्मच सुबह-शाम पीने से फीलपांव रोग में लाभ होता है।
डॉ. ज्योति ओम प्रकाश गुप्ता (N.D.)
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