पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल Pervez Musharraf का निधन
पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति Pervez Musharraf का निधन हो गया है.वह 2001 से 2008 तक पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे. Pervez Musharraf ने दुबई में आखिरी सांस ली. काफी वक्त से वे अस्पताल में भर्ती थे. बता दें कि पाकिस्तान के पूर्व सैन्य प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ को देश से निकाला दिया गया था और वह दुबई में जाकर बस गए थे.
पाकिस्तानी सैन्य तानाशाह जनरल परवेज मुशर्रफ को दिल और उम्र संबंधी दूसरी कई स्वास्थ्य समस्याएं थीं. परवेज मुशर्रफ ने ही 1999 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को बिना बताए भारत के खिलाफ कारगिल युद्ध की शुरुआत की थी. उन्होंने सेनाध्यक्ष रहते तख्तापलट कर पाकिस्तान में मार्शल लॉ भी घोषित किया था.
जनरल परवेज मुशर्रफ करगिल युद्ध के वक्त पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख थे. बताया जाता है कि उन्होंने करगिल को लेकर पाकिस्तान के तत्कालीन पीएम नवाज शरीफ को अंधेरे में रखा था. मुशर्रफ ने 1999 में उस वक्त सैन्य तख्तापलट किया, जब नवाज शरीफ श्रीलंका में थे. बाद में उन्होंने खुद को पाकिस्तान का राष्ट्रपति घोषित कर दिया. इस रक्तविहीन क्रांति में नवाज पर श्रीलंका से आ रहे मुशर्रफ के विमान का अपहरण करने और आतंकवाद फैलाने का आरोप लगाने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया था. बाद में उन्हें परिवार के 40 सदस्यों के साथ सऊदी अरब निर्वासित कर दिया गया था.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद नवाज शरीफ ने Pervez Musharraf को चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बनाया था. बाद में नवाज शरीफ ने शक के आधार पर जनरल परवेज मुशर्रफ को सेना प्रमख के पद से हटा दिया था.
नवाज शरीफ ने Pervez Musharraf के स्थान पर जनरल अजीज को चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बनाए जाने की घोषणा की थी. हालांकि, नवाज शरीफ यह नहीं समझ पाए कि जनरल अजीज भी परवेज मुशर्रफ के ही वफादार हैं. आखिरकार शरीफ जिस सैन्य तख्तापलट की आशंका से घिरे थे वह हो ही गया और परवेज मुशर्रफ ने उन्हें सत्ता से बेदखल कर दिया था.
पाकिस्तान की एक अदालत ने दिसंबर 2019 में देशद्रोह के एक मामले में मुशर्रफ को मौत की सजा सुनायी थी. यह मामला नवंबर 2007 का है, जब मुशर्रफ ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति के रूप में संविधान को निलंबित कर दिया था और अपने कार्यकाल की अवधि बढ़ाने के लिए आपातकाल लागू किया था. इसके बाद उन्होंने महाभियोग के खतरे से बचने के लिए 2008 में इस्तीफा दे दिया था.
जब उनके कट्टर दुश्मन नवाज शरीफ 2013 में सत्ता में लौटे, तो उन्होंने मुशर्रफ के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा शुरू किया. मुशर्रफ ने 1999 में तख्तापलट करते हुए शरीफ को अपदस्थ कर दिया था. पूर्व जनरल पर मार्च 2014 में देशद्रोह का आरोप लगाया गया. हालांकि, उन्होंने इस मामले को राजनीति से प्रेरित बताया था.
पेशावर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस वकार अहमद सेठ की अगुवाई वाली विशेष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ ने इस ऐतिहासिक मामले में फैसला सुनाया था. अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति Pervez Musharraf को नवंबर 2007 में संविधान को निरस्त करके तथा संविधान से परे आपातकाल लागू करके देशद्रोह का दोषी ठहराया था तथा उन्हें सजा-ए-मौत सुनायी थी. इस तरह मुशर्रफ पर संविधान को पलटने के लिए दोषी ठहराए जाने वाले पहले सैन्य शासक बनने का कलंक भी लगा.

